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आध्यात्मिक ज्ञान देने के नाम पर बंद होटल में रखी जा रही थी बच्चियां, बाहर निकलने पर भी थी पाबंदी
Updated Sat, 07 Jul 2018 02:48 AM IST
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बच्चियां बरामद फाइल नंबर-दो
आध्यात्मिक ज्ञान देने के नाम पर बंद होटल में रखी जा रही थी बच्चियां, बाहर निकलने पर भी थी पाबंदी
-सूचना मिलते ही हरियाणा के लोग राजसमंद के लिए हुए रवाना
वर्ष 2017 में भी राजस्थान में छापेमारी कर बच्चियों को कराया था बंधनुमक्त
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। राजसमंद से हरियाणा की बच्चियों के बरामद होने के बाद परिजन बच्चियों को लेने के लिए रवाना हो गए। शनिवार को हरियाणा बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी भी राजसमंद के लिए रवाना होंगे। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है कि आध्यात्मिक ज्ञान देने के नाम पर ही बच्चियों को बंद होटल में रखा जा रहा था। संस्था का रजिस्टशेन भी नहीं था।
राजसमंद के एक होटल में संचालित आश्रम में बुधवार दोपहर बाल संरक्षण आयोग ने पुलिस प्रशासन की सहायता से 68 बच्चियों को बंधनमुक्त कराया। सभी गुरुमुख स्कूल कांकरौली की बताई गई हैं। जो आध्यात्मिक पढ़ाई कर रही थीं। राजसमंद बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष भावना पालीवाल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि आध्यात्मिक ज्ञान देने के नाम पर बच्चियों को होटल में रखा गया था। बाहर निकलने पर भी पाबंदी थी। यही नहीं प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि आश्रम का कोई रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। इसके अलावा आश्रम को चलाने वाले लोगों पर वर्ष 2017 में भी कार्रवाई की जा चुकी है। हरियाणा बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बाल कृष्ण गोयल ने बताया कि पता चलने पर हरियाणा के रोहतक, पानीपत के लोग राजसमंद के लिए रवाना हो गए। शनिवार हरियाणा बाल संरक्षण आयोग की टीम भी राजसमंद के लिए रवाना होगी।
बताया गया कि होटल को आश्रम बनाने के लिए इसके कमरों के बाहर बनी बालकनियों को टिन शेड से कवर कर दिया गया था। होटल की छत से लेकर सभी बालकानियां पतरे लगाकर सील कर दी गई थीं। ताकि बाहर से कोई भी अंदर की गतिविधियां नहीं देख पाए। पुलिस प्रशासन अभी मामले की जांच कर रही है।
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परिजन अपनी मर्जी से भेजने की कह रहे बात
राजसमंद बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष भावना पालीवाल का कहना है कि अधिकतर परिजन खुद ही बच्चियों को भेजने की बात कह रहे हैं। हालांकि, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सके गी।
किशोर न्याय अधिनियम के तहत कराना होता है रजिस्ट्रेशन
हरियाणा बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बालक़ृष्ण गोयल ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी संस्थान में 18 साल से कम उम्र के बच्चों को रख रहा है तो उसे किशोर न्याय अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके अलावा टेम्प्रेरी रूप से बच्चों को किसी भी स्थान पर रखने के लिए बाल कल्याण समिति को सूचना दी जाती है। इसके अलावा जिस परिवार का बच्चा है, उसका शपथ पत्र देना होता है। जिसमें लिखा होता है कि वह पढ़ाने के लिए बच्चे को लाए हैं तथा उसका शोषण नहीं किया जाएगा तथा उसे सुविधाएं भी मिलेंगी।
बस मुझे मेरी बच्ची चाहिए और कुछ नहीं
मामले की सूचना मिलते ही पानीपत की रहनी वाली बच्ची की मां भी राजसमंद में पहुंची। बाल संरक्षण आयोग के सदस्यों ने अमर उजाला की उनसे बात कराई। बच्ची की मां ने कहा कि वह बस अपनी बेटी को ले जाना चाहती है। उन्हें नहीं पता था कि उसे बंद कमरे में रखा जाएगा। आगे की जानकारी उन्होंने देने से इनकार कर दिया।
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हरियाणा बाल संरक्षण आयोग भी मामले की जांच में जुट गया है। बच्चियों को बरामद कराकर परिजनों तक पहुंचाने में मदद की जाएगी।
-बाल कृष्ण गोयल, सदस्य हरियाणा बाल संरक्षण आयोग
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आध्यात्मिक ज्ञान देने के नाम पर बंद होटल में रखी जा रही थी बच्चियां, बाहर निकलने पर भी थी पाबंदी
-सूचना मिलते ही हरियाणा के लोग राजसमंद के लिए हुए रवाना
वर्ष 2017 में भी राजस्थान में छापेमारी कर बच्चियों को कराया था बंधनुमक्त
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। राजसमंद से हरियाणा की बच्चियों के बरामद होने के बाद परिजन बच्चियों को लेने के लिए रवाना हो गए। शनिवार को हरियाणा बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी भी राजसमंद के लिए रवाना होंगे। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है कि आध्यात्मिक ज्ञान देने के नाम पर ही बच्चियों को बंद होटल में रखा जा रहा था। संस्था का रजिस्टशेन भी नहीं था।
राजसमंद के एक होटल में संचालित आश्रम में बुधवार दोपहर बाल संरक्षण आयोग ने पुलिस प्रशासन की सहायता से 68 बच्चियों को बंधनमुक्त कराया। सभी गुरुमुख स्कूल कांकरौली की बताई गई हैं। जो आध्यात्मिक पढ़ाई कर रही थीं। राजसमंद बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष भावना पालीवाल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि आध्यात्मिक ज्ञान देने के नाम पर बच्चियों को होटल में रखा गया था। बाहर निकलने पर भी पाबंदी थी। यही नहीं प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि आश्रम का कोई रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। इसके अलावा आश्रम को चलाने वाले लोगों पर वर्ष 2017 में भी कार्रवाई की जा चुकी है। हरियाणा बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बाल कृष्ण गोयल ने बताया कि पता चलने पर हरियाणा के रोहतक, पानीपत के लोग राजसमंद के लिए रवाना हो गए। शनिवार हरियाणा बाल संरक्षण आयोग की टीम भी राजसमंद के लिए रवाना होगी।
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बताया गया कि होटल को आश्रम बनाने के लिए इसके कमरों के बाहर बनी बालकनियों को टिन शेड से कवर कर दिया गया था। होटल की छत से लेकर सभी बालकानियां पतरे लगाकर सील कर दी गई थीं। ताकि बाहर से कोई भी अंदर की गतिविधियां नहीं देख पाए। पुलिस प्रशासन अभी मामले की जांच कर रही है।
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परिजन अपनी मर्जी से भेजने की कह रहे बात
राजसमंद बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष भावना पालीवाल का कहना है कि अधिकतर परिजन खुद ही बच्चियों को भेजने की बात कह रहे हैं। हालांकि, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सके गी।
किशोर न्याय अधिनियम के तहत कराना होता है रजिस्ट्रेशन
हरियाणा बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बालक़ृष्ण गोयल ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी संस्थान में 18 साल से कम उम्र के बच्चों को रख रहा है तो उसे किशोर न्याय अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके अलावा टेम्प्रेरी रूप से बच्चों को किसी भी स्थान पर रखने के लिए बाल कल्याण समिति को सूचना दी जाती है। इसके अलावा जिस परिवार का बच्चा है, उसका शपथ पत्र देना होता है। जिसमें लिखा होता है कि वह पढ़ाने के लिए बच्चे को लाए हैं तथा उसका शोषण नहीं किया जाएगा तथा उसे सुविधाएं भी मिलेंगी।
बस मुझे मेरी बच्ची चाहिए और कुछ नहीं
मामले की सूचना मिलते ही पानीपत की रहनी वाली बच्ची की मां भी राजसमंद में पहुंची। बाल संरक्षण आयोग के सदस्यों ने अमर उजाला की उनसे बात कराई। बच्ची की मां ने कहा कि वह बस अपनी बेटी को ले जाना चाहती है। उन्हें नहीं पता था कि उसे बंद कमरे में रखा जाएगा। आगे की जानकारी उन्होंने देने से इनकार कर दिया।
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हरियाणा बाल संरक्षण आयोग भी मामले की जांच में जुट गया है। बच्चियों को बरामद कराकर परिजनों तक पहुंचाने में मदद की जाएगी।
-बाल कृष्ण गोयल, सदस्य हरियाणा बाल संरक्षण आयोग