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कड़ी धूप में होती है ट्रेनिंग, पीने के पानी को भी तरसे प्रशिक्षणार्थी
Updated Thu, 27 Jul 2017 02:18 AM IST
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कड़ी धूप में होती है ट्रेनिंग, पीने के पानी को भी तरसे प्रशिक्षणार्थी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
हैवी लाइसेंस की ट्रेनिंग लेने वाले जिले के सैकड़ों युवाओं को कई मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है। रोडवेज की ओर से उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही हैैै। रोडवेज की ओर से आईएमटी में हैवी लाइसेंस की ट्रेनिंग के लिए दो बैच बनाए गए हैं। सुबह और शाम के बैच में करीब 500 युवा भाग लेते हैं। इस दौरान उन्हें कड़ी धूप के साथ ही अचानक हुए होने वाली बारिश से जूझना पड़ता है। लगातार होने वाली ट्रेनिंग के बावजूद सैकड़ों ट्रेनर और प्रशिक्षणार्थियों के लिए यहां कोई शेड नहीं बनाया गया है। युवा धूप से बचने के लिए जहां-तहां पेड़ की छांव तलाशते फिरते हैं।
आईएमटी में प्रशिक्षण लेने आए युवाओं ने बताया कि उनकी ट्रेनिंग कुल 35 दिनों की होती है। इसके लिए विभाग ने सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक और दोपहर 2 से देर शाम 8 बजे तक का बैच निर्धारित किया है। इस दौरान एक बैच में 15 बसों पर करीब 15-15 लड़के ट्रेनिंग लेते हैं। उन्होंने करीब सवा साल पहले इसके लिए फॉर्म भरा था, जिसका नंबर अभी आया है। युवाओं ने बताया कि उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए एक बस और चालक के सिवा कोई भी सुविधा नहीं मिल पाती। उन्हें गर्मी में पीने के पानी की दिक्कत होती है। इससे निपटने के लिए कैंपर भराकर लाते हैं जोकि कुछ ही देर में खत्म भी हो जाता है। इसके अलावा उनके बैठने और आराम करने के लिए कोई भी इंतजाम नहीं रहता। उन्हें पेड़-पौधों की छांव की तलाश करनी पड़ती है। बारिश आने पर कुछ युवा तो बस में आश्रय ले लेते हैं मगर कुछ ऐसे भी रहते हैं जो अपनी बारी के इंतजार में बाहर होते हैं। उन्हें बारिश के समय परेशानी झेलनी पड़ती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
हैवी लाइसेंस की ट्रेनिंग लेने वाले जिले के सैकड़ों युवाओं को कई मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है। रोडवेज की ओर से उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही हैैै। रोडवेज की ओर से आईएमटी में हैवी लाइसेंस की ट्रेनिंग के लिए दो बैच बनाए गए हैं। सुबह और शाम के बैच में करीब 500 युवा भाग लेते हैं। इस दौरान उन्हें कड़ी धूप के साथ ही अचानक हुए होने वाली बारिश से जूझना पड़ता है। लगातार होने वाली ट्रेनिंग के बावजूद सैकड़ों ट्रेनर और प्रशिक्षणार्थियों के लिए यहां कोई शेड नहीं बनाया गया है। युवा धूप से बचने के लिए जहां-तहां पेड़ की छांव तलाशते फिरते हैं।
आईएमटी में प्रशिक्षण लेने आए युवाओं ने बताया कि उनकी ट्रेनिंग कुल 35 दिनों की होती है। इसके लिए विभाग ने सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक और दोपहर 2 से देर शाम 8 बजे तक का बैच निर्धारित किया है। इस दौरान एक बैच में 15 बसों पर करीब 15-15 लड़के ट्रेनिंग लेते हैं। उन्होंने करीब सवा साल पहले इसके लिए फॉर्म भरा था, जिसका नंबर अभी आया है। युवाओं ने बताया कि उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए एक बस और चालक के सिवा कोई भी सुविधा नहीं मिल पाती। उन्हें गर्मी में पीने के पानी की दिक्कत होती है। इससे निपटने के लिए कैंपर भराकर लाते हैं जोकि कुछ ही देर में खत्म भी हो जाता है। इसके अलावा उनके बैठने और आराम करने के लिए कोई भी इंतजाम नहीं रहता। उन्हें पेड़-पौधों की छांव की तलाश करनी पड़ती है। बारिश आने पर कुछ युवा तो बस में आश्रय ले लेते हैं मगर कुछ ऐसे भी रहते हैं जो अपनी बारी के इंतजार में बाहर होते हैं। उन्हें बारिश के समय परेशानी झेलनी पड़ती है।
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