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Rohtak News: आईटीआई मैदान में होगा 110 फीट लंबे रावण के पुतले का दहन
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। अहंकार-बुराई का प्रतीक रावण का 110 फुट का पुतला एक बार फिर पुरानी आईटीआई मैदान में खड़ा कर दिया है। रावण के साथ ही पिता भक्त 80 फीट का मेघनाद व 90 फीट रावण के भाई कुंभकरण का पुतला भी अब हवा से बातें कर रहे हैं। दशहरा पर इनका दहन किया जाएगा। पुरानी आईटीआई स्थित श्री रामलीला उत्सव कमेटी के प्रधान सुभाष तायल ने बताया कि उन्होंने 75 से 80 फीट का रावण का पुतला बनाने को कहा था। यह बड़ा बन गया है। इसके लिए ऊंची क्रेन मंगवानी पड़ी है। वहीं गाजियाबाद से आए कारीगर नदीम ने बताया कि वह और 12 कारीगर एक माह से इन पुतलों का निर्माण कर रहे हैं। इसमें खास है कि ठंडी आतिशबाजी पायरो का प्रयोग किया गया है। रावण के पुतले में खास है कि इसकी आंखों में लाल लाइट का प्रयोग किया गया है, जो कि ऐसा प्रतीत कराएगा कि रावण की आंखों से आग निकल रही है। इसके अलावा मुकुट में एलईडी लाइट लगाई गई है, जो कि रावण की शान को दिखाएगी। नदीम ने बताया कि पुतले को खड़ा करने के लिए दो क्रेन मंगाई गई है। इस बार रावण का पुतला लगभग दो टन का है। इनको बूट पहनाए गए हैं और इनके हाथ में तलवार व ढाल है। नदीम ने बताया कि पुतला बनाने का कार्य पहले उनके दादा करीमूदीन करते थे और अब वह कर रहे हैं।
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रोहतक। अहंकार-बुराई का प्रतीक रावण का 110 फुट का पुतला एक बार फिर पुरानी आईटीआई मैदान में खड़ा कर दिया है। रावण के साथ ही पिता भक्त 80 फीट का मेघनाद व 90 फीट रावण के भाई कुंभकरण का पुतला भी अब हवा से बातें कर रहे हैं। दशहरा पर इनका दहन किया जाएगा। पुरानी आईटीआई स्थित श्री रामलीला उत्सव कमेटी के प्रधान सुभाष तायल ने बताया कि उन्होंने 75 से 80 फीट का रावण का पुतला बनाने को कहा था। यह बड़ा बन गया है। इसके लिए ऊंची क्रेन मंगवानी पड़ी है। वहीं गाजियाबाद से आए कारीगर नदीम ने बताया कि वह और 12 कारीगर एक माह से इन पुतलों का निर्माण कर रहे हैं। इसमें खास है कि ठंडी आतिशबाजी पायरो का प्रयोग किया गया है। रावण के पुतले में खास है कि इसकी आंखों में लाल लाइट का प्रयोग किया गया है, जो कि ऐसा प्रतीत कराएगा कि रावण की आंखों से आग निकल रही है। इसके अलावा मुकुट में एलईडी लाइट लगाई गई है, जो कि रावण की शान को दिखाएगी। नदीम ने बताया कि पुतले को खड़ा करने के लिए दो क्रेन मंगाई गई है। इस बार रावण का पुतला लगभग दो टन का है। इनको बूट पहनाए गए हैं और इनके हाथ में तलवार व ढाल है। नदीम ने बताया कि पुतला बनाने का कार्य पहले उनके दादा करीमूदीन करते थे और अब वह कर रहे हैं।