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पीजीआई में सामान्य मरीज तो दूर एड्स के मरीजों के उपचार में भी लापरवाही
Updated Sat, 19 May 2018 02:56 AM IST
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सामान्य मरीज तो दूर एड्स के मरीजों के उपचार में भी लापरवाही
- सूरत-ए-हाल पीजीआईएमएस : प्रदेश का एकमात्र एआरटी सेंटर, वह भी रामभरोसे
संजय कुमार
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में आने वाले सामान्य मरीज तो दूर एड्स जैसे गंभीर रोगी भी रामभरोसे हैं। मेडिसिन विभाग के अधीनस्थ कार्य करने वाले एआरटी सेंटर में प्रदेश भर के मरीजों को उपचार के लिए आना होता है। यहां मरीजों की जांच करने के लिए सीडी-4 मशीन है, जो खराब पड़ी है। इसके चलते मरीजों का उपचार रुका हुआ है। जब मरीज सवाल पूछते हैं तो स्टाफ उनसे अभद्र व्यवहार ही करता है।
संस्थान में एआरटी सेंटर के बाहर मेडिसन विभाग ने नोटिस चस्पा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है कि सीडी-4 मशीन 19 अप्रैल से खराब पड़ी है। यदि कोई मरीज संस्थान में आता है तो पहले 01262-280276 पर संपर्क करके ही आए, इससे उसे परेशानी नहीं झेलनी पडे़गी। मरीजों की मानें तो एचआईवी पॉजिटिव मरीज पाए जाने पर यह जांच होती है। इसमें कुंभ, मेरीलीन, ट्राइडोट जांच होती है। सीडी-4 जांच में डॉक्टर मरीज के अंदर रोगों से लड़ने की क्षमता के सेल काउंट कर उपचार शुरू करते हैं। इसके बाद ही मरीज को आधार लिंक वाले एआरटी सेंटर भेजा जाता है। छह माह पीजीआईएमएस के मुख्य एआरटी सेंटर में उपचार के बाद ही मरीज को उसके करीबी लिंक एआरटी सेंटर में भेजा जाता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि रोगियों में यह जांच जरूरी है, क्योंकि यही बताती है कि शरीर में बीमारी कितनी हावी है। गौरतलब है कि एआरटी सेंटर में प्रतिदिन 40 के करीब मरीज उपचार के लिए आते हैं।
यहां पर भी है स्टाफ की कमी
एचआईवी के रोगियों के लिए डब्ल्यूएचओ, सरकार भले ही हर वर्ष लाखों करोड़ों का बजट जारी करती हो, लेकिन प्रदेश में दयनीय स्थिति है। पीजीआईएमएस के मुख्य एआरटी सेंटर में मशीन खराब होने के साथ स्टाफ की भी किल्लत है। मरीज बताते हैं कि उन्हें पर्याप्त संख्या में न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही यहां काउंसलर है। यदि कोई इसका कारण पूछे तो यहां अभद्रता से ही सभी पेश आते हैं। ऐसे में वह किससे कहें, अपनी समस्या सार्वजनिक करने में भी वह हिचक महसूस करते हैं। महिला मरीजों ने बताया कि दूर-दराज से आने के बाद जब उन्हें न में जवाब मिलता है तो वह कहां जाएं।
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अधिकारियों का पक्ष
इस मामले में एसटीआई इंचार्ज चंडीगढ़ डॉ. अंजलि अरोड़ा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें एक दिन पूर्व ही मशीन के खराब होने की जानकारी मिली है। जल्द ही यह मशीन सही करा दी जाएगी। लोकल प्रशासन को इस संबंध में बोल दिया जाएगा। वहीं इस मामले में प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. वीना सिंह से कई बार संपर्क साधा गया तो उन्होंने दो दिन लगातार ‘सॉरी आई कांट टॉक राइट नाऊ’ का मैसेज भेज कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
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सामान्य मरीज तो दूर एड्स के मरीजों के उपचार में भी लापरवाही
- सूरत-ए-हाल पीजीआईएमएस : प्रदेश का एकमात्र एआरटी सेंटर, वह भी रामभरोसे
संजय कुमार
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में आने वाले सामान्य मरीज तो दूर एड्स जैसे गंभीर रोगी भी रामभरोसे हैं। मेडिसिन विभाग के अधीनस्थ कार्य करने वाले एआरटी सेंटर में प्रदेश भर के मरीजों को उपचार के लिए आना होता है। यहां मरीजों की जांच करने के लिए सीडी-4 मशीन है, जो खराब पड़ी है। इसके चलते मरीजों का उपचार रुका हुआ है। जब मरीज सवाल पूछते हैं तो स्टाफ उनसे अभद्र व्यवहार ही करता है।
संस्थान में एआरटी सेंटर के बाहर मेडिसन विभाग ने नोटिस चस्पा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है कि सीडी-4 मशीन 19 अप्रैल से खराब पड़ी है। यदि कोई मरीज संस्थान में आता है तो पहले 01262-280276 पर संपर्क करके ही आए, इससे उसे परेशानी नहीं झेलनी पडे़गी। मरीजों की मानें तो एचआईवी पॉजिटिव मरीज पाए जाने पर यह जांच होती है। इसमें कुंभ, मेरीलीन, ट्राइडोट जांच होती है। सीडी-4 जांच में डॉक्टर मरीज के अंदर रोगों से लड़ने की क्षमता के सेल काउंट कर उपचार शुरू करते हैं। इसके बाद ही मरीज को आधार लिंक वाले एआरटी सेंटर भेजा जाता है। छह माह पीजीआईएमएस के मुख्य एआरटी सेंटर में उपचार के बाद ही मरीज को उसके करीबी लिंक एआरटी सेंटर में भेजा जाता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि रोगियों में यह जांच जरूरी है, क्योंकि यही बताती है कि शरीर में बीमारी कितनी हावी है। गौरतलब है कि एआरटी सेंटर में प्रतिदिन 40 के करीब मरीज उपचार के लिए आते हैं।
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यहां पर भी है स्टाफ की कमी
एचआईवी के रोगियों के लिए डब्ल्यूएचओ, सरकार भले ही हर वर्ष लाखों करोड़ों का बजट जारी करती हो, लेकिन प्रदेश में दयनीय स्थिति है। पीजीआईएमएस के मुख्य एआरटी सेंटर में मशीन खराब होने के साथ स्टाफ की भी किल्लत है। मरीज बताते हैं कि उन्हें पर्याप्त संख्या में न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही यहां काउंसलर है। यदि कोई इसका कारण पूछे तो यहां अभद्रता से ही सभी पेश आते हैं। ऐसे में वह किससे कहें, अपनी समस्या सार्वजनिक करने में भी वह हिचक महसूस करते हैं। महिला मरीजों ने बताया कि दूर-दराज से आने के बाद जब उन्हें न में जवाब मिलता है तो वह कहां जाएं।
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अधिकारियों का पक्ष
इस मामले में एसटीआई इंचार्ज चंडीगढ़ डॉ. अंजलि अरोड़ा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें एक दिन पूर्व ही मशीन के खराब होने की जानकारी मिली है। जल्द ही यह मशीन सही करा दी जाएगी। लोकल प्रशासन को इस संबंध में बोल दिया जाएगा। वहीं इस मामले में प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. वीना सिंह से कई बार संपर्क साधा गया तो उन्होंने दो दिन लगातार ‘सॉरी आई कांट टॉक राइट नाऊ’ का मैसेज भेज कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।