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एक साल की बच्ची से लेकर 80 साल की महिला भी सुरक्षित नहीं : स्वाती मालीवाल
Updated Tue, 08 Aug 2017 02:00 AM IST
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एक साल की बच्ची से लेकर 80 साल की महिला भी सुरक्षित नहीं : स्वाती मालीवाल
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने दिल्ली को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित माना है। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में एक साल की बच्ची से लेकर 80 साल तक की महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। इसके लिए आवाज उठाने वाले आयोग की पहले इतनी दयनीय स्थिति थी कि यह किटी पार्टी का अड्डा बन कर रह गया था।
इस समस्या से तभी निजात मिल सकती है, जब स्पेशल टीम का गठन किया जाए। इसमें एलजी, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली के सीएम, देश के गृहमंत्री के साथ दिल्ली महिला आयोग को शामिल किया जाए। सोमवार को मीडिया क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वाती मालीवाल ने कहा कि उनके आयोग में आने से पहले कार्यालय में न तो कंप्यूटर चलते थे और न ही इंटरनेट। महिलाओं की लंबी कतार लगती थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती थी। जबकि उनके आने के बाद पिछले एक साल में 12 हजार केस पर कार्रवाई की। इसके साथ ही सवा तीन लाख काल सुनी। 5500 कोर्ट विकटिम को सहायता दी गई और 1869 काउंसिलिंग सेशन किया गया। इसके अलावा सरकार को 55 रिक्मेंडेशन दी गईं और 7500 स्थानों की विजिट की। वहीं स्वाती ने कहा कि पिछले आठ साल में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने एक केस पर काम किया। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि वह अपने कार्य में डरती नहीं हैं। पुलिस कमिश्नर तक से उनकी महिला सुरक्षा पर बहस हुई। प्रतिदिन 500 महिलाओं की शिकायत और दो हजार काल आयोग में आ रही हैं। वहीं उन्होंने पूर्व एलजी पर आरोप जड़ते हुए कहा कि नजीब जंग ने उनको बहुत परेशान किया, दिल्ली में महिला तो क्या महिला आयोग की महिलाएं भी सुरक्षित नहीं थी। जब उन्होंने विरोध किया तो उनके ऊपर दो एफआईआर और झूठे केस महज दबाव डालने के लिए बनवाए गए। एलजी ने हद कर रखी थी, उन्होंने एक भी मीटिंग नहीं की, जबकि दिल्ली पुलिस के प्रशासक थे। इसके लिए उनको हाइकोर्ट जाना पड़ा, तब बैठक हुई। इसके बाद एक स्पशेल टास्क फोर्स गठित हुई और अब नियमित बैठक हो रही है। हां, अब नये एलजी काम कर रहे हैं।
पीजीआई के मामले में हरियाणा महिला आयोग आए आगे
पीजीआई के यूएमसी कांड में यौन उत्पीड़न मामले पर स्वाती मालीवाल ने कहा कि हरियाणा महिला आयोग को उसके साथ खड़ा होना चाहिए। दिल्ली में छात्रा ने शिकायत भेजी थी, जिस पर आयोग की सदस्य रोहतक आई और अधिकारियों से बातचीत की। लेकिन अब तक कोई न कार्रवाई होना और न ही जवाब भेजा जाना पीजीआईएमएस प्रशासन को सवालों में घेरता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने दिल्ली को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित माना है। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में एक साल की बच्ची से लेकर 80 साल तक की महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। इसके लिए आवाज उठाने वाले आयोग की पहले इतनी दयनीय स्थिति थी कि यह किटी पार्टी का अड्डा बन कर रह गया था।
इस समस्या से तभी निजात मिल सकती है, जब स्पेशल टीम का गठन किया जाए। इसमें एलजी, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली के सीएम, देश के गृहमंत्री के साथ दिल्ली महिला आयोग को शामिल किया जाए। सोमवार को मीडिया क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वाती मालीवाल ने कहा कि उनके आयोग में आने से पहले कार्यालय में न तो कंप्यूटर चलते थे और न ही इंटरनेट। महिलाओं की लंबी कतार लगती थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती थी। जबकि उनके आने के बाद पिछले एक साल में 12 हजार केस पर कार्रवाई की। इसके साथ ही सवा तीन लाख काल सुनी। 5500 कोर्ट विकटिम को सहायता दी गई और 1869 काउंसिलिंग सेशन किया गया। इसके अलावा सरकार को 55 रिक्मेंडेशन दी गईं और 7500 स्थानों की विजिट की। वहीं स्वाती ने कहा कि पिछले आठ साल में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने एक केस पर काम किया। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि वह अपने कार्य में डरती नहीं हैं। पुलिस कमिश्नर तक से उनकी महिला सुरक्षा पर बहस हुई। प्रतिदिन 500 महिलाओं की शिकायत और दो हजार काल आयोग में आ रही हैं। वहीं उन्होंने पूर्व एलजी पर आरोप जड़ते हुए कहा कि नजीब जंग ने उनको बहुत परेशान किया, दिल्ली में महिला तो क्या महिला आयोग की महिलाएं भी सुरक्षित नहीं थी। जब उन्होंने विरोध किया तो उनके ऊपर दो एफआईआर और झूठे केस महज दबाव डालने के लिए बनवाए गए। एलजी ने हद कर रखी थी, उन्होंने एक भी मीटिंग नहीं की, जबकि दिल्ली पुलिस के प्रशासक थे। इसके लिए उनको हाइकोर्ट जाना पड़ा, तब बैठक हुई। इसके बाद एक स्पशेल टास्क फोर्स गठित हुई और अब नियमित बैठक हो रही है। हां, अब नये एलजी काम कर रहे हैं।
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पीजीआई के मामले में हरियाणा महिला आयोग आए आगे
पीजीआई के यूएमसी कांड में यौन उत्पीड़न मामले पर स्वाती मालीवाल ने कहा कि हरियाणा महिला आयोग को उसके साथ खड़ा होना चाहिए। दिल्ली में छात्रा ने शिकायत भेजी थी, जिस पर आयोग की सदस्य रोहतक आई और अधिकारियों से बातचीत की। लेकिन अब तक कोई न कार्रवाई होना और न ही जवाब भेजा जाना पीजीआईएमएस प्रशासन को सवालों में घेरता है।
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