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10 मिनट मोबाइल देखने से बढ़ता है आंखों का दो एमएम प्रेशर

Tue, 13 Oct 2020 01:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2020 01:09 AM IST
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10 minutes of mobile viewing increases two mm of eye pressure
अधिक समय मोबाइल का प्रयोग करने वाले अलर्ट हो जाएं, क्योंकि 10 मिनट मोबाइल में देखने से आपकी आंखों का प्रेशर दो एमएम बढ़ जाता है और आंखों को नुकसान पहुंचता है। यह रिसर्च की है पीजीआईएमएस की पीजी डॉ. हिमांशी चांदना ने। डॉ. हिमांशी ने अपनी रिसर्च को सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी के फिजियोलॉजी विभाग की ओर से पांच से सात अक्टूबर तक अपनी छठी वार्षिक एवं प्रथम वर्चुअल इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन बेसिक एंड अप्लाइड फिजियोलॉजी कॉन्फ्रेंस एनवायरमेंटल फिजियोलॉजी की कांफ्रेंस में रखा था। इसमें विषय इफेक्ट ऑफ मोबाइल फोन ऑन इंट्राऑकुलर प्रेशर विषय था। उनकी रिसर्च को प्रथम पुरस्कार मिला है।
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डॉ. हिमांशी ने बताया कि उनके सुपरवाइजर फिजियोलॉजी विभाग की डॉ. किरण व को सुपरवाइजर नेत्र विभाग के डॉक्टर जेपी चुघ थे। उन्होंने इसमें 40 स्वस्थ लोगों पर रिसर्च की थी, जिसमें 30 पुरुष व 10 महिलाएं शामिल थीं। सबसे पहले सभी की आंखों का प्रेशर चेक किया जो बिल्कुल सामान्य था, इसके बाद सभी को 10 मिनट तक मोबाइल पर संदेश पढ़ाया गया। 10 मिनट के बाद जब दोबारा सभी के आंखों के प्रेशर की जांच की गई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए, इसमें पाया गया कि आंखों का प्रेशर 10 मिनट मोबाइल देखने पर ही 2 एमएम तक बढ़ जाता है। डॉक्टर हिमांशी चांदना ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि हमें केवल जरूरत के समय ही मोबाइल का प्रयोग करना चाहिए। गौरतलब है कि डॉ. हिमांशी फिजियोलॉजी विभाग की दूसरे वर्ष की पीजी छात्रा डॉक्टर हैं।
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डॉ. त्रिशला सूद को तृतीय ओरल पेपर अवॉर्ड
फिजियोलॉजी विभाग की पीजी छात्रा डॉक्टर त्रिशला सूद ने वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में अपने पेपर प्रस्तुत किए थे। इसमें उन्होंने अपने विभाग की चिकित्सक डॉक्टर ज्योति यादव के दिशा निर्देशन में नासल मु्कोसिलिअरी क्लीयरेंस इन नॉर्मल यंग हेल्थी एडल्ट विषय पर पेपर प्रस्तुत किया था। इस पेपर में उन्होंने करीब 60 स्वस्थ लोगों पर अपनी की गई रिसर्च प्रस्तुत की थी, इसमें 18-24 वर्षीय 30 पुरुष और 30 महिलाएं शामिल रहे। डॉ सूद ने बताया कि उन्होंने अपने इस रिसर्च में पाया कि नासल मुकोसिलिअरी क्लीयरेंस की नॉरमल वैल्यू कितनी है। उन्होंने अपने सैक्रीन मेथड पर की गई रिसर्च में पाया कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की नासल मु्कोसिलिअरी क्लीयरेंस टाइम कम है। उनका पेपर कॉन्फ्रेंस में काफी सराहा गया और उन्हें तृतीय पुरस्कार से नवाजा गया। दोनों पीजी डॉक्टरों को कुलपति डॉ. ओपी कालरा, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव, विभागाध्यक्ष डॉक्टर ज्योति यादव ने उनकी उपलब्धि पर बधाई दी है।
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