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जमीन के गोरखधंधे में नेताओं का काला धनः खेमका रिपोर्ट

Mon, 12 Aug 2013 10:46 AM IST
चंडीगढ़/डॉ. सुरेंद्र धीमान
चंडीगढ़/डॉ. सुरेंद्र धीमान Updated Mon, 12 Aug 2013 10:46 AM IST
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robert vadra dlf land deal ashok khemka report

गुड़गांव में वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील के मामले में चर्चा में आए वरिष्ठ आईएएएस डॉ. अशोक खेमका ने मुख्य सचिव को भेजी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि नेताओं और नौकरशाहों ने फरीदाबाद, गुड़गांव और यमुनानगर जिलों में पंचायती जमीन की जमकर लूट की।

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खेमका ने लिखा है कि उन्होंने पिछले साल इन घोटालों की जांच कराने की सिफारिश की थी, लेकिन आज तक सरकार ने जांच नहीं कराई।

खेमका ने रिपोर्ट में जिक्र किया है कि गुड़गांव, फरीदाबाद जिलों में कुछ जनसेवकों और उनके रिश्तेदारों ने कालाधन कई कंपनियों में लगा रखा है। इन कंपनियों ने चकबंदी स्कीम का नाजायज फायदा उठाकर गांवों की महंगी जमीन का तबादला करवा रखा है।
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गांव कोट, आनंगपुर, बंधवारी, रोजगा गुजर में कंपनियों के माध्यम से जो निवेश किया गया है उसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि वास्तविक मालिकों का पता चल सके।
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इन कंपनियों ने कालाधन का निवेश कर रखा है। खेमका ने कहा कि फरीदाबाद और गुड़गांव जिलों में चकबंदी स्कीम का कारोबारी-नेता-नौकरशाह गठजोड़ ने किस तरह दुरुपयोग किया, इसका उदाहरण सोहना तहसील के रोजका गुजर, मानेसर तहसील का बाड़ गुजर और बल्लभगढ़ तहसील का कोट गांव है।

आनंगपुर (फरीदाबाद), कोट और रोजका गुजर गांवों में पहाड़ी जमीन चकबंदी प्रक्रिया के दौरान बांट दी। सड़क से लगती महंगी जमीन का तबादला कर दिया।

खेमका ने उन गांवों की जमीनों का विस्तृत ब्योरा भी दिया है, जिसे नेताओं-नौकरशाहों-पुलिस अफसरों के गठजोड़ ने खरीद ली। खेमका ने रिपोर्ट में यमुनानगर जिले के कलेसर और मलिकपुर बांगड़ की जमीनों का भी उल्लेख किया है, जिसे वीवीआईपी ने खरीद ली।

न्यायिक जांच हो: खेमका
खेमका ने दोबारा मांग की है कि है कि वर्ष 2005 और 2006 जितनी भी पंचायती जमीन का इंतकाल लोगों के नाम किया गया है उसकी सूची तैयार की जाए। इस घपले की न्यायिक जांच कराई जाए।

'वाड्रा-डीएलएफ डील सही'
डॉ. अशोक खेमका के आरोपों को वाड्रा-डीएलएफ को कॉमर्शियल लाइसेंस जारी करने वाले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के प्रवक्ता ने बेबुनियाद बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। प्रवक्ता ने साफ किया कि डील पूरी तरह सही है, क्योंकि इस मामले में जांच के लिए गठित कमेटी ने सभी आरोपों को गलत बताया है।


खेमका ने जितने भी गांवों की पंचायती जमीन की लूट की जांच की मांग की थी, उससे संबंधित एक भी फाइल मेरे पास आज तक नहीं आई। हो सकता है कि खेमका ने अपनी सिफारिशें अफसरों के पास भेजी हों।-महेंद्र प्रताप सिंह, राजस्व मंत्री, हरियाणा

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