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विश्व पृथ्वी दिवस : रेवाड़ी में 10 प्रतिशत ही वन क्षेत्र, वन नीति में लक्ष्य 33 प्रतिशत का

Tue, 21 Apr 2026 11:19 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2026 11:19 PM IST
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World Earth Day: Rewari has only 10 percent forest area, while the forest policy targets 33 percen
रेवाड़ी। जिले में सिर्फ 10 प्रतिशत वन क्षेत्र ही है जबकि भारतीय वन नीति 1988 व हरियाणा सरकार वन नीति 2006 के अनुसार भू-भाग के 33 प्रतिशत पर वन होना चाहिए। आकड़ों के अनुसार जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्र 1594 वर्ग किलोमीटर में 3.96% वन आवरण क्षेत्र है।
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इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट की रिपोर्ट के अनुसार एक दशक के दौरान करीब दस वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र बढ़ा है। अब यह बढ़कर 63 वर्ग किलोमीटर हो गया। झाबुआ, नाहड़ फॉरेस्ट के साथ ही अरावली क्षेत्र से जिले में वन क्षेत्र को बढ़ावा मिल रहा है।
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निकट भविष्य में अरावली की सुरक्षा मजबूत होने से वन क्षेत्र को फायदा मिला है। हालांकि वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार वन विभाग की तरफ से पौधरोपण अभियान भी चलाया जा रहा है। हरियाणा सरकार ने वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए राज्य वन नीति 2006 घोषित की थी लेकिन लक्ष्य अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।
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इन प्रजातियों के वृक्षों को बचाना जरूरी
राष्ट्रीय पर्यावरण प्रकृति संरक्षण एवं संवर्धन संस्था के संयोजक कमल सिंह यादव ने बताया कि कृषि वानिकी सेवा के तहत किए गए पौधरोपण को बचाना व बढ़ाना जरूरी है। पानी के अभाव में सफेदा पॉपुलर, मालाबार नीम, बैकेन, शहतूत के पेड़ कामयाब नहीं हो पाते हैं।
जो पेड़ यहां के वातावरण के अनुरूप हैं वह दीर्घायु के पेड़ हैं जिन्हें विकसित होने में कम से कम 30-40 वर्ष का समय लग जाता है। इनमें खेजड़ी, जाल, रोहेड़ा, फ्रांस, लेहसुआ, धोंक, रोझ, खैरी, बेरी इन्दरजौ इत्यादि शामिल हैं।
इन प्रजातियों के वृक्षों को बचाना बहुत जरूरी है। रेवाड़ी, महेन्द्रगढ़, दादरी, भिवानी, कुछ भाग झज्जर व गुरुग्राम जिलों में लगभग 5-6 लाख स्थानीय प्रजातियों के वृक्ष हैं।


पौधों की बजाय बड़े व फलदार पाैधों काे ही रोपित करें: कमल


कमल सिंह यादव ने बताया कि वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कृषि वानिकी पर जोर देना आवश्यक है। वन विभाग को चाहिए कि वह अन्य पौधों की बजाय बड़े व फलदार पाैधों काे ही रोपित करे।
उनके अनुसार जनसंख्या के अनुपात में बड़े व फलदार पेड़ों की जरूरत है। आज तापमान व प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण तालाबों के साथ साथ बड़े पेड़ों में कमी होती जा रही है। आज शहर के सभी तालाब खत्म हो गए हैं।

प्रदूषण व तापमान में कमी लाने में मुख्य बड़, पीपल, जाल, कैंदू व फलदार पेड़ होते हैं लेकिन शहर में ही नहीं गांवों में भी इनकी काफी कमी है। इधर गर्मियों में तापमान तो 50 डिग्री सेल्सियस व प्रदूषण का स्तर 450 के करीब पहुंच जाता है।
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