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Rewari News: जीआई और पोस्ट-जीआई पहल पर कार्यशाला कराई
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रेवाड़ी। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की टेक्सटाइल्स कमेटी ने नाबार्ड के सहयोग से वीरवार को शहर के आईओसी चौक के पास जीआई (भौगोलिक संकेत) और पोस्ट-जीआई पहल विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। कार्यक्रम का आयोजन टेक्सटाइल्स कमेटी के निदेशक डॉ. तपन कुमार राउत के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य कपड़ा और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को जीआई के लाभों और पोस्ट-जीआई पहलों की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना था ताकि अधिकृत उत्पादकों को बेहतर आय और रोजगार के अवसर मिल सकें। जानकारी के अनुसार, देश में अब तक 697 उत्पाद जीआई के तहत पंजीकृत हो चुके हैं जिनमें 366 उत्पाद कपड़ा और हस्तशिल्प श्रेणी के हैं।
टेक्सटाइल्स कमेटी रेवाड़ी की और से कच्ची जूती के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। शोध अधिकारी राजीव कुमार ने जीआई अधिनियम, आवेदन प्रक्रिया, पंजीकरण के लाभ और बाजार उपलब्धता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने हस्तशिल्प कारीगरों को जीआई के महत्व और उसके आर्थिक लाभों के बारे में भी बताया।
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नाबार्ड के एजीएम जगदीश परिहार ने कहा कि नाबार्ड कई उत्पादों के जीआई पंजीकरण में टेक्सटाइल्स कमेटी के साथ काम कर रहा है। उन्होंने जीआई को कारीगरों के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण साधन बताया। डैडम रेवाड़ी के अधिकारी राधेश्याम ने हरियाणा के विशिष्ट हस्तशिल्प उत्पादों को जीआई पंजीकरण से जोड़ने पर जोर दिया।
तकनीकी सत्र में जीआई आवेदन, मार्केटिंग टूल्स और पोस्ट-जीआई लाभों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यशाला में हस्तशिल्प से जुड़े करीब 70 कारीगर शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में द लॉर्ड कृष्णा एजुकेशनल फाउंडेशन के रति राम ने प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।
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कार्यशाला का उद्देश्य कपड़ा और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को जीआई के लाभों और पोस्ट-जीआई पहलों की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना था ताकि अधिकृत उत्पादकों को बेहतर आय और रोजगार के अवसर मिल सकें। जानकारी के अनुसार, देश में अब तक 697 उत्पाद जीआई के तहत पंजीकृत हो चुके हैं जिनमें 366 उत्पाद कपड़ा और हस्तशिल्प श्रेणी के हैं।
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टेक्सटाइल्स कमेटी रेवाड़ी की और से कच्ची जूती के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। शोध अधिकारी राजीव कुमार ने जीआई अधिनियम, आवेदन प्रक्रिया, पंजीकरण के लाभ और बाजार उपलब्धता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने हस्तशिल्प कारीगरों को जीआई के महत्व और उसके आर्थिक लाभों के बारे में भी बताया।
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नाबार्ड के एजीएम जगदीश परिहार ने कहा कि नाबार्ड कई उत्पादों के जीआई पंजीकरण में टेक्सटाइल्स कमेटी के साथ काम कर रहा है। उन्होंने जीआई को कारीगरों के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण साधन बताया। डैडम रेवाड़ी के अधिकारी राधेश्याम ने हरियाणा के विशिष्ट हस्तशिल्प उत्पादों को जीआई पंजीकरण से जोड़ने पर जोर दिया।
तकनीकी सत्र में जीआई आवेदन, मार्केटिंग टूल्स और पोस्ट-जीआई लाभों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यशाला में हस्तशिल्प से जुड़े करीब 70 कारीगर शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में द लॉर्ड कृष्णा एजुकेशनल फाउंडेशन के रति राम ने प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।