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बिन दवा ‘व्यवस्था’ बीमार, महंगे उपचार के लिए मरीज लाचार
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नागरिक अस्पताल में दवाइयां लेते मरीज।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। जिला मुख्यालय पर स्थापित नागरिक अस्पताल मरीजों के लिए दवाइयाें का टोटा है। यहां खांसी, जुकाम, बुखार के लिए काम आने वाली सभी दवाइयां तक नहीं हैं। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो सेंटर स्टोर से ही अस्पताल में दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक नहीं भेजा जा रहा। इसके कारण मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
मंगलवार को जब टीम सुबह 11:32 बजे नागरिक अस्पताल पहुंची तो यहां के दवा काउंटर पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी। मरीज व उनके तीमारदार दवाई लेने के लिए खड़े थे। उन्हें काफी समय इंतजार करने के बाद पूरी दवाइयां नहीं मिल रहीं थीं। मरीजों के कार्ड पर जो दवाइयां लिखी गई थीं, वे सभी दवाई उन्हें नहीं मिल रही थी।
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में हर रोज करीब 1600 मरीज आते हैं। पहले अस्पताल में डॉक्टरों की काफी कमी थी, लेकिन पिछले दिनों नए डॉक्टरों की भर्ती के बाद रेवाड़ी को 15 से ज्यादा नए चिकित्सक मिले हैं। चिकित्सक की कमी तो कुछ हद तक पूरी हो गई, लेकिन अब दवाइयां का टोटा बरकरार है। हालात यह है कि मरीजों को बाहर से महंगे दामों वाली दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। जब नागरिक अस्पताल के दवा वितरण कर रहे कर्मचारियों से मरीजों को पूरी दवाई न देने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सेंटर स्टोर को हर माह दवाइयों के लिए डिमांड भेजी जाती है, लेकिन वहां से पूरी दवाइयां नहीं आ रही हैं।
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वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में दो गुना से भी ज्यादा इजाफा हुआ है। वायरल बुखार में हर दिन 7 हजार पैरासीटामॉल (पीसीएम) और 10 हजार सिट्राजीन की गोलियां की आवश्यकता हैं, लेकिन स्टॉक की बात करें तो नागरिक अस्पताल के फार्मा विभाग में फिलहाल इन दोनों ही गोली तक उपलब्ध नहीं हैं। चिकित्सक सबसे ज्यादा इन्हीं दोनों दवाइयों को लिखते हैं, लेकिन मरीज अस्पताल में दवाई उपलब्ध नहीं होने की वजह से बाहर खुले मेडिकल स्टोर पर खरीदने को मजबूर हैं।
डिक्लोफेनाक भी उपलब्ध नहीं
बीमारी के इस सीजन में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली डिक्लोफेनाक की गोली भी रेवाड़ी के सबसे बड़ी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। ये गोली बुखार, मांसपेशियों व सिर दर्द, मुंह के घाव, आंखों में दर्द आदि में प्रयोग होती है। इसके अलावा गैस, एसिडिटी में दी जानी वाली रूटीन बीमारी की गोलियां तक स्टॉक में नहीं होने से मरीजों को बीमारी के साथ-साथ सिस्टम से दो-चार होना पड़ रहा है।
मरीज बोले-मरीज परेशान हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
एलर्जी से पीड़ित होने पर सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए आई थी। डॉक्टर ने जांच करके दवाइयां तो लिख दी, परंतु यहां मुझे बीटामेथासून की क्रीम नहीं मिली। इसे बाहर से खरीदनी पड़ेगी। अस्पताल में दवाइयों का टोटा है। इससे मरीज परेशान हैं। विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
- निर्मला देवी।
पेट में परेशानी होने के कारण अस्पताल में इलाज के लिए आई थी। पूरी जांच करने के बाद डॉक्टर ने दवाइयां लिखी हैं। कुछ दवाईं तो अस्पताल से मिल गई, लेकिन कई दवाई बाहर से लेनी पड़ेगी। काउंटर पर इसकी शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। अस्पताल की स्थिति बदहाल हो चुकी है। विभाग को इस पर ध्यान देना चाहिए।
- सुलेखा।
--------
वर्जन
अस्पताल प्रबंधन को स्थानीय स्तर पर आवश्यक दवाइयों के खरीद के निर्देश दे दिए गए हैं। ताकि मरीजों को राहत मिल सके। किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
- डॉ. सुदर्शन पंवार, सिविल सर्जन, रेवाड़ी।
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मंगलवार को जब टीम सुबह 11:32 बजे नागरिक अस्पताल पहुंची तो यहां के दवा काउंटर पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी। मरीज व उनके तीमारदार दवाई लेने के लिए खड़े थे। उन्हें काफी समय इंतजार करने के बाद पूरी दवाइयां नहीं मिल रहीं थीं। मरीजों के कार्ड पर जो दवाइयां लिखी गई थीं, वे सभी दवाई उन्हें नहीं मिल रही थी।
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नागरिक अस्पताल की ओपीडी में हर रोज करीब 1600 मरीज आते हैं। पहले अस्पताल में डॉक्टरों की काफी कमी थी, लेकिन पिछले दिनों नए डॉक्टरों की भर्ती के बाद रेवाड़ी को 15 से ज्यादा नए चिकित्सक मिले हैं। चिकित्सक की कमी तो कुछ हद तक पूरी हो गई, लेकिन अब दवाइयां का टोटा बरकरार है। हालात यह है कि मरीजों को बाहर से महंगे दामों वाली दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। जब नागरिक अस्पताल के दवा वितरण कर रहे कर्मचारियों से मरीजों को पूरी दवाई न देने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सेंटर स्टोर को हर माह दवाइयों के लिए डिमांड भेजी जाती है, लेकिन वहां से पूरी दवाइयां नहीं आ रही हैं।
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वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में दो गुना से भी ज्यादा इजाफा हुआ है। वायरल बुखार में हर दिन 7 हजार पैरासीटामॉल (पीसीएम) और 10 हजार सिट्राजीन की गोलियां की आवश्यकता हैं, लेकिन स्टॉक की बात करें तो नागरिक अस्पताल के फार्मा विभाग में फिलहाल इन दोनों ही गोली तक उपलब्ध नहीं हैं। चिकित्सक सबसे ज्यादा इन्हीं दोनों दवाइयों को लिखते हैं, लेकिन मरीज अस्पताल में दवाई उपलब्ध नहीं होने की वजह से बाहर खुले मेडिकल स्टोर पर खरीदने को मजबूर हैं।
डिक्लोफेनाक भी उपलब्ध नहीं
बीमारी के इस सीजन में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली डिक्लोफेनाक की गोली भी रेवाड़ी के सबसे बड़ी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। ये गोली बुखार, मांसपेशियों व सिर दर्द, मुंह के घाव, आंखों में दर्द आदि में प्रयोग होती है। इसके अलावा गैस, एसिडिटी में दी जानी वाली रूटीन बीमारी की गोलियां तक स्टॉक में नहीं होने से मरीजों को बीमारी के साथ-साथ सिस्टम से दो-चार होना पड़ रहा है।
मरीज बोले-मरीज परेशान हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
एलर्जी से पीड़ित होने पर सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए आई थी। डॉक्टर ने जांच करके दवाइयां तो लिख दी, परंतु यहां मुझे बीटामेथासून की क्रीम नहीं मिली। इसे बाहर से खरीदनी पड़ेगी। अस्पताल में दवाइयों का टोटा है। इससे मरीज परेशान हैं। विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
- निर्मला देवी।
पेट में परेशानी होने के कारण अस्पताल में इलाज के लिए आई थी। पूरी जांच करने के बाद डॉक्टर ने दवाइयां लिखी हैं। कुछ दवाईं तो अस्पताल से मिल गई, लेकिन कई दवाई बाहर से लेनी पड़ेगी। काउंटर पर इसकी शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। अस्पताल की स्थिति बदहाल हो चुकी है। विभाग को इस पर ध्यान देना चाहिए।
- सुलेखा।
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वर्जन
अस्पताल प्रबंधन को स्थानीय स्तर पर आवश्यक दवाइयों के खरीद के निर्देश दे दिए गए हैं। ताकि मरीजों को राहत मिल सके। किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
- डॉ. सुदर्शन पंवार, सिविल सर्जन, रेवाड़ी।