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बिना निरीक्षकों के नगर परिषद, बेपटरी हैं शहर के हालात

Mon, 16 May 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
ब्यूरो /अमर उजाला Updated Mon, 16 May 2016 12:30 AM IST
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without inspector of muniscipal council,city Disorderly
सुविधाओं से लोग वंचित - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
गंदगी के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार होने के बावजूद रेवाड़ी प्रशासन एवं प्रदेश सरकार यहां के हालात सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है। प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए फौरी तौर पर कदम जरूर उठाए जाते हैं, लेकिन रिजल्ट सिफर ही रहता है। नगर परिषद में निरीक्षकों की भारी कमी के चलते शहर की व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं।
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आलम यह है कि नगर परिषद में मुख्य सफाई निरीक्षक, बिल्डिंग निरीक्षक एवं बिजली निरीक्षक के पद सालों से खाली पड़े हुए हैं। इन विभाग पर शहर में सफाई व्यवस्था के साथ अतिक्रमण, सुनियोजित घर निर्माण एवं शहर को रात के समय जगमग करना होता है। सरकारी व्यवस्थाओं का आलम यह है कि बीस साल में यहां की आबादी दोगुनी होकर डेढ़ लाख पहुंच गई,लेकिन सेंक्शन्ड पोस्ट का विस्तार तो दूर उनको पूरी तरह भरा भी नहीं गया। आलम यह रहता है कि इन सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ईओ, एमई एवं जेई को दी हुई हैं। जिसके चलते उनकी जनता से जुड़ी अन्य जिम्मेदारी भी प्रभावित होती है।
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महज एक क्लर्क के सहारे चल रही है सेनिटेशन ब्रांच
नप रेवाड़ी में एक ईओ के साथ एक एमई एवं चार जेई की पोस्ट सेंक्शंड हैं, लेकिन इनमें से भी एक जेई का तबादला होने से तीन जेई ही काम कर रहे हैं। इधर नप में सेनिटेशन ब्रांच चीफ सेनिट्री इंस्पेक्टर की पोस्ट खाली होने के कारण पूरे शहर की सफाई व्यवस्था का भार एक क्लर्क पर है। इसका परिणाम यह है कि रेवाड़ी शहर गंदगी की सूची में पहले नंबरों पर शुमार हो चुका है। इधर टैक्स ब्रांच में भी सुपिरिडेंट की पोस्ट खाली है। इधर शहर में अधिकतर रास्तों एवं गलियों की लाइट खराब पड़ी रहती हैं, क्योंकि इनकी मानीटरिंग करने वाले अधिकारी लाइट इंस्पेक्टर की पोस्ट भी सालों से खाली पड़ी हुई है।
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मॉनीटरिंग के अभाव में शहर में धड़ल्ले से हो रहा अवैध निर्माण
नप क्षेत्र के अंदर कोई भी निर्माण कार्य करने से पहले नप से नक्शे की आवश्यकता पड़ती है। नक्शे सहित भवन निर्माण इंस्पेक्शन की जिम्मेदारी बिल्डिंग इंस्पेक्टर की होती है,लेकिन बरसों से खाली पड़ी पोस्ट के कारण शहर में मनमाने तरीके से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। नप से अप्रूव्ड कॉलोनियों में बिना नक्शे बन रहे मकानों से एक ओर जहां नप को आर्थिक रूप से हानि हो रही है,वहीं शहर का स्वरूप भी बिगड़ता जा रहा है।

क्षेत्रफल बढ़ता गया व्यवस्थाएं सिकुड़ती गईं
रेवाड़ी नगर परिषद के 1985 में गठन होने के बाद से लेकर अब तक शहर में वार्ड की संख्या 31 तक पहुंच गई है। बीते ढ़ाई साल पहले हुए नप चुनाव के समय ही वार्डों संख्या 28 से बढ़कर 31 हो गई थी। गठन के समय शहर चार किमी. के सर्कुलर रोड के भीतर बसा हुआ था। जिसक क्षेत्रफल बढ़कर अब 24.93 स्कवायर किमी. ताक पहुंच गया है। 2011 की जनगणना के समय आबादी की बात करें तो यह लगभग डेढ़ लाख थी। लेकिन शहर सर्कुलर रोड से बाहर निकलकर चारों तरफ फैल चुका है,लेकिन कुछ नप से अप्रूव्ड कॉलोनियों के यह हालात हैं कि यहां पर सफाई, बिजली एवं अन्य सुविधाओं से लोग वंचित हैं।

सेक्टरों को नप को हेंडओवर करने से और बिगड़ेंगे हालात
शहर के सेक्टरों में बसी आबादी को बिजली, पानी एवं अन्य सुविधाओं की जिम्मेदारी हुडा विभाग की होती है। लेकिन शहर के बदहाल हो चुके सेक्टर भी हुडा एवं नप के बीच में फंसे हुए हैं। हुडा अधिकारियों का कहना है कि शहर के पुराने सेक्टर एक, तीन एवं चार को नप को हैंडओवर करने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन पहले से व्यवस्थाओं का संभालने में नाकाम नप में शहर के तीन सेक्टर और मिलने पर हालात क्या होंगे आसानी से समझा जा सकता है।

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वर्जन-
शहर की आबादी बढ़ने के साथ सेंक्शंड पोस्ट भी बढ़नी चाहिए थी, लेकिन कुछ पोस्ट खाली होने से काम जरूर प्रभावित हो रहा है, हालांकि हमारी कोशिश यही रहती है कि सफाई सही अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चलाया जाए।
-नरेंद्र सुहाग, एमई, नप
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