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गांवों में पेयजल किल्लत, हो रहा नए रिश्तों का अकाल

Thu, 14 Apr 2016 12:42 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
ब्यूरो /अमर उजाला Updated Thu, 14 Apr 2016 12:42 AM IST
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water problem in village: effect on relation
पानी किल्लत से गांव में नहीं हो रहे रिश्ते - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 आपने और हमने दहेज को लेकर कई बार रिश्तों को टूटते, बनते-बिखरते देखा होगा। अगर ये कहें कि कि कुछ ऐसे भी गांव हैं जहां पानी की किल्लत के पीछे रिश्तों का अकाल पड़ रहा है तो जरूर आप चौंक जाएंगे। ये बात जिले में बावल और खोल क्षेत्र के आसपास कई ऐसे गांव नांधा, बलवाड़ी, भांकली, माजरा, सुलखा और कालड़ावास समेत दर्जन भर के करीब गांवों के लिए बिल्कुल मुफीद बैठती है।
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स्थानीय सरपंचों का कहना है कि पानी की किल्लत का आलम यह है कि लोग इन गांवों में अपने घर की बेटी देने से भी कतरा रहे हैं। आजादी के समय से ही हुई पानी की किल्लत के चलते यहां कभी पानी से लबालब रहने वाले जीर्ण-क्षीण कुएं, सूखे जोहड़ स्थिति की भयावहता खुद ही बयां करती है।
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गांव में भी खरीद रहे दस-दस रुपये में पानी
पानी से लबालब भरे रहने वाले कुएं और तालाब सूख चुके हैं। आलम यह है कि कभी दूसरों के गले तर करने वाले ये जलस्रोत खुद अपनी ही प्यास भी नहीं बुझा सकते।  पानी की समस्या को लेकर कई बार सरकार व जिला प्रशासन के पास गुहार लगाई गई। लेकिन हालात जस के तस हैं। शहरों की तरह गांवों में भी 20 लीटर पीने के पानी के लिए 10 रुपये अदा करने पड़ते हैं, तब कहीं जाकर उनकी प्यास बुझती है।
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आजादी के समय से चल रही है पानी की किल्लत
ऐसा नहीं है कि पानी की समस्या इन गांवों में हाल के कुछ समय से है। पिछले करीब 67 सालों यानी आजादी के समय से इन गांवों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में अधिकारियों और तत्कालीन सत्तारूढ़ नेता और मंत्रियों तक भी कई बार गुहार लगाई गई। योजनाएं भी बनीं, लेकिन अभी तक जमीन पर पानी नहीं आ सका है।

पानी में फ्लोराइड दे रहा संक्रमण का न्यौता
पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को काफी जद्दोजहद यहीं खत्म नहीं हो जाती। गांवों के जिन कुओं में थोड़ा बहुत पानी है उसके पीछे कारण उसका काफी ज्यादा खारा होना है। ऐसे में पानी में फ्लोराइड की मात्रा काफी होती है। जिससे संक्रमण, उल्टी, दस्त होने के साथ ही घुटनों संबंधी समस्याओं का भी खतरा बना रहता है।


बूस्टिंग स्टेशन के लिए 93 करोड़ रुपये का लोन हुआ पास
पिछली सरकारों के समय बावल क्षेत्र के कई गांव उपेक्षा का शिकार हुए हैं। लोगों की समस्या को देखते हुए 12 मुख्य गांवों समेत 42 गांवों में पीने के पानी की समस्या खत्म करने के लिए 40 एकड़ जमीन पर बूस्टिंग स्टेशन बनाने की योजना है। नाबार्ड से 93 करोड़ रुपये का लोन भी पास करा लिया गया है। टेंडर छोड़कर जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा।
डॉ. बनवारी लाल, विधायक, बावल विधान सभा, रेवाड़ी
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