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पेयजल संकट गहराया, 11 के बाद मचेगा हाहाकार
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sat, 09 Apr 2016 12:01 AM IST
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गहराते पेयजल संकट पर प्रशासन ने गंभीरता से अमल नहीं किया तो जिले में हाहाकार मच सकता है। पहले ही जिले को जरूरत के हिसाब से कम पानी मिल रहा है, ऐसे में झज्जर में मातनहेल नहर के टूटने से समस्या गहरा गई है। इस समय नहर से जिले को पेयजल की आपूर्ति होती है।
नहर टूटने से आपूर्ति रुकी हुई है। अधिकारियों के अनुसार अभी 7 से 10 दिन नहर की मरम्मत में लग सकते हैं, तब तक जिले को नहर से 16 दिन तक की जाने वाली पेयजल आपूर्ति की समयसीमा समाप्त हो जाएगी। ऐसी स्थिति में नहरी पानी के लिए जिले को 35 दिन का इंतजार करना पड़ेगा। विभाग पांच दिन में एकत्रित पानी की राशनिंग करेगा तो 11 अप्रैल तक ही इसकी आपूर्ति की जा सकती है।
शहर के लिए प्रतिदिन 180 लाख लीटर पानी की सप्लाई जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाती है। विभाग के पास पानी स्टोर करने के लिए केवल 780 लाख गैलन की क्षमता है। सप्लाई के लिए लगे चार ट्यूबवेल ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। सबसे बड़ी बात यह है कि शहर की डेढ़ लाख की आबादी ही नहीं बल्कि जिले की दस लाख की आबादी केवल नहरी पानी पर ही निर्भर है। इधर पानी की कमी को देखकर विभाग ने भी शनिवार से एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई करने की तैयारी कर ली है।
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जरूरत 800 की मिलता है 525 क्यूसेक पानी
जिले में सिंचाई के लिए तो दूर पीने के पानी की आपूर्ति भी रूटीन में भी पूरी नहीं हो रही है। अधिकारियों की मानें तो जिले में 800 क्यूसिक पानी की जरूरत है। जिले को जो पानी मिल रहा है वह महज 525 क्यूसेक है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर रिपोर्ट के अनुसार जिले की स्थिति अच्छी नहीं है। दक्षिण हरियाणा की बात करें तो रेवाड़ी का ग्राउंड वाटर लेवल 16.3 मीटर के साथ सबसे निचले स्तर पर है।
खारे पानी एवं फ्लोराइड की अधिकता के कारण उपयोग लायक नहीं है ग्राउंड वाटर
पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन एवीं नाइट्रेट सहित अन्य पदार्थ मिले होते हैं। इनकी अधिकतम एवं न्यूनतम मात्रा निर्धारित होती है। जिले का पानी खारा होने के कारण पीने लायक नहीं है। वहीं इसी के साथ अन्य पदार्थों की अधिकता होने के कारण पानी पीने लायक नहीं है। हालात तो यह है कि सप्लाई के लिए मिलने वाला पानी भी बिना प्यूरीफाई पीने लायक नहीं है। जिले के बालावास सहित अनेक ऐसे गांव भी हैं, जहां पर पीने के पानी की तो दूर की बात ग्राउंड वाटर सिंचाई लायक भी नहीं है।
केवल पांच दिन ही आया पानी
जिले में 29 मार्च को नहरी पानी आया था, लेकिन 3 मार्च को झज्जर जिले के मातनहेल में नहर टूटने के कारण पानी की सप्लाई बंद हो गई थी। यदि नहर नहीं टूटती तो पानी की सप्लाई 14 अप्रैल तक होनी थी। महज पांच दिन ही पानी आने के कारण कालका में बने पांच जल घरों में केवल 250 लाख गैलन पानी ही एकत्रित हो पाया। जन स्वास्थ्य विभाग ने पानी की आपूर्ति बाधित होते देख पहले तो मिनटों में राशनिंग की थी, लेकिन अब शनिवार से शहरवासियों को एक दिन छोड़कर एक दिन पानी की सप्लाई की जाएगी। वह भी केवल 11 अप्रैल तक। इसके बाद पानी खत्म हो जाएगा।
पानी की किल्लत को देख सक्रिय हुए टैंकर सप्लायर
गर्मी बढ़ते ही निजी पानी टैंकर पानी सप्लायर सक्रिय हो जाते है। लेकिन पहले से ही कम मिल रहे पानी के बाद नहरी पानी में कटौती देख सप्लायरों के टैंकर शहर में खूब दौड़ रहे हैं। हालांकि आपात स्थिति में जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से टैंकर से पानी सप्लाई की बात की जाती है, लेकिन वह केवल कागजों तक सीमित रहती है। स्थिति का फायदा उठाने के लिए निजी टैंकर सप्लायर एक टैंकर पानी 400-500 रुपये में बेचा जा रहा है।
बढने लगी समस्या
पानी की कमी के साथ लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। हाल यह है कि जहां पानी की सप्लाई कम हो रही है, वहां लोग पानी इधर-उधर से लाने लगे हैं या फिर धीरे-धीरे स्टोरेज करने लगे हैं, ताकि आगे पानी की समस्या से न जूझना पड़ा। हालांकि अभी समस्या शुरू हुई है लेकिन आगे यह और विकराल बन सकती है। ऐसे में लोगों को भी चाहिए कि वह पानी की कीमत समझते हुए इसे बचाएं। ताकि कुछ समस्या कम हो सके।
वर्जन
पहले ही जिले को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा था। नहर टूटने से स्थिति गंभीर हो गई है। नहर की मरम्मत करने का काम चल रहा है, जिसमें 7 से 10 दिन तक लग सकते हैं। अधिकारियों से जिन दिनों में पानी नहीं मिल रहा उन दिनों में पानी लेने की बात की जा रही है।
-एसके सिंगला, एसई, सिंचाई विभाग
वर्जन...
पानी के संकट को देखते हुए विभाग के पास केवल 11 अप्रैल तक का पानी बचा है। वह भी एक दिन छोड़कर एक दिन सप्लाई के लिए। कोशिश यही है कि शहर वासियों को पानी की दिक्कत न आए।
अशोक डागर, जेई, जन स्वास्थ्य विभाग
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नहर टूटने से आपूर्ति रुकी हुई है। अधिकारियों के अनुसार अभी 7 से 10 दिन नहर की मरम्मत में लग सकते हैं, तब तक जिले को नहर से 16 दिन तक की जाने वाली पेयजल आपूर्ति की समयसीमा समाप्त हो जाएगी। ऐसी स्थिति में नहरी पानी के लिए जिले को 35 दिन का इंतजार करना पड़ेगा। विभाग पांच दिन में एकत्रित पानी की राशनिंग करेगा तो 11 अप्रैल तक ही इसकी आपूर्ति की जा सकती है।
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शहर के लिए प्रतिदिन 180 लाख लीटर पानी की सप्लाई जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाती है। विभाग के पास पानी स्टोर करने के लिए केवल 780 लाख गैलन की क्षमता है। सप्लाई के लिए लगे चार ट्यूबवेल ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। सबसे बड़ी बात यह है कि शहर की डेढ़ लाख की आबादी ही नहीं बल्कि जिले की दस लाख की आबादी केवल नहरी पानी पर ही निर्भर है। इधर पानी की कमी को देखकर विभाग ने भी शनिवार से एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई करने की तैयारी कर ली है।
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जरूरत 800 की मिलता है 525 क्यूसेक पानी
जिले में सिंचाई के लिए तो दूर पीने के पानी की आपूर्ति भी रूटीन में भी पूरी नहीं हो रही है। अधिकारियों की मानें तो जिले में 800 क्यूसिक पानी की जरूरत है। जिले को जो पानी मिल रहा है वह महज 525 क्यूसेक है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर रिपोर्ट के अनुसार जिले की स्थिति अच्छी नहीं है। दक्षिण हरियाणा की बात करें तो रेवाड़ी का ग्राउंड वाटर लेवल 16.3 मीटर के साथ सबसे निचले स्तर पर है।
खारे पानी एवं फ्लोराइड की अधिकता के कारण उपयोग लायक नहीं है ग्राउंड वाटर
पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन एवीं नाइट्रेट सहित अन्य पदार्थ मिले होते हैं। इनकी अधिकतम एवं न्यूनतम मात्रा निर्धारित होती है। जिले का पानी खारा होने के कारण पीने लायक नहीं है। वहीं इसी के साथ अन्य पदार्थों की अधिकता होने के कारण पानी पीने लायक नहीं है। हालात तो यह है कि सप्लाई के लिए मिलने वाला पानी भी बिना प्यूरीफाई पीने लायक नहीं है। जिले के बालावास सहित अनेक ऐसे गांव भी हैं, जहां पर पीने के पानी की तो दूर की बात ग्राउंड वाटर सिंचाई लायक भी नहीं है।
केवल पांच दिन ही आया पानी
जिले में 29 मार्च को नहरी पानी आया था, लेकिन 3 मार्च को झज्जर जिले के मातनहेल में नहर टूटने के कारण पानी की सप्लाई बंद हो गई थी। यदि नहर नहीं टूटती तो पानी की सप्लाई 14 अप्रैल तक होनी थी। महज पांच दिन ही पानी आने के कारण कालका में बने पांच जल घरों में केवल 250 लाख गैलन पानी ही एकत्रित हो पाया। जन स्वास्थ्य विभाग ने पानी की आपूर्ति बाधित होते देख पहले तो मिनटों में राशनिंग की थी, लेकिन अब शनिवार से शहरवासियों को एक दिन छोड़कर एक दिन पानी की सप्लाई की जाएगी। वह भी केवल 11 अप्रैल तक। इसके बाद पानी खत्म हो जाएगा।
पानी की किल्लत को देख सक्रिय हुए टैंकर सप्लायर
गर्मी बढ़ते ही निजी पानी टैंकर पानी सप्लायर सक्रिय हो जाते है। लेकिन पहले से ही कम मिल रहे पानी के बाद नहरी पानी में कटौती देख सप्लायरों के टैंकर शहर में खूब दौड़ रहे हैं। हालांकि आपात स्थिति में जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से टैंकर से पानी सप्लाई की बात की जाती है, लेकिन वह केवल कागजों तक सीमित रहती है। स्थिति का फायदा उठाने के लिए निजी टैंकर सप्लायर एक टैंकर पानी 400-500 रुपये में बेचा जा रहा है।
बढने लगी समस्या
पानी की कमी के साथ लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। हाल यह है कि जहां पानी की सप्लाई कम हो रही है, वहां लोग पानी इधर-उधर से लाने लगे हैं या फिर धीरे-धीरे स्टोरेज करने लगे हैं, ताकि आगे पानी की समस्या से न जूझना पड़ा। हालांकि अभी समस्या शुरू हुई है लेकिन आगे यह और विकराल बन सकती है। ऐसे में लोगों को भी चाहिए कि वह पानी की कीमत समझते हुए इसे बचाएं। ताकि कुछ समस्या कम हो सके।
वर्जन
पहले ही जिले को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा था। नहर टूटने से स्थिति गंभीर हो गई है। नहर की मरम्मत करने का काम चल रहा है, जिसमें 7 से 10 दिन तक लग सकते हैं। अधिकारियों से जिन दिनों में पानी नहीं मिल रहा उन दिनों में पानी लेने की बात की जा रही है।
-एसके सिंगला, एसई, सिंचाई विभाग
वर्जन...
पानी के संकट को देखते हुए विभाग के पास केवल 11 अप्रैल तक का पानी बचा है। वह भी एक दिन छोड़कर एक दिन सप्लाई के लिए। कोशिश यही है कि शहर वासियों को पानी की दिक्कत न आए।
अशोक डागर, जेई, जन स्वास्थ्य विभाग