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Rewari News: सुवरदा के ग्रामीणों ने शहीद सिद्धार्थ को दी श्रद्धांजलि, कहा-अपनी जान देकर बचा लिया गांव

Tue, 15 Apr 2025 12:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 15 Apr 2025 12:10 AM IST
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Villagers of Suwarda paid tribute to martyr Siddhartha, said- he saved the village by sacrificing his life
फोटो: 14रेवाड़ी। गुजरात स्थित जामनगर के गांव सुवरदा में बलिदानी सिद्धार्थ यादव को श्रद्धांजल - फोटो : मृतक रंजीत
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। गुजरात के जामनगर के सुवरदा गांव के लोगों ने फ्लाइंग लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ को श्रद्धांजलि अर्पित की है। ग्रामीणों ने कहा कि फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ ने अपनी जान गवां कर गांव को बचा लिया। रेवाड़ी के भाखली गांव निवासी फ्लाइंग लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ दो अप्रैल की रात जगुआर क्रैश होने की घटना में शहीद हो गए थे।
सुवरदा के लोगों के पास सिद्धार्थ का फोटो नहीं था। गांव के लोग जामनगर स्थित एयरफोर्स स्टेशन गए और वहां से सिद्धार्थ का फोटो लिया और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर फ्लाइंग लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसमें बुजुर्गों, महिलाओं के साथ बच्चे भी मौजूद रहे। इस दौरान तिरंगे के साथ ग्रामीणों ने सिद्धार्थ को नमन किया। ग्रामीणों ने कहा कि वह सिद्धार्थ के बलिदान को भूल नहीं सकते हैं, क्योंकि उन्होंने गांव को बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। इसके लिए वे सदैव सिद्धार्थ यादव के आभारी रहेंगे।
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सिद्धार्थ जगुआर से सुरक्षित ढंग से निकल सकते थे। उन्होंने देखा कि नीचे जामनगर का गांव सुवरदा है। उन्होंने सोचा कि अगर वह जेट को छोड़कर बाहर निकल गए तो जगुआर गांव पर गिर जाएगा। जगुआर में 4,200 लीटर फ्यूल आता है। अगर हादसा गांव की घनी आबादी में होता तो भारी तबाही हो सकती थी। इस वजह से उन्होंने अपनी जान की चिंता छोड़कर गांव को बचाने की ठान ली।
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तकनीकी खराबी से हुआ था हादसा : सिद्धार्थ यादव 2 अप्रैल की रात जगुआर को लेकर निकले थे। उनके साथ को-पायलट मनोज कुमार भी थे। उड़ान के दौरान जगुआर में तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद इसे सही से लैंड करने की कोशिशें की गईं, लेकिन एक समय ऐसा आया जब पता चल गया कि विमान क्रैश होना निश्चित है। जामनगर एयर स्टेशन से करीब 12 किलोमीटर दूर सिद्धार्थ ने को-पायलट को इजेक्ट करा दिया। खुद कुर्बान हो गए।

सेना में परिवार की थी चौथी पीढ़ी

सिद्धार्थ यादव परिवार की चौथी पीढ़ी से थे, जो सेना में थे। उनके परदादा डालूराम ने ब्रिटिश शासन के अधीन आने वाली बंगाल इंजीनियर्स में काम किया था। दादा रघुवीर पैरामिलिट्री फोर्स में थे। इनके पिता सुशील यादव भी एयरफोर्स में रहे। सिद्धार्थ ने साल 2016 में पहली ही बार में एनडीए परीक्षा पास की थी। तब 12वीं कक्षा का परिणाम तो आ चुका था, लेकिन मार्कशीट नहीं आई थी। उसी समय उसकी जॉइनिंग आ गई थी। पिता एयरफोर्स में थे और सिद्धार्थ भी 8वीं क्लास तक एयरफोर्स स्कूल में पढ़े थे। वह हर रोज फ्लाइट उड़ते देखते थे तो उनके मन में भी था कि वह भी एक दिन जहाज उड़ाएंगे। उनका यह सपना साकार हुआ और वह फाइटर प्लेन के पायलट बने।


23 मार्च को हुई थी सगाई

सिद्धार्थ 20 मार्च को छुट्टी पर घर आए थे। 23 मार्च को उनकी सगाई हुई थी। इसके बाद 31 मार्च को ड्यूटी पर लौट गए थे। 2 अप्रैल को उनके बलिदान की खबर आई थी। परिवार ने शादी के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की थी। सिद्धार्थ का उनके पैतृक गांव भालखी में राजकीय सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था।
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