{"_id":"6620cd538a04126b2f0680d5","slug":"upsc-civil-service-result-father-sell-taxi-due-to-compulsion-son-got-success-in-upsc-on-basis-of-self-study-2024-04-18","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UPSC Result: मजबूरी में पिता को बेचनी पड़ी टैक्सी... सेल्फ स्टडी के दम पर बेटे ने यूपीएससी में पाई सफलता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UPSC Result: मजबूरी में पिता को बेचनी पड़ी टैक्सी... सेल्फ स्टडी के दम पर बेटे ने यूपीएससी में पाई सफलता
Thu, 18 Apr 2024 01:26 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, रेवाड़ी
अमर उजाला नेटवर्क, रेवाड़ी
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 18 Apr 2024 01:26 PM IST
सार
रेवाड़ी के शिवम ने यूपीएससी में 457वीं रैंक हासिल की है। शिवम को दूसरे प्रयास में सफलता मिली है। मजबूरी में पिता को टैक्सी बेचनी पड़ी थी। अब सेल्फ स्टडी के दम पर बेटे ने यूपीएससी में सफलता पाई है।
विज्ञापन
UPSC Result
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रेवाड़ी शहर के गुलाबी बाग में रहने वाले शिवम ने यूपीएससी में 457वीं रैंक प्राप्त कर सफलता प्राप्त की है। मूल रूप से गांव नांगल के रहने वाले शिवम ने दूसरे प्रयास में सफलता पाई है। वर्तमान में वह दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। जैसे ही परिवार को शिवम के रिजल्ट के बारे में पता चला इस दौरान खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
शिवम के पिता हरदयाल टैक्सी ड्राइवर हैं। 2 साल पहले उन्हें मजबूरी में अपनी टैक्सी बेचनी पड़ी थी, क्योंकि रेवाड़ी जिला एनसीआर में आता है, ऐसे में यहां 10 साल पुरानी गाड़ी नहीं चलती है। पिता हरदयाल की आजीविका का सहारा केवल टैक्सी ही थी। उसके बाद परिवार को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी।
पिता हरदयाल का कहना है कि भले ही वह दसवीं कक्षा तक भी नहीं पढे हैं लेकिन शिक्षा का महत्व उन्हें पता है। इसलिए बच्चों को हमेशा अच्छी शिक्षा दी। शिवम की मां कमलेश देवी स्नातकोत्तर तक पढ़ी हैं। मौजूदा समय में कमलेश घर पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का कार्य करती हैं।
विज्ञापन
कमलेश का कहना है कि बेटे की सफलता पर उन्हें बहुत खुशी है। परिवार में शुभम सबसे छोटा है शिवम की दो बड़ी बहनें हैं। एक बहन हरियाणा में सरकारी अध्यापक हैं और दूसरी केवीएस में लेक्चरार के रूप में कार्यरत हैं। कमलेश ने बकाया की बेटे ने परिवार और जिले का नाम रोशन करने का काम किया है।
विज्ञापन
शिवम के पिता हरदयाल टैक्सी ड्राइवर हैं। 2 साल पहले उन्हें मजबूरी में अपनी टैक्सी बेचनी पड़ी थी, क्योंकि रेवाड़ी जिला एनसीआर में आता है, ऐसे में यहां 10 साल पुरानी गाड़ी नहीं चलती है। पिता हरदयाल की आजीविका का सहारा केवल टैक्सी ही थी। उसके बाद परिवार को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी।
विज्ञापन
पिता हरदयाल का कहना है कि भले ही वह दसवीं कक्षा तक भी नहीं पढे हैं लेकिन शिक्षा का महत्व उन्हें पता है। इसलिए बच्चों को हमेशा अच्छी शिक्षा दी। शिवम की मां कमलेश देवी स्नातकोत्तर तक पढ़ी हैं। मौजूदा समय में कमलेश घर पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का कार्य करती हैं।
विज्ञापन
कमलेश का कहना है कि बेटे की सफलता पर उन्हें बहुत खुशी है। परिवार में शुभम सबसे छोटा है शिवम की दो बड़ी बहनें हैं। एक बहन हरियाणा में सरकारी अध्यापक हैं और दूसरी केवीएस में लेक्चरार के रूप में कार्यरत हैं। कमलेश ने बकाया की बेटे ने परिवार और जिले का नाम रोशन करने का काम किया है।
Trending Videos
सेल्फ स्टडी के दम पर पाई सफलता
सबसे खास बात यहा है कि शिवम ने यूपीएससी क्लियर करने के लिए किसी भी प्रकार की कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने दिल्ली में लाइब्रेरी ज्वाइन कर रखी थी, वहीं पर जाकर पढ़ाई करते थे। शिवम को पुस्तकें पढ़ने का शौक स्कूल टाइम से ही था। शिवम पढ़ाई में पहले से ही काफी अच्छे थे। शिवम की पढ़ाई नवोदय स्कूल नैचाना से हुई थी।
सबसे खास बात यहा है कि शिवम ने यूपीएससी क्लियर करने के लिए किसी भी प्रकार की कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने दिल्ली में लाइब्रेरी ज्वाइन कर रखी थी, वहीं पर जाकर पढ़ाई करते थे। शिवम को पुस्तकें पढ़ने का शौक स्कूल टाइम से ही था। शिवम पढ़ाई में पहले से ही काफी अच्छे थे। शिवम की पढ़ाई नवोदय स्कूल नैचाना से हुई थी।
12वीं में उन्होनें नॉन मेडिकल ली थी और जयपुर विज़न में टॉपर आए थे। 12वीं के बाद आईआईटी गुवाहाटी से बीटेक की। उसके बाद उन्हें पुणे की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई। वहां पर वह सिविल इंजीनियर के रूप में 2 साल तक कार्य करते रहे। मगर मन में हमेशा अधिकारी बनने का ही सपना था। उसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली पढ़ाई करने के लिए चले आए। दिल्ली में वह किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई करते थे।
शिवम बोले- इतनी रैंक में आईएएस तो नहीं बन पाऊंगा, मगर दिन-रात करूंगा मेहनत
शिवम का कहना है कि समय प्रबंधन, लगातार मेहनत कर वह 10 से 12 घंटे की पढ़ाई करते थे। दिन रात पढ़ाई करने में जुटे रहते थे। यूपीएससी पास करने का सपना उनके मन में तब आया, जब वह आईआईटी के लिए इंटरव्यू देने के लिए गए थे।
शिवम का कहना है कि समय प्रबंधन, लगातार मेहनत कर वह 10 से 12 घंटे की पढ़ाई करते थे। दिन रात पढ़ाई करने में जुटे रहते थे। यूपीएससी पास करने का सपना उनके मन में तब आया, जब वह आईआईटी के लिए इंटरव्यू देने के लिए गए थे।
शिवम ने बताया कि उनका सपना आईएएस बनना है। मौजूदा जो रैंक आई है, उससे वह आईएएस तो नहीं बन पाएंगे, मगर इतना जरूर है कि उन्हें एक सीढी जरूर मिल चुकी है। अब आईएएस बनने के लिए वह और मेहनत करेंगे।