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Rewari News: थैलेसीमिया से बचाव के लिए समय पर जांच और आनुवंशिक परामर्श जरूरी
Tue, 27 Oct 2026 11:55 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:55 PM IST
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कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विद्यार्थी व महाविद्यालय स्टाफ। स्रोत: महाविद्यालय
रेवाड़ी। किशनलाल पब्लिक कॉलेज में मंगलवार को यूथ रेड क्रॉस और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की ओर से रोटरी क्लब ऑफ रेवाड़ी सिटी के सहयोग से थैलेसीमिया जागरूकता एवं स्क्रीनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को इस आनुवंशिक रक्त विकार के लक्षण, बचाव और समय पर जांच के महत्व की जानकारी दी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र दहिया मुख्य अतिथि और इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की यूथ रेड क्रॉस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. समृद्धि विशिष्ट अतिथि रहीं।
हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रवास मिश्रा ने बताया कि थैलेसीमिया से प्रभावित मरीजों को गंभीर स्थिति में नियमित रक्त चढ़ाने और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।
इसके वाहक व्यक्तियों में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। यदि दोनों साथी संबंधित आनुवंशिक गुण के वाहक हों, तो प्रत्येक गर्भावस्था में बच्चे के गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका 25 प्रतिशत होती है। ऐसे में जांच और आनुवंशिक परामर्श महत्वपूर्ण हैं।
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कार्यक्रम के दौरान कॉलेज और एजिलस डायग्नोस्टिक्स के बीच एमओयू भी हुआ। इसके तहत मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी (एमएलटी) के विद्यार्थियों को प्रयोगशाला में प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटरी क्लब के डॉ. करतार सिंह यादव और प्राचार्या डॉ. कविता गुप्ता ने की। आयोजन में डॉ. गजेंद्र यादव पैथोलॉजी लैब सहित यूथ रेड क्रॉस और एनएसएस के सदस्यों ने सहयोग दिया। कॉलेज के प्रधान रिपुदमन गुप्ता सहित पदाधिकारियों ने आयोजन पर शुभकामनाएं दीं।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र दहिया मुख्य अतिथि और इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की यूथ रेड क्रॉस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. समृद्धि विशिष्ट अतिथि रहीं।
हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रवास मिश्रा ने बताया कि थैलेसीमिया से प्रभावित मरीजों को गंभीर स्थिति में नियमित रक्त चढ़ाने और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।
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इसके वाहक व्यक्तियों में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। यदि दोनों साथी संबंधित आनुवंशिक गुण के वाहक हों, तो प्रत्येक गर्भावस्था में बच्चे के गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका 25 प्रतिशत होती है। ऐसे में जांच और आनुवंशिक परामर्श महत्वपूर्ण हैं।
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कार्यक्रम के दौरान कॉलेज और एजिलस डायग्नोस्टिक्स के बीच एमओयू भी हुआ। इसके तहत मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी (एमएलटी) के विद्यार्थियों को प्रयोगशाला में प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटरी क्लब के डॉ. करतार सिंह यादव और प्राचार्या डॉ. कविता गुप्ता ने की। आयोजन में डॉ. गजेंद्र यादव पैथोलॉजी लैब सहित यूथ रेड क्रॉस और एनएसएस के सदस्यों ने सहयोग दिया। कॉलेज के प्रधान रिपुदमन गुप्ता सहित पदाधिकारियों ने आयोजन पर शुभकामनाएं दीं।