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बिना इलाज लौट जाते हैं हजारों मरीज
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
Updated Tue, 08 Dec 2015 12:32 AM IST
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मनोहर सरकार एक ओर बाबा रामदेव जैसी हस्ती को ब्रांड एंबेस्डर बनाकर राज्य में आयुर्वेद को प्रमोट करने का दावा करती है।
वहीं जिले में आयुष विभाग के पास पर्याप्त डॉक्टर, स्टाफ हैं और न ही साल भर से यहां आयुर्वेदिक दवाइयां ही मरीजों को मुहैया हो पा रही हैं।
यह आलम तब है जब जिले के साथ ही देश भर में आयुर्वेदिक तरीके से इलाज कराने वालों की संख्या में खासा इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य महकमा आयुर्वेदिक इलाज को लेकर अभी तक संजीदा नहीं हुआ है।
जिले में बने 10 सीएचसी और 19 ग्रामीण आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 70 प्रतिशत चिकित्सकों और स्टाफ कर्मचारियों के पद खाली हैं। ऐसे में महीने भर में हजारों लोग आयुर्वेदिक इलाज न हो पाने की स्थिति में खाली हाथ ही वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
साल भर से दवा नहीं, बैरंग लौट रहे मरीज
आयुर्वेदिक विभाग में इलाज की स्थिति इसी से स्पष्ट हो रही है कि पिछले एक साल से जिले में विभाग को आयुर्वेदिक दवाइयां ही नहीं मिली हैं।
ऐसे में जिले में बने 10 सीएचसी और 19 ग्रामीण आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीज कभी स्टाफ की कमी के चलते लौटते हैं, अगर डॉक्टर मिल भी जाता है तो दवाई कभी नहीं मिलती। कुछ समय से मरीजों का रुझान बढ़ने के चलते मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन दवाइयों न होने के चलते बैरंग वापस लौट जाते हैं। यह बात खुद विभागीय अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं।
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महानिदेशक दे चुके हैं बाहर की दवाइयां लिखने के आदेश
विभागीय सूत्र यह भी बताते हैं कि स्वास्थ्य महानिदेशक ने दवाइयों की ट्रेडिंग में आ रही दिक्कतों के चलते बाहर की दवा लिखने के आदेश पूर्व में दे दिए गए हैं। ऐसे में डॉक्टर्स और नामी कंपनियों की सांठगांठ के चलते मरीजों की जेब कटने का खतरा और भी बढ़ जाता है।
विभाग के पास नहीं है खुद का कार्यालय
आयुष विभाग को प्रमोट करने का दावा यहां और भी ज्यादा खोखला दिखाई देता है जब विभाग के आलाधिकारी का जिले में खुद का कार्यालय भी नहीं है। एक हॉस्टल की बिल्डिंग में किराए का भवन लेकर कार्यालय चलाया जा रहा है। बिना भवन, स्टाफ और दवाइयों के विभाग की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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विभाग में लंबे समय से दवाइयां नहीं आई हैं। पूर्व में उच्चाधिकारियों ने बाहर से दवाई लिखने के आदेश भी दिए हैं। वहीं स्टाफ की भी लंबे समय से कमी है। आलाधिकारियों को इस संदर्भ में लिखा है, उम्मीद है जल्द ही दवाई और स्टाफ मिले।
-बीएस बेनीवाल, जिला आयुर्वेद अधिकारी, रेवाड़ी
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वहीं जिले में आयुष विभाग के पास पर्याप्त डॉक्टर, स्टाफ हैं और न ही साल भर से यहां आयुर्वेदिक दवाइयां ही मरीजों को मुहैया हो पा रही हैं।
यह आलम तब है जब जिले के साथ ही देश भर में आयुर्वेदिक तरीके से इलाज कराने वालों की संख्या में खासा इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य महकमा आयुर्वेदिक इलाज को लेकर अभी तक संजीदा नहीं हुआ है।
जिले में बने 10 सीएचसी और 19 ग्रामीण आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 70 प्रतिशत चिकित्सकों और स्टाफ कर्मचारियों के पद खाली हैं। ऐसे में महीने भर में हजारों लोग आयुर्वेदिक इलाज न हो पाने की स्थिति में खाली हाथ ही वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
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साल भर से दवा नहीं, बैरंग लौट रहे मरीज
आयुर्वेदिक विभाग में इलाज की स्थिति इसी से स्पष्ट हो रही है कि पिछले एक साल से जिले में विभाग को आयुर्वेदिक दवाइयां ही नहीं मिली हैं।
ऐसे में जिले में बने 10 सीएचसी और 19 ग्रामीण आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीज कभी स्टाफ की कमी के चलते लौटते हैं, अगर डॉक्टर मिल भी जाता है तो दवाई कभी नहीं मिलती। कुछ समय से मरीजों का रुझान बढ़ने के चलते मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन दवाइयों न होने के चलते बैरंग वापस लौट जाते हैं। यह बात खुद विभागीय अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं।
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महानिदेशक दे चुके हैं बाहर की दवाइयां लिखने के आदेश
विभागीय सूत्र यह भी बताते हैं कि स्वास्थ्य महानिदेशक ने दवाइयों की ट्रेडिंग में आ रही दिक्कतों के चलते बाहर की दवा लिखने के आदेश पूर्व में दे दिए गए हैं। ऐसे में डॉक्टर्स और नामी कंपनियों की सांठगांठ के चलते मरीजों की जेब कटने का खतरा और भी बढ़ जाता है।
विभाग के पास नहीं है खुद का कार्यालय
आयुष विभाग को प्रमोट करने का दावा यहां और भी ज्यादा खोखला दिखाई देता है जब विभाग के आलाधिकारी का जिले में खुद का कार्यालय भी नहीं है। एक हॉस्टल की बिल्डिंग में किराए का भवन लेकर कार्यालय चलाया जा रहा है। बिना भवन, स्टाफ और दवाइयों के विभाग की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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विभाग में लंबे समय से दवाइयां नहीं आई हैं। पूर्व में उच्चाधिकारियों ने बाहर से दवाई लिखने के आदेश भी दिए हैं। वहीं स्टाफ की भी लंबे समय से कमी है। आलाधिकारियों को इस संदर्भ में लिखा है, उम्मीद है जल्द ही दवाई और स्टाफ मिले।
-बीएस बेनीवाल, जिला आयुर्वेद अधिकारी, रेवाड़ी