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Rewari News: गर्भवती के एएनसी पंजीकरण का लक्ष्य 90 प्रतिशत, हुए 68 फीसदी
Sat, 09 May 2026 12:25 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 09 May 2026 12:25 AM IST
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नागरिक अस्पताल रेवाड़ी
रेवाड़ी। गर्भवती का अल्ट्रासाउंड बिना आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) आईडी के नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती के एएनसी पंजीकरण का लक्ष्य 90 प्रतिशत निर्धारित किया है लेकिन वर्तमान में केवल 68 प्रतिशत पंजीकरण ही हो पाए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने इस अंतर को दूर करने के लिए सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों को हर गर्भवती महिला का आरसीएच 2.0 पोर्टल पर पंजीकरण करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह नियम केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर भी समान रूप से लागू होगा। अब हर गर्भवती महिला और मरीज का पंजीकरण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य किया गया है।
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इससे जच्चा-बच्चा की स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी। आभा आईडी बनने के बाद मरीजों को अपनी पुरानी पर्चियां, जांच रिपोर्ट और इलाज संबंधी दस्तावेज साथ लेकर घूमने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से आईडी में सुरक्षित रहेंगे। आरसीएच पोर्टल के पुराने वर्जन में केवल गर्भवती महिलाओं का सीमित डाटा दर्ज होता था, लेकिन नए वर्जन 2.0 में पूरे देश में एक ही आईडी के जरिए इलाज और रिकॉर्ड एक्सेस किया जा सकेगा।
14 अंकों की विशिष्ट पहचान
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जारी होने वाली आभा आईडी 14 अंकों की एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या है। इसके माध्यम से मरीज अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से स्टोर और शेयर कर सकते हैं। विभाग के अनुसार एएनएम और आशा वर्कर प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीकरण कर आरसीएच आईडी जारी कर रही हैं। इसी आधार पर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि हर विवाहिता की आभा आईडी बनाई जाएगी
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1 दिसंबर 2025 से लागू है व्यवस्था
सरकार ने 1 दिसंबर 2025 से स्वास्थ्य सेवाओं में आभा आईडी को अनिवार्य कर दिया था, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है। अब केवल गर्भवती महिलाओं ही नहीं, बल्कि अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले प्रत्येक मरीज के लिए भी आभा आईडी जरूरी की जा रही है।
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वर्जन
स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार अब सभी नागरिकों के लिए आभा आईडी बनवाना आवश्यक है। सभी गायनेकॉलोजिस्ट से अपील है कि जिन गर्भवती महिलाओं की अभी तक आभा आईडी नहीं बनी है, उनकी तुरंत आईडी बनवाई जाए। उन्होंने कहा कि बिना आभा आईडी के गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं किया जाएगा।- डॉ. विशाल राव, डिप्टी सिविल सर्जन
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स्वास्थ्य विभाग ने इस अंतर को दूर करने के लिए सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों को हर गर्भवती महिला का आरसीएच 2.0 पोर्टल पर पंजीकरण करने के निर्देश दिए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह नियम केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर भी समान रूप से लागू होगा। अब हर गर्भवती महिला और मरीज का पंजीकरण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य किया गया है।
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इससे जच्चा-बच्चा की स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी। आभा आईडी बनने के बाद मरीजों को अपनी पुरानी पर्चियां, जांच रिपोर्ट और इलाज संबंधी दस्तावेज साथ लेकर घूमने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से आईडी में सुरक्षित रहेंगे। आरसीएच पोर्टल के पुराने वर्जन में केवल गर्भवती महिलाओं का सीमित डाटा दर्ज होता था, लेकिन नए वर्जन 2.0 में पूरे देश में एक ही आईडी के जरिए इलाज और रिकॉर्ड एक्सेस किया जा सकेगा।
14 अंकों की विशिष्ट पहचान
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जारी होने वाली आभा आईडी 14 अंकों की एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या है। इसके माध्यम से मरीज अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से स्टोर और शेयर कर सकते हैं। विभाग के अनुसार एएनएम और आशा वर्कर प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीकरण कर आरसीएच आईडी जारी कर रही हैं। इसी आधार पर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि हर विवाहिता की आभा आईडी बनाई जाएगी
1 दिसंबर 2025 से लागू है व्यवस्था
सरकार ने 1 दिसंबर 2025 से स्वास्थ्य सेवाओं में आभा आईडी को अनिवार्य कर दिया था, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है। अब केवल गर्भवती महिलाओं ही नहीं, बल्कि अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले प्रत्येक मरीज के लिए भी आभा आईडी जरूरी की जा रही है।
वर्जन
स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार अब सभी नागरिकों के लिए आभा आईडी बनवाना आवश्यक है। सभी गायनेकॉलोजिस्ट से अपील है कि जिन गर्भवती महिलाओं की अभी तक आभा आईडी नहीं बनी है, उनकी तुरंत आईडी बनवाई जाए। उन्होंने कहा कि बिना आभा आईडी के गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं किया जाएगा।- डॉ. विशाल राव, डिप्टी सिविल सर्जन