{"_id":"635c23f527190051ad564ada","slug":"the-people-of-dhani-jarawat-settled-at-the-end-of-the-district-will-choose-the-government-of-the-village-for-the-first-time-rewari-news-rtk6619958199","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले के आखिरी गांव ढाणी जरावत के लोग पहली बार चुनेगें अपनी अलग पंचायत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले के आखिरी गांव ढाणी जरावत के लोग पहली बार चुनेगें अपनी अलग पंचायत
विज्ञापन
रेवाड़ी। महेंद्रगढ़ जिले की सीमा से सटे गांव ढाणी जरावत के करीब 855 मतदामा पहली बार अपनी नई ग्राम पंचायत का चुनाव कर गठन करेंगे। ऊंचा गांव से हटाकर करीब दो साल पहले अलग पंचायत बनाने की घोषण की गई थी। वर्तमान में यहां करीब 250 परिवारों के लोग निवास करते हैं। ग्राम पंचायत में आठ वार्ड हैं। जबकि सरपंच का पद सामान्य वर्ग के पुरुष के लिए आरक्षित है। ऐसे में पहली बार नई पंचायत की कमान सामान्य वर्ग के पुरुष के हाथ में होगी। चुनाव मैदान में अभी दो उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां राजपूत जाति के परिवार अधिक हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले ऊंचा गांव की पंचायत में रहने की वजह से कोई भी फायदा नहीं मिल पाता था, वहीं ऊंचा से गांव की दूरी करीब तीन किलोमीटर पड़ती थी। ऊंचा गांव अहीर बाहुल्य क्षेत्र होने से लगभग सरपंच इसी गांव का होता था। उनके गांव में पीने के पानी, गंदे पानी की निकासी व कच्ची गलियों की समस्या मुख्य हैं। गांव में आंगनबाड़ी को छोड़कर किसी भी प्रकार कोई भी सरकारी संस्थान और सुविधा नहीं है। ग्रामीणों का मानना है कि अलग पंचायत चुनने के बाद गांव के विकास कार्यों में तेजी आएगी। जो उम्मीदवार ईमानदारी से गांव का विकास कराएगा उसी को वोट देंगे। फिलहाल गांव में मुख्य रास्तों, चौपाल व गंदे पानी की निकासी की समस्या है।
ग्राम पंचायत ऊंचा से अलग होकर गांव के वोटर पहली बार अपनी अलग से पंच और सरपंच चुनेंगे। पहले गांव में किसी भी प्रकार कोई भी मूलभूत सुविधा नहीं मिलती थी। गांव की दूरी भी करीब तीन किलोमीटर पड़ती है। इसके अलावा जिले का आखिरी गांव होने से भी बहुत सारी परेशानी झेलने को मिलती हैं।-अजय कुमार
विज्ञापन
गांव में लंबे समय से मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं। इससे आमजन को काफी परेशानी उठानी पड़ रही थी। कच्ची गलियां और पीने के पानी की भी मुख्य समस्या बनी हुई है। अब अलग से ग्राम पंचायत होने पर विकास कार्य होने की उम्मीद है।-मुकेश सिंह
विकास के मामले में गांव अभी पिछड़ा हुआ है। नई पंचायत के गठन से विकास को गति मिलेगी। गांव में कूड़ेदान भी नहीं हैं। जगह-जगगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। नियमित सफाई नहीं होने और गंदगी का निस्तारण नहीं होने से बदबू उठती है।-अनिल सिंह
------------------
पहले ऊंचा पंचायत में होने से गांव के अधिकतर कार्य नहीं होते थे, अगर कोई विकास कार्य होता तो बजट के अभाव में अधूरा पड़ा रहता। गांव के मुख्य रास्ते भी खराब पड़े हुए हैं। गंदे पानी की निकासी का भी कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है।-धर्मपाल यादव
पहले ढाणी जरावत गांव ऊंचा पंचायत का ही हिस्सा था। अब करीब दो साल पहले अलग से पंचायत का गठन हो गया है। सरकार की ओर से ग्राम पंचायत को मिलने वाली ग्रांट में से ढाणी जरावत गांव में भी लगाई थी। ग्रामीणों की मांग पर लगभग सभी गलियों को इंटरलॉकिंग टाइल से बनवाया हुआ है। गांव में पीने की पानी की भी सुविधा कराई गई है। -प्रेम कुमार, निवर्तमान सरपंच
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है कि पहले ऊंचा गांव की पंचायत में रहने की वजह से कोई भी फायदा नहीं मिल पाता था, वहीं ऊंचा से गांव की दूरी करीब तीन किलोमीटर पड़ती थी। ऊंचा गांव अहीर बाहुल्य क्षेत्र होने से लगभग सरपंच इसी गांव का होता था। उनके गांव में पीने के पानी, गंदे पानी की निकासी व कच्ची गलियों की समस्या मुख्य हैं। गांव में आंगनबाड़ी को छोड़कर किसी भी प्रकार कोई भी सरकारी संस्थान और सुविधा नहीं है। ग्रामीणों का मानना है कि अलग पंचायत चुनने के बाद गांव के विकास कार्यों में तेजी आएगी। जो उम्मीदवार ईमानदारी से गांव का विकास कराएगा उसी को वोट देंगे। फिलहाल गांव में मुख्य रास्तों, चौपाल व गंदे पानी की निकासी की समस्या है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायत ऊंचा से अलग होकर गांव के वोटर पहली बार अपनी अलग से पंच और सरपंच चुनेंगे। पहले गांव में किसी भी प्रकार कोई भी मूलभूत सुविधा नहीं मिलती थी। गांव की दूरी भी करीब तीन किलोमीटर पड़ती है। इसके अलावा जिले का आखिरी गांव होने से भी बहुत सारी परेशानी झेलने को मिलती हैं।-अजय कुमार
विज्ञापन
गांव में लंबे समय से मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं। इससे आमजन को काफी परेशानी उठानी पड़ रही थी। कच्ची गलियां और पीने के पानी की भी मुख्य समस्या बनी हुई है। अब अलग से ग्राम पंचायत होने पर विकास कार्य होने की उम्मीद है।-मुकेश सिंह
विकास के मामले में गांव अभी पिछड़ा हुआ है। नई पंचायत के गठन से विकास को गति मिलेगी। गांव में कूड़ेदान भी नहीं हैं। जगह-जगगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। नियमित सफाई नहीं होने और गंदगी का निस्तारण नहीं होने से बदबू उठती है।-अनिल सिंह
------------------
पहले ऊंचा पंचायत में होने से गांव के अधिकतर कार्य नहीं होते थे, अगर कोई विकास कार्य होता तो बजट के अभाव में अधूरा पड़ा रहता। गांव के मुख्य रास्ते भी खराब पड़े हुए हैं। गंदे पानी की निकासी का भी कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है।-धर्मपाल यादव
पहले ढाणी जरावत गांव ऊंचा पंचायत का ही हिस्सा था। अब करीब दो साल पहले अलग से पंचायत का गठन हो गया है। सरकार की ओर से ग्राम पंचायत को मिलने वाली ग्रांट में से ढाणी जरावत गांव में भी लगाई थी। ग्रामीणों की मांग पर लगभग सभी गलियों को इंटरलॉकिंग टाइल से बनवाया हुआ है। गांव में पीने की पानी की भी सुविधा कराई गई है। -प्रेम कुमार, निवर्तमान सरपंच