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कोरोना की आशंकित तीसरी लहर और प्रतिबंध के बावजूद लग रहीं प्राइमरी की कक्षाएं

Tue, 24 Aug 2021 11:33 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 24 Aug 2021 11:33 PM IST
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The feared third wave of Corona and the primary classes are being held despite the ban
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय। - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। कोरोना की आशंकित तीसरी लहर को देखते हुए नर्सरी से लेकर पांचवीं तक कक्षाएं लगाने पर पाबंदी है। इसके बावजूद जिले के अधिकतर निजी स्कूलों में बच्चों को बुलाया जा रहा है। स्कूल संचालक अभिभावकों को फोन कर उनकी सहमति मांग रहे हैं, जबकि बच्चों को बुलाने पर पाबंदी है। ऐसे हालात इक्का-दुक्का नहीं जिले के सैकड़ों निजी स्कूलों में देखे जा रहे हैं।
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स्कूल आने वाले इन बच्चों के चेहरों पर मास्क तक नहीं रहता है। शिक्षा विभाग शिकायत मिलने की बात जरूरत कबूल करता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज आश्वासन तक सिमट कर रह जाता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर प्रशासन व शिक्षा विभाग किसके दबाव में काम कर रहा है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी की मानें तो एक से पांचवीं तक स्कूल खोलने का मामला उनके संज्ञान में अभी आया है। उन्होंने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।
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स्कूल संचालकों के साथ परिजन भी जिम्मेदार
मंगलवार को जब परिजनों से बच्चों को स्कूल भेजने के संबंध में बात की गई तो उन्होंने बताया कि स्कूल संचालकों की ओर से फोन कर बच्चों को भेजने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर परिजन अपने छोटे बच्चों की जान क्यों जोखिम में डाल रहे हैं। कोई भी स्कूल प्राइमरी तो दूर सीनियर विंग में भी बच्चों को स्कूल भेजने का दबाव नहीं बना सकता है। ऐसे में बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए संचालकों के अलावा परिजन भी उतने ही जिम्मेदार हैं।
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आशंकित तीसरी लहर में बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा होने की बात
चिकित्सकों के अनुसार लगातार बताया जा रहा है कि कोरोना की आशंकित तीसरी लहर से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को है। प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग भी इसी खतरे को भांपते हुए अभी तक प्राइमरी विंग को खोलने के आदेश देने से कतरा रहा है। लेकिन जिले में इसके उलट स्कूलों में बच्चों को बुलाया जा रहा है। स्कूल जाते व छुट्टी के समय देखा जा सकता है कि बच्चों के चेहरों पर मास्क तक नहीं होते हैं।
इस संबंध में डीईईओ, रेवाड़ी कपिल पूनिया ने कहा कि सभी बीईओ को पत्र जारी कर स्कूलों में जाकर जांच के आदेश दिए हैं। कुछ स्कूलों की शिकायत मिलने के बाद ही पत्र जारी किए गए हैं। किसी भी स्तर पर नियमों की अवहेलना नहीं करने दी जाएगी। जहां पर भी प्राइमरी के बच्चों केे बुलाया जाएगा, वहां पर कार्रवाई होगी। सरकारी स्कूलों में कहीं पर बच्चों को नहीं बुलाया जा रहा है।

इधर, रेवाड़ी के डीसी यशेंद्र सिंह ने कहा कि नियमों की अवहेलना की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है। यदि कोई भी स्कूल प्राइमरी के बच्चों को बुला रहा है तो शिकायत दें। ऐसे स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से जिन बच्चों को बुलाने के आदेश दिए गए हैं, उनकी ही कक्षाएं लगाई जा सकती हैं।
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