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32 साल में भी नहीं सजा महिला अधिवक्ता के सिर प्रधानी का ताज

Tue, 14 Dec 2021 01:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 01:30 AM IST
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The crown of the head of the female advocate was not punished even in 32 years
रेवाड़ी। एक ओर ग्राम पंचायतों में 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण कर दिया गया है। वहीं, जिला बार में अभी तक महिला अधिवक्ता के लिए कोई पद आरक्षित नहीं है। बुद्धिजीवी वर्ग में महिलाओं के सामने बड़ी चुनौती है, जिसके चलते आज तक किसी भी महिला के सिर पर जिला बार एसोसिएशन के प्रधान का ताज नहीं सज पाया है, जबकि जिला बार एसोसिएशन को बने हुए 32 साल हो चुके हैं। हालांकि उपप्रधान पद पर महिला अधिवक्ता रह चुकीं हैं।
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एक नवंबर 1989 को रेवाड़ी अलग जिला बना था। उससे पहले गुरुग्राम का सब डिवीजन हुआ करता था। वहीं नारनौल में सेशन कोर्ट हुआ करता था। वर्ष 1989 में पहली बार जिला बार एसोसिएशन के चुनाव हुए थे। इसमें मोहर सिंह यादव पहली बार जिला बार के प्रधान बने थे। 32 साल बीतने के बाद भी प्रधान पद का वर्चस्व पुरुष वकीलों के पास ही रहा है। इस साल भी प्रधान पद के लिए दो वकील मैदान में उतरे हैं, लेकिन इस पद पर किसी महिला ने नामांकन तक भी नहीं किया है। इस बार केवल दो महिला अधिवक्ता ही चुनाव लड़ रही हैं। अधिवक्ता राखी शर्मा ने सचिव पद व भारती देवी ने संयुक्त सचिव पद के लिए नामांकन भरा है।
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अभी तक ये रहे हैं प्रधान
प्रधान का नाम कार्यकाल
मोहर सिंह यादव 1989-90
सुनील राव 1990-91
नरेंद्र सिंह राव 1991-92
योगेंद्र सिंह यादव 1992-93
धर्मसिंह यादव 1993-94
सुनील कुमार चौधरी 1994-95
एसएन वशिष्ठ 1995-96
समय सिंह यादव 1996-97
सुनील कुमार यादव 1997-98
ओमप्रकाश यादव 1998-99
सुनील राव 1999-2000
सुनील कुमार चौधरी 2000-01
सतीश यादव 2001-04
विवेक यादव 2004-05
सुरेश कुमार यादव 2005-06
योगेंद्र सिंह यादव 2006-07
अनिल राव 2007-08
रविंद्र यादव 2008-09
मनोज कुमार यादव 2009-10
राव रघुबीर सिंह 2010-11
रविंद्र यादव 2011-15
शमशेर यादव 2015-16
जसवीर सिंह 2016-18
रविंद्र यादव 2018-19
सुधीर यादव 2019-21
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जिला बार में भी महिला अधिवक्ता की भागीदारी जरूरी
सचिव पद पर चुनाव लड़ रही हूं। जिला बार में भी महिला अधिवक्ता की भागीदारी जरूरी है। वर्तमान समय में महिला किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। अगर जिला बार का सदस्य बनने का मौका मिला तो पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ सभी अधिवक्ताओं के हित के लिए कार्य करूंगी।
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-राखी शर्मा, अधिवक्ता।
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जिला बार में एक पद महिलाओं के लिए आरक्षित होना चाहिए। पहले जिला बार में महिला अधिवक्ताओं की संख्या कम होती थी। वर्तमान समय में जिला कोर्ट में महिलाओं को संख्या काफी अधिक है। जिला बार में एक सदस्य महिला अधिवक्ता होना जरूरी है।
अनीता यादव, अधिवक्ता।
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एक बार जिला बार में उपप्रधान व संयुक्त सचिव रह चुकी हूं। उस समय महिला अधिवक्ताओं ने चुनाव को लेकर काफी प्रयास किए थे, लेकिन उतनी मेहनत के बावजूद उतने वोट नहीं मिले। सभी यह सोचते हैं कि महिलाएं जरूरत पड़ने पर उनके साथ कैसे खड़ी हो सकेंगी।

- ललिता भारती, अधिवक्ता।
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महिला वकीलों को चुनावों में हिस्सा लेना चाहिए। जब अन्य कामों में महिलाएं पीछे नहीं हैं, जब कोर्ट में केस लड़ सकती हैं तो चुनाव में हिस्सा लेने से क्यों पीछे रहना। महिला अधिवक्ता भी जिला बार के सभी कार्य कर सकती हैं।
- कुसुमलता, अधिवक्ता एवं पार्षद।
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