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किसान बोले- तीनों कृषि कानून रद्द होने तक जारी रहेगा आंदोलन
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रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन रविवार को 209वें दिन भी जारी रहा। धरनास्थल पर धीरे-धीरे किसानों की संख्या में बढ़ने लगी है। आसपास के क्षेत्रों के युवा किसान धरनास्थल पर जारी समूह चर्चाओं में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगे हैं। किसानों ने कहा कि तीनों कृषि कानून रद्द होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने राजस्थान के किसानों को दिल्ली-जयपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर अपना पड़ाव डाल दिया था। यहां हरियाणा, पंजाब व महाराष्ट्र सहित विभिन्न प्रदेशों के किसान अपना समर्थन देने के लिए पहुंच रहे हैं। रविवार को भाकियू के प्रदेश सचिव रामकिशन महलावत व राजाराम मील ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चंद औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के मकसद से बनाए तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं। केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना ही पड़ेगा। अगर देश में ये कानून लागू हो गए तो किसान पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा, लेकिन केंद्र सरकार कुछ औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों पर जबरदस्ती ये कानून थोपना चाहती है। उन्होंने कहा कि आंदोलन एक बार फिर से तेजी पकड़ने लगा है। देश के कोने-कोने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने लगे हैं। किसानों का संकल्प है कि तीनों कृषि कानून रद्द होने तक वे आंदोलन को जारी रखेंगे। इसके साथ ही बावल चौरासी की ट्रैक्टर परेड यात्रा के बाद से खेड़ा बॉर्डर के मोर्चे पर भी किसानों की हलचल बढ़ गई है। इस अवसर पर सुमेर जैलदार, पूर्व सरपंच सुमेर बनीपुर, रणजीत राजू, अमराराम, ईश्वर महलावत, अतर सिंह नेहरा व रण सिंह सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
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बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने राजस्थान के किसानों को दिल्ली-जयपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर अपना पड़ाव डाल दिया था। यहां हरियाणा, पंजाब व महाराष्ट्र सहित विभिन्न प्रदेशों के किसान अपना समर्थन देने के लिए पहुंच रहे हैं। रविवार को भाकियू के प्रदेश सचिव रामकिशन महलावत व राजाराम मील ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चंद औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के मकसद से बनाए तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं। केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना ही पड़ेगा। अगर देश में ये कानून लागू हो गए तो किसान पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा, लेकिन केंद्र सरकार कुछ औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों पर जबरदस्ती ये कानून थोपना चाहती है। उन्होंने कहा कि आंदोलन एक बार फिर से तेजी पकड़ने लगा है। देश के कोने-कोने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने लगे हैं। किसानों का संकल्प है कि तीनों कृषि कानून रद्द होने तक वे आंदोलन को जारी रखेंगे। इसके साथ ही बावल चौरासी की ट्रैक्टर परेड यात्रा के बाद से खेड़ा बॉर्डर के मोर्चे पर भी किसानों की हलचल बढ़ गई है। इस अवसर पर सुमेर जैलदार, पूर्व सरपंच सुमेर बनीपुर, रणजीत राजू, अमराराम, ईश्वर महलावत, अतर सिंह नेहरा व रण सिंह सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
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