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शहादत पर गर्व के साथ छलके दुख के अश्क-

Fri, 03 Jun 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
ब्यूरो /अमर उजाला Updated Fri, 03 Jun 2016 01:02 AM IST
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tear fallen from eyes of family member and friend for which person who sacirfy for the country
डीएससी के जवान रण सिंह की मौत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
देश के सबसे बड़े सेना के पुलगांव केंद्रीय आयुध भंडार में लगी आग में कोसली क्षेत्र के गांव गुड़ियानी के डीएससी के जवान रण सिंह(45) का राजकीय सम्मान के साथ वीरवार को गांव के श्मशान घाट में दाह संस्कार कर दिया गया। दूसरी ओर उनके साथ शहीद हुए नया गांव के सतीश का पार्थिव शव गांव नहीं पहुंच पाया।
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एक ओर ग्रामीण उनके पार्थिव शव के इंतजार में हैं, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।प्रशासन कि सूचना के अनुसार शहीद सतीश का शव कल दस बजे के बाद आने कि संभावना है।दोपहर में जैसे ही शहीद रण सिंह का शव गांव में पहुंचा तो परिवार में जहां मातम छाया हुआ था। वहीं उसकी दोनों बेटियों नीतू, सपना व दोनों बेटों संजय और नितेष रो-रोकर बेहाल थे।
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वहीं उनकी पत्नी गुड्डो देवी वहां उपस्थित लोगों को रोने से रोकते हुए बस यही कह रही थी कि उसके पति ने फर्ज पूरा करते हुए शहादत ली है, इस बात का उसे ताउम्र फक्र रहेगा। शहीद रण सिंह के अन्तिम संस्कार में कांग्रेस के एससी सैल के प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश डाबला, नरेन्द्र राजौरा ,भुरथला के सरपंच ताराचन्द , पूर्व सरपंच मीनाक्षी देवी, पूर्व प्राचार्य दयानन्द ,कोसली के थाना इन्चार्ज नरेंद्र कुमार सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे ।
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-भारत मां और वीर जवान के जयघोष से गूंजा आसमां
शहीद रण सिंह का पार्थिव शरीर गांव गुड़ियानी में आने के बाद से लेकर अंत्येष्टि तक भारत माता के जयकारों से आसमान गूंज उठा। शहीद रण सिंह के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करने के लिए गांव के अलावा आस पास के गावों से  सैकड़ों की तादाद में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। गांव के लोगों ने बताया कि रणसिंह एक मिलनसार व अपने कर्तव्य के प्रति सजग रहने वाले इंसान थे। उनके अंतिम संस्कार में शहीद के साथ आए सूबेदार अनूप गोड़ा ने और प्रशासन की ओर से कोसली के तहसीलदार प्रवीण कुमार ने शहीद को पुष्प अर्पित किए वहीं हरियाणा पुलिस के डीएसपी मो.जमाल  के नेतृत्व में पुलिस के जवानों ने मातमी धुन के साथ शस्त्र सलामी दी।  

-6 मई को ही घर से ड्यूटी के लिये दोबारा हुए थे रवाना
शहीद के बड़े भाई बलवंत ने बताया कि रण सिंह एक माह कि छुट्टी लेकर अप्रैल माह में आए और 6 मई को छुट्टी पूरी कर घर से वापस ड्यूटी पर तैनात होने गए थे। शहीद रण सिंह की दस साल आर्मी में नौकरी के बाद सेवानिवृत्ति हुई थी। जिसके बाद वह राष्ट्रीय सुरक्षा कोर में वर्ष 2001 में भर्ती हुए थे। और अब वह महाराष्ट्र के पुलगांव में स्थित केंद्रीय आयुध भंडार में अपनी सेवा दे रहे थे।


बेटे की शहादत पर आंख पथराईं, दूसरों के लिए मांगी दुआ
शहीद रणसिंह की मां संतोष देवी(76) को जब से बेटे के शहीद होने की खबर मिली है, उसके बाद से मानो उनकी आंखें पथरा सी गई है। लेकिन पथराई आंखों से बेटे के जाने का दु:ख भूल कर उनके साथ आए जवानों की सलामती की दुआ मांगते हुए लव्ज बस यही कहते हैं कि भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे।
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