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गर्मी ले रही इम्तिहान, बिजली कटौती कर रही परेशान
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रेवाड़ी। गर्मी के कारण जहां आमजन व्याकुल हो चुके हैं, वहीं बिजली की अघोषित कटौती ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। उन्हें न दिन में चैन मिल रहा है और न ही रात में आराम मिल रहा है। लोगों का कहना है कि अप्रैल माह के दौरान ग्रामीण क्षेत्र में दिन में दो से 3 घंटे से अधिक रोजाना, जबकि रात में तीन से चार घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। उधर, शहरी क्षेत्रों में भी लगभग रोजाना दो घंटे से अधिक बिजली कटौती हो रही है। गर्मी इम्तिहान ले रही है, जबकि बिजली कटौती उन्हें परेशान कर रही है।
बिजली निगम के अनुसार जिले को प्रतिदिन सवा लाख यूनिट बिजली आपूर्ति चाहिए, लेकिन बिजली उत्पादन कम होने के कारण इसे पूरा नहीं किया जा रहा है। मार्च माह की जिले में बिजली खपत 55 लाख यूनिट प्रतिदिन थी जो अब बढ़कर 66 लाख यूनिट प्रतिदिन हो गई है। गर्मी बढ़ने के साथ मई और जून में यह 80 लाख यूनिट प्रतिदिन होने की संभावना है। जिले में लाइन लॉस 9 फीसदी है।
निगम अफसरों का कहना है कि अप्रैल माह में बिजली के तारों और विद्युत ट्रांसफार्मरों के अलावा अन्य सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। गर्मी बढ़ने से बिजली खपत, बिजली चोरी और लोग की परेशानियां बढ़ी हैं। ऐसा अनुमान है कि गर्मी के चालू मौसम में इस बार भी जिलावासियों को बिजली की कमी झेलनी पड़ेगी। हालांकि मार्च में बिजली निगम के अधिकारियों ने यह दावा किया था कि मई - जून में यह समस्या नहीं होगी, मगर अब तस्वीर उलट दिख रही है। बिजली निगम के अधिकारियों ने यह विश्वास दिलाया है कि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए बिजली उत्पादक कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है और जल्द नए बिजली समझौते भी होने की उम्मीद है।
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लोड बढ़ने के कारण हो रही बिजली कटौती
निगम अधिकारियों का कहना है कि लोग फ्रिज, कूलर, एसी लगभग चौबीस घंटे चला रहे हैं। ऐसे लोड बढ़ रहा है। वहीं, रात के तापमान में भी निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे लगभग रोजाना शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली की अघोषित कटौती की जा रही है। लोग इस वजह से बिजली निगम की आलोचना कर रहे हैं।
कटौती के दौरान जलापूर्ति हो रही प्रभावित
जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति नहरी पानी आधारित होने के कारण आम घर से लेकर जनस्वास्थ्य विभाग को भी बिजली चलित मोटरों को सहारा लेना पड़ता है। विभाग जहां नहरी पानी के संग्रहण और उसे स्वच्छ करके उपभोक्ता तक पहुंचाने के लिए जबकि एक उपभोक्ता अपने घर में जरूरी कामों के लिए पानी मोटर लगाकर ही लेता है। सिंचाई विभाग भी बिजली चलित मोटरों से नहरों में पानी भेजता है, जो शहर और देहात के अलग-अलग हिस्सों में आपूर्ति होता है। बिजली कटौती होने के कारण जलापूर्ति प्रभावित हो रही है।
झुग्गियाें में हो रही बिजली चोरी,
जिले के प्रत्येक शहर के चारों ओर आए दिन झुग्गी झोंपड़ियां बसने लगी हैं। यहां बिजली मीटर नहीं लगे हैं, मगर यहां दिन-रात बिजली रहती है। यहां बिजली से चलने वाले पंखे, कूलर, टीवी, फ्रिज तथा वॉशिंग मशीन तक देखे जा सकते हैं। इनकी बिजली कहां से आती होगी, यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिकारियों की मानें तो बिजली निगम में पेपरलेस और मोबाइल पर बिजली बिल भुगतान के संदेश पहुंचने के बाद ग्राहकों ने कतार में लगना कम कर दिया है। डिजिटल लेन देन बढ़ा है। फोनपे, गुगल पे, भीम एप, यूपीआई तथा अन्य माध्यमों से बिजली निगम के पास 75 से 80 प्रतिशत बिजली बिलों का भुगतान आ रहा है। अधिकारी और कर्मचारियों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ा है।
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सोमवार को शहर के अलावा कई जगहों हुई बिजली कटौती
- बिजली निगम की ओर से 220 केवी रेवाड़ी सब स्टेशन में सोमवार को साल में एक बार होने वाला मेंटेनेंस कार्य कराया गया, जिसकी वजह से कहीं तीन घंटे तो कहीं चार घंटे बिजली आपूर्ति पर असर पड़ा।
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कोयला और ईंधन की कमी से बिजली उत्पादन कम
अधिकारियों के अनुसार पावर ग्रिड से बिजली कम मिलने के पीछे कोयला आयात में कमी आना और ईंधन की कमी की वजह से बिजली उत्पादन में कमी आई है। सरकार बिजली कमी को दूर करने के लिए बिजली उत्पादक राज्यों के संपर्क में है। जल्द नए बिजली समझौते होने की उम्मीद है।
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कोट
- जिले में अब 66 लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली आपूर्ति हो रही है, जो गर्मी बढ़ने के साथ 80 लाख यूनिट प्रतिदिन होने की संभावना है। बिजली चोरी रोकने के लिए दर्जनों टीमें काम कर रही हैं। सौ से अधिक चोरियां पकड़ी जा चुकी हैं। अकेले रेवाड़ी मंडल में 69 चोरियां पकड़ी गई हैं। 15 टीमें यह काम कर रही हैं। लोगों से अपील है कि वे बिजली निगम को सहयोग दें और बिजली चोरी नहीं करें, यह कानूनन अपराध है। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ बिजली निगम सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा।
- धर्मेंद्र रूहिल, रेवाड़ी मंडल डीएचवीपीएन।
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बिजली निगम के अनुसार जिले को प्रतिदिन सवा लाख यूनिट बिजली आपूर्ति चाहिए, लेकिन बिजली उत्पादन कम होने के कारण इसे पूरा नहीं किया जा रहा है। मार्च माह की जिले में बिजली खपत 55 लाख यूनिट प्रतिदिन थी जो अब बढ़कर 66 लाख यूनिट प्रतिदिन हो गई है। गर्मी बढ़ने के साथ मई और जून में यह 80 लाख यूनिट प्रतिदिन होने की संभावना है। जिले में लाइन लॉस 9 फीसदी है।
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निगम अफसरों का कहना है कि अप्रैल माह में बिजली के तारों और विद्युत ट्रांसफार्मरों के अलावा अन्य सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। गर्मी बढ़ने से बिजली खपत, बिजली चोरी और लोग की परेशानियां बढ़ी हैं। ऐसा अनुमान है कि गर्मी के चालू मौसम में इस बार भी जिलावासियों को बिजली की कमी झेलनी पड़ेगी। हालांकि मार्च में बिजली निगम के अधिकारियों ने यह दावा किया था कि मई - जून में यह समस्या नहीं होगी, मगर अब तस्वीर उलट दिख रही है। बिजली निगम के अधिकारियों ने यह विश्वास दिलाया है कि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए बिजली उत्पादक कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है और जल्द नए बिजली समझौते भी होने की उम्मीद है।
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लोड बढ़ने के कारण हो रही बिजली कटौती
निगम अधिकारियों का कहना है कि लोग फ्रिज, कूलर, एसी लगभग चौबीस घंटे चला रहे हैं। ऐसे लोड बढ़ रहा है। वहीं, रात के तापमान में भी निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे लगभग रोजाना शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली की अघोषित कटौती की जा रही है। लोग इस वजह से बिजली निगम की आलोचना कर रहे हैं।
कटौती के दौरान जलापूर्ति हो रही प्रभावित
जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति नहरी पानी आधारित होने के कारण आम घर से लेकर जनस्वास्थ्य विभाग को भी बिजली चलित मोटरों को सहारा लेना पड़ता है। विभाग जहां नहरी पानी के संग्रहण और उसे स्वच्छ करके उपभोक्ता तक पहुंचाने के लिए जबकि एक उपभोक्ता अपने घर में जरूरी कामों के लिए पानी मोटर लगाकर ही लेता है। सिंचाई विभाग भी बिजली चलित मोटरों से नहरों में पानी भेजता है, जो शहर और देहात के अलग-अलग हिस्सों में आपूर्ति होता है। बिजली कटौती होने के कारण जलापूर्ति प्रभावित हो रही है।
झुग्गियाें में हो रही बिजली चोरी,
जिले के प्रत्येक शहर के चारों ओर आए दिन झुग्गी झोंपड़ियां बसने लगी हैं। यहां बिजली मीटर नहीं लगे हैं, मगर यहां दिन-रात बिजली रहती है। यहां बिजली से चलने वाले पंखे, कूलर, टीवी, फ्रिज तथा वॉशिंग मशीन तक देखे जा सकते हैं। इनकी बिजली कहां से आती होगी, यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिकारियों की मानें तो बिजली निगम में पेपरलेस और मोबाइल पर बिजली बिल भुगतान के संदेश पहुंचने के बाद ग्राहकों ने कतार में लगना कम कर दिया है। डिजिटल लेन देन बढ़ा है। फोनपे, गुगल पे, भीम एप, यूपीआई तथा अन्य माध्यमों से बिजली निगम के पास 75 से 80 प्रतिशत बिजली बिलों का भुगतान आ रहा है। अधिकारी और कर्मचारियों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ा है।
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सोमवार को शहर के अलावा कई जगहों हुई बिजली कटौती
- बिजली निगम की ओर से 220 केवी रेवाड़ी सब स्टेशन में सोमवार को साल में एक बार होने वाला मेंटेनेंस कार्य कराया गया, जिसकी वजह से कहीं तीन घंटे तो कहीं चार घंटे बिजली आपूर्ति पर असर पड़ा।
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कोयला और ईंधन की कमी से बिजली उत्पादन कम
अधिकारियों के अनुसार पावर ग्रिड से बिजली कम मिलने के पीछे कोयला आयात में कमी आना और ईंधन की कमी की वजह से बिजली उत्पादन में कमी आई है। सरकार बिजली कमी को दूर करने के लिए बिजली उत्पादक राज्यों के संपर्क में है। जल्द नए बिजली समझौते होने की उम्मीद है।
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कोट
- जिले में अब 66 लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली आपूर्ति हो रही है, जो गर्मी बढ़ने के साथ 80 लाख यूनिट प्रतिदिन होने की संभावना है। बिजली चोरी रोकने के लिए दर्जनों टीमें काम कर रही हैं। सौ से अधिक चोरियां पकड़ी जा चुकी हैं। अकेले रेवाड़ी मंडल में 69 चोरियां पकड़ी गई हैं। 15 टीमें यह काम कर रही हैं। लोगों से अपील है कि वे बिजली निगम को सहयोग दें और बिजली चोरी नहीं करें, यह कानूनन अपराध है। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ बिजली निगम सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा।
- धर्मेंद्र रूहिल, रेवाड़ी मंडल डीएचवीपीएन।