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कौल में कक्षाएं लगाने पर बावल में हंगामा
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sat, 23 Apr 2016 01:03 AM IST
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हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के बावल स्थित रीसर्च सेंटर में एग्रीकल्चर कॉलेज में नए सत्र से दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की कक्षाएं करनाल के कौल में लगाए जाने का विरोध शुरू हो गया है। बावल विकास मंच ने इसे एग्रीकल्चर कॉलेज को तोड़ने की संभावना बताया और मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त डॉ यश गर्ग को ज्ञापन सौंपा। मंच के सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा हुआ तो मंच के बैनर तले बावल क्षेत्र के लोग आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे।
मंच के अध्यक्ष एडवोकेट नवल सिंह जांगू का कहना है कि पूर्व में भी कॉलेज को बंद कर दिया गया था, जिसे दोबारा चालू कराने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। सरकार को चाहिए कि यहां 100 सीटें निर्धारित करें और हॉस्टल व कॉलेज बिल्डिंग के लिए फंड दे। ताकि विद्यार्थियों को सुविधाएं मिल सके। इस दौरान एडवोकेट राजेंद्र सिंह, ब्लॉक बावल के पूर्व चेयरमैन नानकचंद, इनेलो नेता देवीचंद के साथ सुमेर सिंह, रामनाथ, महेंद्र सिंह, दिनेश कुमार, रमेश, जितेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
1995 में शुरू हुआ था, दो साल बाद हो गया था बंद
बावल में एग्रीकल्चर कॉलेज 1995 में ही शुरू हो गया था। उस वक्त दाखिले भी हुए और दो साल तक कॉलेज चला भी, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कॉलेज दोबारा शुरू करने की घोषणा की थी। बाद में वर्तमान सीएम मनोहर लाल खट्टर ने बावल रैली में यहां कक्षाएं शुरू करने की घोषणा की। पिछले सत्र में 25 विद्यार्थियों का दाखिला हुआ और कक्षाएं भी लगी, लेकिन अब नए दाखिले लेने वाली विद्यार्थियों की कक्षाएं हॉस्टल व बिल्डिंग की कमी बताकर कौल में लगाई जाएंगी।
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वर्जन
कॉलेज बंद नहीं होगा। केवल जगह के अभाव में कक्षाएं कौल में लगेंगी। नाम बावल का ही रहेगा। जैसे ही बिल्डिंग बन जाएगी, सभी कक्षाएं यहीं पर लगेंगी। 76 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई थी। उसमें कुछ पैसा आ भी गया है।
डॉ बनवारी लाल, विधायक, बावल
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मंच के अध्यक्ष एडवोकेट नवल सिंह जांगू का कहना है कि पूर्व में भी कॉलेज को बंद कर दिया गया था, जिसे दोबारा चालू कराने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। सरकार को चाहिए कि यहां 100 सीटें निर्धारित करें और हॉस्टल व कॉलेज बिल्डिंग के लिए फंड दे। ताकि विद्यार्थियों को सुविधाएं मिल सके। इस दौरान एडवोकेट राजेंद्र सिंह, ब्लॉक बावल के पूर्व चेयरमैन नानकचंद, इनेलो नेता देवीचंद के साथ सुमेर सिंह, रामनाथ, महेंद्र सिंह, दिनेश कुमार, रमेश, जितेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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1995 में शुरू हुआ था, दो साल बाद हो गया था बंद
बावल में एग्रीकल्चर कॉलेज 1995 में ही शुरू हो गया था। उस वक्त दाखिले भी हुए और दो साल तक कॉलेज चला भी, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कॉलेज दोबारा शुरू करने की घोषणा की थी। बाद में वर्तमान सीएम मनोहर लाल खट्टर ने बावल रैली में यहां कक्षाएं शुरू करने की घोषणा की। पिछले सत्र में 25 विद्यार्थियों का दाखिला हुआ और कक्षाएं भी लगी, लेकिन अब नए दाखिले लेने वाली विद्यार्थियों की कक्षाएं हॉस्टल व बिल्डिंग की कमी बताकर कौल में लगाई जाएंगी।
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कॉलेज बंद नहीं होगा। केवल जगह के अभाव में कक्षाएं कौल में लगेंगी। नाम बावल का ही रहेगा। जैसे ही बिल्डिंग बन जाएगी, सभी कक्षाएं यहीं पर लगेंगी। 76 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई थी। उसमें कुछ पैसा आ भी गया है।
डॉ बनवारी लाल, विधायक, बावल