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डॉक्टरों ने हड़ताल कर किया प्रदर्शन, ओपीडी रही ठप
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रेवाड़ी। मांगों को लेकर धरने पर बैठे नागरिक अस्पताल के चिकित्सक।
- फोटो : Rewari
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एचसीएमएस एसोसिएशन के आह्वान पर वीरवार को विभिन्न मांगों को लेकर जिले भर के सरकारी अस्पतालों के मरीजों ने हड़ताल पर रहकर प्रदर्शन किया। जिससे ओपीडी ठप रही और करीब पांच हजार मरीजों को बिना इलाज के ही अस्पताल से लौटना पड़ा। जिससे वह डॉक्टरों को कोसते नजर आए। हालांकि इमरजेंसी सेवा बहाल रहने से गंभीर रोगियों का इलाज जारी रहा।
जिले में नागरिक अस्पताल, पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र(पीएचसी) और पांच अर्बन सेंटर के डॉक्टर हड़ताल पर रहे। हर रोज इन स्वास्थ्य केंद्रों पर पांच हजार से ज्यादा मरीजों को इलाज दिया जाता है। इससे पहले भी 30 अगस्त को डॉक्टरों ने दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की थी। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि जल्द ही मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 9 सितंबर से सभी डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
26 अगस्त से 3 सितंगर तक सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मासिस्टों ने हड़ताल की थी। इस दौरान मरीजों को डॉक्टरों को दिखाने के बाद दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही थी। आलम ये था कि अस्पताल में एंटीबायोटिक तक खत्म हो चुकी है। ऐसे में वीरवार को डॉक्टरों की हड़ताल से परेशानी बढ़ना निश्चित था।
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कोसली में केंद्र व्यापी डॉक्टरों की विभिन्न मांगों को लेकर की गई हड़ताल का असर नागरिक अस्पताल कोसली में भी देखने को मिला। सुबह 9 बजे ओपीडी कक्ष में मौजूद चिकित्सकों ने ओपीडी में आये रोगी को देखने से इंकार कर दिया जबकि आपातकालीन स्थिति में आये मरीज का इलाज किया गया।
बावल में राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत क्षेत्र के सभी चिकित्सक वीरवार को हड़ताल पर रहे। जिसके कारण मरीजों को अस्पतालों से बिना उपचार बैरंग लौटना पड़ा। जिस कारण मरीजों व उनके परिजन को भारी परेशानी हुई।
आज पट्टी नहीं खुली तो आंख खराब होने का डर
गांव चांदावास निवासी राजेंद्र व गांव भैरामपुर भड़ंगी निवासी राजाराम ने नागरिक अस्पताल में ही बुधवार को आंखों का ऑपरेशन कराया था। दोनों को वीरवार को पट्टी को खुलवाने के लिए अस्पताल में बुलाया था। दोनों ही सुबह करीब आठ बजे से अस्पताल में पहुंच गए, लेकिन कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं था। आज आंखों की पट्टी हटाकर उनमें दवाई डालना जरूरी है। वरना आंखों के खराब होने की संभावना है। दोनों मरीजों ने बताया कि चिकित्सकों ने भी बात की है, लेकिन हड़ताल के कारण कोई बात करने को ही तैैयार नहीं है। ऐसे में आंखों की खराब होने का डर सताने लगा है।
इंजेक्शन लगवाने के लिए चक्कर लगा रहा हूं
रेवाड़ी करीब पचास किलोमीटर दूर गांव नाहड़ निवासी ओमकार ने बताया कि उसके भाई की पत्नी को कुत्ते ने काट खाया था, जिसको इंजेक्शन लगवाने के लिए पहले नाहड़ के अस्पताल में गया, वहां से कोसली के अस्पताल गया, उसके बाद रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल आया, लेकिन तीनों ही स्थानों पर चिकित्सकों की हड़ताल के कारण उसे इंजेक्शन नहीं लगाया गया। वह सुबह करीब 11 बजे अस्पताल पहुंच गया था।
हड़ताल के कारण नहीं मिला इलाज
शहर के मोहल्ला मुक्तिवाड़ा निवासी दूर्गा प्रसाद ने बताया कि उसके कई दिनों से खांसी की परेशानी है। जिसके उपचार के लिए वह नागरिक अस्पताल आया था, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल होने के कारण उसे उपचार नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा कोई जानकारी देने वाला भी नहीं है।
जारी रहीं आपातकालीन सेवाएं
हड़ताल के दौरान पोस्टमार्टम, आपातकालीन, लबर रूम व एसएनसीयू सेवाएं सुचारु रूप से जारी रही। वीरवार दोपहर तक पांच महिलाओं की डिलीवरी की गई और एक पोस्टमार्टम किया गया।
प्रदर्शन में ये रहे शामिल
प्रदर्शन करने वालों में डॉ. रणवीर, डॉ. प्रदीप, अभिषेक, डॉ. सुरेंद्र कुमार, डॉ.विक्रम, डॉ. सर्वजीत, डॉ. अशोक रंगा, डॉ अनिल यादव व सुरेंद्र यादव सहित अन्य शामिल रहे।
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जिले में नागरिक अस्पताल, पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र(पीएचसी) और पांच अर्बन सेंटर के डॉक्टर हड़ताल पर रहे। हर रोज इन स्वास्थ्य केंद्रों पर पांच हजार से ज्यादा मरीजों को इलाज दिया जाता है। इससे पहले भी 30 अगस्त को डॉक्टरों ने दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की थी। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि जल्द ही मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 9 सितंबर से सभी डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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26 अगस्त से 3 सितंगर तक सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मासिस्टों ने हड़ताल की थी। इस दौरान मरीजों को डॉक्टरों को दिखाने के बाद दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही थी। आलम ये था कि अस्पताल में एंटीबायोटिक तक खत्म हो चुकी है। ऐसे में वीरवार को डॉक्टरों की हड़ताल से परेशानी बढ़ना निश्चित था।
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कोसली में केंद्र व्यापी डॉक्टरों की विभिन्न मांगों को लेकर की गई हड़ताल का असर नागरिक अस्पताल कोसली में भी देखने को मिला। सुबह 9 बजे ओपीडी कक्ष में मौजूद चिकित्सकों ने ओपीडी में आये रोगी को देखने से इंकार कर दिया जबकि आपातकालीन स्थिति में आये मरीज का इलाज किया गया।
बावल में राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत क्षेत्र के सभी चिकित्सक वीरवार को हड़ताल पर रहे। जिसके कारण मरीजों को अस्पतालों से बिना उपचार बैरंग लौटना पड़ा। जिस कारण मरीजों व उनके परिजन को भारी परेशानी हुई।
आज पट्टी नहीं खुली तो आंख खराब होने का डर
गांव चांदावास निवासी राजेंद्र व गांव भैरामपुर भड़ंगी निवासी राजाराम ने नागरिक अस्पताल में ही बुधवार को आंखों का ऑपरेशन कराया था। दोनों को वीरवार को पट्टी को खुलवाने के लिए अस्पताल में बुलाया था। दोनों ही सुबह करीब आठ बजे से अस्पताल में पहुंच गए, लेकिन कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं था। आज आंखों की पट्टी हटाकर उनमें दवाई डालना जरूरी है। वरना आंखों के खराब होने की संभावना है। दोनों मरीजों ने बताया कि चिकित्सकों ने भी बात की है, लेकिन हड़ताल के कारण कोई बात करने को ही तैैयार नहीं है। ऐसे में आंखों की खराब होने का डर सताने लगा है।
इंजेक्शन लगवाने के लिए चक्कर लगा रहा हूं
रेवाड़ी करीब पचास किलोमीटर दूर गांव नाहड़ निवासी ओमकार ने बताया कि उसके भाई की पत्नी को कुत्ते ने काट खाया था, जिसको इंजेक्शन लगवाने के लिए पहले नाहड़ के अस्पताल में गया, वहां से कोसली के अस्पताल गया, उसके बाद रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल आया, लेकिन तीनों ही स्थानों पर चिकित्सकों की हड़ताल के कारण उसे इंजेक्शन नहीं लगाया गया। वह सुबह करीब 11 बजे अस्पताल पहुंच गया था।
हड़ताल के कारण नहीं मिला इलाज
शहर के मोहल्ला मुक्तिवाड़ा निवासी दूर्गा प्रसाद ने बताया कि उसके कई दिनों से खांसी की परेशानी है। जिसके उपचार के लिए वह नागरिक अस्पताल आया था, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल होने के कारण उसे उपचार नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा कोई जानकारी देने वाला भी नहीं है।
जारी रहीं आपातकालीन सेवाएं
हड़ताल के दौरान पोस्टमार्टम, आपातकालीन, लबर रूम व एसएनसीयू सेवाएं सुचारु रूप से जारी रही। वीरवार दोपहर तक पांच महिलाओं की डिलीवरी की गई और एक पोस्टमार्टम किया गया।
प्रदर्शन में ये रहे शामिल
प्रदर्शन करने वालों में डॉ. रणवीर, डॉ. प्रदीप, अभिषेक, डॉ. सुरेंद्र कुमार, डॉ.विक्रम, डॉ. सर्वजीत, डॉ. अशोक रंगा, डॉ अनिल यादव व सुरेंद्र यादव सहित अन्य शामिल रहे।