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कागजों में लगीं स्ट्रीट लाइटें कर रहीं गांव को ‘रोशन’, बजट के बाद भी विकास को तरस रहे ग्रामीण

Sat, 22 Oct 2022 10:00 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 22 Oct 2022 10:00 PM IST
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Street lights on paper are illuminating the village, even after the budget, the villagers are craving for development
गांव नांगल शहबाजपुर में नाली होती ओवरफ्लो। - फोटो : Rewari
बावल। बावल पंचायत समिति में कुल 73 गांव और 84926 मतदाता है, लेकिन पंचायत समिति केवल 22 वार्डों में से चुनी जानी है। समिति के पिछले कार्यकाल में करीब 3 करोड़ रुपये का बजट आने के बाद भी खर्च नहीं किया गया। इससे ग्रामीणों में भारी रोष है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये मिलने के बाद भी विकास कार्य पर बजट का पचास फीसदी रुपये भी खर्च नहीं किए गए। ऐसे में गांवों मिलने वाली जरूरी सुविधाएं कैसे पूरी हो पाएंगी। अभी तक कई विकास कार्य अधूरे ही पड़े हुए हैं। कुछ की घोषणा तो हुई है, लेकिन धरातल पर नहीं आए है। गांवों के रास्ते आज भी बदहाल है, जिनमें गंदा पानी भरा रहता है। गांवों में पंचायत समिति के कोटे से स्ट्रीट लाइटें लगाई जानी थीं, इनमें कुछ गांवों में तो लगी, लेकिन बाकी में कागजों में ही गांवों को रोशन कर रही हैं। इस बार उसे वोट देकर चुना जाएगा, जो विकास की नीयत रखता हो।
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ग्रामीणों ने बताया कि समिति के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन सत्ता पक्ष से समर्थित हैं। फिर भी कुछ वार्डों में विकास कार्य को लेकर भेदभाव किया गया है। सरकार की ओर से करोड़ों रुपये मिलने के बाद भी कुछ गांव तो ऐसे हैं, जिनमें 5 लाख रुपये भी नहीं लगाए गए। इससे कुछ समिति सदस्य भी परेशान हैं। उनकी ओर से प्रस्तावित काम या तो पूरे ही नहीं हुए। वे अभी तक अधूरे ही पड़े है।
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ये हैं अधूरे काम
पंचायत समिति के तहत सभी वार्डों में स्ट्रीट लाइटें लगनी थीं, जिसमें अधिकतर गांव में नहीं लगी। वहीं गांवों में श्मशान घाट की चहारदीवारी व टीन शेड डालने थे, वो भी अधूरे ही पड़े हैं। गांवों में सीवर व कच्चे रास्तों में इटरलॉकिंग टाइल डालनी थी, जो आधे से ज्यादा गांव में नहीं हुए। सरकार द्वारा पंचायत समिति में बजट देने के बाद भी विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, जबकि कागजात में तो कुछ कार्य पूरे दिखाए गए हैं।
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क्या बोले ग्रामीण
ब्लॉक पंचायत समिति पर सरकार भी ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है। इसलिए विकास कार्य भी अच्छे से नहीं हो पाते हैं। वहीं समिति में बजट आने के बाद नहीं रुपये खर्च नहीं किए गए। ऐसे में विकास कार्य हो नहीं सकते हैं।
-प्रकाश
गांवों में व्यायामशाला खोलनी थी, लेकिन अभी तक कुछ भी धरातल पर नहीं हो पाया है। वहीं युवाओं के लिए खेलकूद का समाना देना था, वो भी नहीं दिया गया।
-रामरतन
पंचायत समिति के कार्यकाल में करोड़ों रुपये का बजट आने के बाद भी कई विकास कार्य नहीं करवाया गया। केवल वादे ही किए गए, जो भी कार्य हुए वो कागजों में ही हैं।
-जयप्रकाश
पंचायत समिति की ग्रांट ग्राम पंचायत के खाते में जाती है। ऐसे में पंचायतों की ओर से विकास कार्यों की ओर कम ध्यान दिया गया। जबकि कई गांवों में आज भी गलियां बदहाल है।

-सुरेश चंद
कोट
मेरे कार्यकाल में समिति के सभी गांवों के लिए काफी बजट आया है। सभी गांवों में विकास कार्य कराए गए हैं। गलियां, पीने की पानी की सुविधा, श्मशान घाट के रास्ते प्रमुखता से बनवाए गए हैं। क्षेत्र का कोई गांव ऐसा नहीं हैं, जिसमें विकास कार्य नहीं कराया गया।
-बिरेंद्र छील्लर, निवर्तमान पंचायत समिति चैैयरमेन
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