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तीज पर सुरक्षा में खलन ने पड़े डीसी ने चाइनीज मांझा खरीदने व बेचने पर लगाई रोक
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शहर में पतंग की दुकान पर पतंग खरीदते युवा
- फोटो : Rewari
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हरियाली तीज उत्सव में पतंगबाजी से किसी की सुरक्षा खतरे में न पड़े, इसको देखते हुए डीसी यशेंद्र सिंह ने अपनी विशेष शाक्तियों का प्रयोग करते हुए चाइनीज मांझा बेचने,खरीदने व भंडारण पर रोक लगा दी है। यदि कोई ऐसा करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सिंथेटिक मांझा जो बाजार में चाइनीज डोरी के नाम से जाना जाता है। । पतंग उड़ाते समय देखा गया है कि कई बार हादसे हो चुके हैं। पतंग उड़ाने वाले ही नहीं अन्य लोग भी इसके शिकार हो जाते हैं। इसको देखते हुए प्रशासन ने इस मांझा की बिक्री व भंडारण पर रोक लगा दी है।
बाजार में बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ पतंग की डिमांड
इस बार तीज उत्सव पर शहर के बाजारों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पतंग की डिमांड है।
शहर के पतंग बाजार में दुकानदारों के पास जो पतंब उपलब्ध है, उस पर बेटी बचाओ का संदेश लिखा हुआ है। खरीददार भी इस तरह की पतंग खरीदने में उत्साह दिखा रहे हैं। इससे पहले ढ़ोल, ढ़पली, तिरंगा जैसी पतंगों का चलन रहा है।
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तीज के झूले हुए गायब
सावन के दौरान हरियाली तीज का अपना विशेष महत्व है। महिलाएं जहां झूला झूलकर इस उत्सव को मनाती हैं, वहीं युवा पतंगबाजी कर त्यौहार का आनंद लेते हैं। लेकिन समय के साथ व्यवस्थाएं भी बदल रही हैं। अब पेड़ा पर झूले कम ही दिखाई देते हैं। इसको पर्यावरण से भी जोड़कर देखा जा सकता है, क्योंकि पेड़ कटाई से इनकी संख्या कम होती जा रही है। ऐसे में संस्कृति व पर्यावरण को बचाने के लिए पौधरोपण जरूरी है।
घेवर व मिठाई की दुकानें भी सजी
तीज के त्यौहार पर घेवर व मिठाईयों की दुकाने भी सज चुकी हैं। शहर के प्रतिष्ठत मिष्ठान भंडार पर अभी से स्टॉल लग चुकी है। तीज और घेवर का खास मिलन है। लोग अपनी बहनों व बेटियों के घर तीज का त्योहार देने के लिए घेवर ही लेकर जाते हैं।
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सिंथेटिक मांझा जो बाजार में चाइनीज डोरी के नाम से जाना जाता है। । पतंग उड़ाते समय देखा गया है कि कई बार हादसे हो चुके हैं। पतंग उड़ाने वाले ही नहीं अन्य लोग भी इसके शिकार हो जाते हैं। इसको देखते हुए प्रशासन ने इस मांझा की बिक्री व भंडारण पर रोक लगा दी है।
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बाजार में बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ पतंग की डिमांड
इस बार तीज उत्सव पर शहर के बाजारों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पतंग की डिमांड है।
शहर के पतंग बाजार में दुकानदारों के पास जो पतंब उपलब्ध है, उस पर बेटी बचाओ का संदेश लिखा हुआ है। खरीददार भी इस तरह की पतंग खरीदने में उत्साह दिखा रहे हैं। इससे पहले ढ़ोल, ढ़पली, तिरंगा जैसी पतंगों का चलन रहा है।
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तीज के झूले हुए गायब
सावन के दौरान हरियाली तीज का अपना विशेष महत्व है। महिलाएं जहां झूला झूलकर इस उत्सव को मनाती हैं, वहीं युवा पतंगबाजी कर त्यौहार का आनंद लेते हैं। लेकिन समय के साथ व्यवस्थाएं भी बदल रही हैं। अब पेड़ा पर झूले कम ही दिखाई देते हैं। इसको पर्यावरण से भी जोड़कर देखा जा सकता है, क्योंकि पेड़ कटाई से इनकी संख्या कम होती जा रही है। ऐसे में संस्कृति व पर्यावरण को बचाने के लिए पौधरोपण जरूरी है।
घेवर व मिठाई की दुकानें भी सजी
तीज के त्यौहार पर घेवर व मिठाईयों की दुकाने भी सज चुकी हैं। शहर के प्रतिष्ठत मिष्ठान भंडार पर अभी से स्टॉल लग चुकी है। तीज और घेवर का खास मिलन है। लोग अपनी बहनों व बेटियों के घर तीज का त्योहार देने के लिए घेवर ही लेकर जाते हैं।