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धर्म व साधना से हो सकता है जीव का कल्याण : सरस्वती भूषण माता
Wed, 12 Aug 2026 12:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 12 Aug 2026 12:17 AM IST
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सरस्वती भूषण माता संबोधित करते। स्रोत : समाज
रेवाड़ी। 37वें वर्षयोग के अवसर पर रानीला से पैदल विहार करते हुए मुनि संघ के रेवाड़ी पहुंचने पर जैन समाज की ओर से स्वागत किया गया। श्री दिगंबर अतिशय नसियाजी में आयोजित कार्यक्रम में मंगलाचरण मीनाक्षी जैन ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
समारोह में कलश स्थापना की गई। दीनदयाल, राहुल जैन, महेंद्र जैन, अजय जैन, धीरज जैन और हेमराज जैन सहित समाज के लोगों ने कलश स्थापना की जिम्मेदारी निभाई। अजीत पंसारी परिवार की ओर से झंडारोहण किया गया। हेमराज और विजय जैन परिवार ने माता जी को वस्त्र भेंट किए।
सरस्वती भूषण माता ने कहा कि कलश स्थापना का उद्देश्य घर-घर में मंगल भावनाओं का संचार करना और सभी को चातुर्मास के भक्ति सागर से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान समय का सदुपयोग करते हुए धर्म और साधना से जुड़ना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि नदी के किनारे खड़े रहने से प्यास नहीं बुझती, बल्कि नदी में उतरकर ही निर्मल जल प्राप्त किया जा सकता है। इसी प्रकार जीवन में धर्म और साधना रूपी नदी में उतरने से ही जीव का कल्याण संभव है। जहां गुरु आते हैं, वह स्थान तीर्थ बन जाता है।
संघस्थ प्रियंका ने भी समय का सदुपयोग करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में दिल्ली, रोहतक, बहादुरगढ़ और गोहाना सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु पहुंचे।
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समारोह में कलश स्थापना की गई। दीनदयाल, राहुल जैन, महेंद्र जैन, अजय जैन, धीरज जैन और हेमराज जैन सहित समाज के लोगों ने कलश स्थापना की जिम्मेदारी निभाई। अजीत पंसारी परिवार की ओर से झंडारोहण किया गया। हेमराज और विजय जैन परिवार ने माता जी को वस्त्र भेंट किए।
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सरस्वती भूषण माता ने कहा कि कलश स्थापना का उद्देश्य घर-घर में मंगल भावनाओं का संचार करना और सभी को चातुर्मास के भक्ति सागर से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान समय का सदुपयोग करते हुए धर्म और साधना से जुड़ना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि नदी के किनारे खड़े रहने से प्यास नहीं बुझती, बल्कि नदी में उतरकर ही निर्मल जल प्राप्त किया जा सकता है। इसी प्रकार जीवन में धर्म और साधना रूपी नदी में उतरने से ही जीव का कल्याण संभव है। जहां गुरु आते हैं, वह स्थान तीर्थ बन जाता है।
संघस्थ प्रियंका ने भी समय का सदुपयोग करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में दिल्ली, रोहतक, बहादुरगढ़ और गोहाना सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु पहुंचे।