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वैज्ञानिक अनुसंधान में तकनीकी कौशल का विशेष महत्व : डॉ. नरेश
Tue, 07 Jan 2025 11:24 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 07 Jan 2025 11:24 PM IST
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फोटो : 17इंस्ट्रूमेंटेशन पर तीन दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। सीसीएसएचएयू कृषि महाविद्यालय बावल में इंस्ट्रूमेंटेशन पर तीन दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बीआर कम्बोज ने किया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेश कौशिक ने वैज्ञानिक अनुसंधान में तकनीकी कौशल प्राप्त करने का महत्व बताया।
डॉ. कौशिक ने प्रतिभागियों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. बीआर कंबोज ने कृषि अनुसंधान में सटीकता और नवीनता प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक उपकरणों में दक्षता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में प्रभावी योगदान देने के लिए युवा वैज्ञानिकों को सशक्त बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने टिप्पणी की उन्नत उपकरणों के साथ व्यावहारिक अनुभव किताबी ज्ञान और व्यावहारिक प्रयोग के बीच के अंतर को मिटाता है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है। इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से कुल 25 छात्रों एवं शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
प्रशिक्षण का समन्वय डॉ. तन्वी भाटिया ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सैद्धांतिक और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए दो सत्र शामिल किए गए थे। पहले सत्र में स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, सेंट्रीफ्यूज और आटोक्लेव जैसे उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. हरीश एमएस के नेतृत्व में दूसरा सत्र बीज विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला पर केंद्रित था, जहां प्रतिभागियों को आधुनिक बीज परीक्षण और विश्लेषण तकनीकों से परिचित कराया गया।
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बावल। सीसीएसएचएयू कृषि महाविद्यालय बावल में इंस्ट्रूमेंटेशन पर तीन दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बीआर कम्बोज ने किया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेश कौशिक ने वैज्ञानिक अनुसंधान में तकनीकी कौशल प्राप्त करने का महत्व बताया।
डॉ. कौशिक ने प्रतिभागियों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. बीआर कंबोज ने कृषि अनुसंधान में सटीकता और नवीनता प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक उपकरणों में दक्षता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में प्रभावी योगदान देने के लिए युवा वैज्ञानिकों को सशक्त बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने टिप्पणी की उन्नत उपकरणों के साथ व्यावहारिक अनुभव किताबी ज्ञान और व्यावहारिक प्रयोग के बीच के अंतर को मिटाता है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है। इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से कुल 25 छात्रों एवं शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
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प्रशिक्षण का समन्वय डॉ. तन्वी भाटिया ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सैद्धांतिक और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए दो सत्र शामिल किए गए थे। पहले सत्र में स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, सेंट्रीफ्यूज और आटोक्लेव जैसे उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. हरीश एमएस के नेतृत्व में दूसरा सत्र बीज विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला पर केंद्रित था, जहां प्रतिभागियों को आधुनिक बीज परीक्षण और विश्लेषण तकनीकों से परिचित कराया गया।
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