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सावित्री बाई फुले ने महिलाओं के लिए शिक्षा का द्वार खोला : शशि भूषण
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सैनी पब्लिक स्कूल में सावित्री बाई फुले की जयंती पर उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित करता स्कूल ?
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी/बावल। महाराजा शूर सैनी मार्ग स्थित सैनी पब्लिक स्कूल में सावित्री बाई फुले की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ सैैनी समाज के प्रधान शशि भूषण सैनी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले ने नारी के लिए शिक्षा का दरवाजा खोला। उन्होंने महिलाओं के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन कुर्बान कर दिया। उनके संघर्ष को कभी नहीं भुलाया जा सकता। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सावित्री बाई फुले के जीवन पर प्रकाश डाला।
इस दौरान उन्होंने कहा कि सेक्टर-18 स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय का नामकरण करीब दस साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सैनी सभा की मांग पर किया था। तब महाविद्यालय में सावित्री बाई फुले की प्रतिमा लगाने पर भी सहमति दी थी, लेकिन अब तक सावित्री बाई फुले की प्रतिमा नहीं लग पाई है। सैनी सभा की ओर से सरकार से यह मांग की जाती है कि वह जल्द से जल्द महाविद्यालय में सावित्री बाई फुले प्रतिमा लगाई जाए। इस मौके पर प्राचार्य अनिता यादव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए शिक्षा के प्रगति पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर हरि सिंह सैनी, धर्मेंद्र सैनी, सूर्यकांत सैनी, हरिराम सैनी, रतिराम सैनी आदि मौजूद थे।
उधर, बावल में सैनी सभा की ओर से पहली अध्यापिका माता सावित्री बाई फुले की जयंती के उपलक्ष्य पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. राजबीर से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता डॉ. कीर्ति नामदेवा रही, जिन्होंने सावित्री बाई फुले के जीवन संघर्ष के बारे में बताया। महिलाओं को अज्ञानता की बेड़ियों से आजादी देने में अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।
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प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि जो महिलाओं पढ़लिखकर आगे बढ़ रही है। सावित्री बाई फुले के संघर्ष का परिणाम हैं, नारियों को हक ओर सम्मान दिलाने ओर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सावित्री बाई ने देश मे ऐतिहासिक कार्य किए। कायर्क्रम का संचालन पूजा सैनी ने किया। इस अवसर पर डॉ. कीर्ति नामदेवा, प्रो. राजबीर, हेमंत, ताराचंद सैनी, दीनदयाल, लालचंद, दाताराम, पवन, बिशंभर, कीर्ति, मदन, फूलसिंह, रमेश, योगेश, ईश्वर, रामकिशन, रामकिशन महलावत आदि मौजूद थे।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि सेक्टर-18 स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय का नामकरण करीब दस साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सैनी सभा की मांग पर किया था। तब महाविद्यालय में सावित्री बाई फुले की प्रतिमा लगाने पर भी सहमति दी थी, लेकिन अब तक सावित्री बाई फुले की प्रतिमा नहीं लग पाई है। सैनी सभा की ओर से सरकार से यह मांग की जाती है कि वह जल्द से जल्द महाविद्यालय में सावित्री बाई फुले प्रतिमा लगाई जाए। इस मौके पर प्राचार्य अनिता यादव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए शिक्षा के प्रगति पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर हरि सिंह सैनी, धर्मेंद्र सैनी, सूर्यकांत सैनी, हरिराम सैनी, रतिराम सैनी आदि मौजूद थे।
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उधर, बावल में सैनी सभा की ओर से पहली अध्यापिका माता सावित्री बाई फुले की जयंती के उपलक्ष्य पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. राजबीर से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता डॉ. कीर्ति नामदेवा रही, जिन्होंने सावित्री बाई फुले के जीवन संघर्ष के बारे में बताया। महिलाओं को अज्ञानता की बेड़ियों से आजादी देने में अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।
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प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि जो महिलाओं पढ़लिखकर आगे बढ़ रही है। सावित्री बाई फुले के संघर्ष का परिणाम हैं, नारियों को हक ओर सम्मान दिलाने ओर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सावित्री बाई ने देश मे ऐतिहासिक कार्य किए। कायर्क्रम का संचालन पूजा सैनी ने किया। इस अवसर पर डॉ. कीर्ति नामदेवा, प्रो. राजबीर, हेमंत, ताराचंद सैनी, दीनदयाल, लालचंद, दाताराम, पवन, बिशंभर, कीर्ति, मदन, फूलसिंह, रमेश, योगेश, ईश्वर, रामकिशन, रामकिशन महलावत आदि मौजूद थे।