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Rewari News: आरटीआई ने बढ़ाई पुलिस की सिरदर्दी
Mon, 22 Apr 2024 03:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 22 Apr 2024 03:37 AM IST
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रेवाड़ी। जिला पुलिस मुख्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत एक माह में करीब 500 आवेदन किए जा रहे हैं। ज्यादातर मामलों में शिकायतकर्ता यह जानना चाहता है कि उसके मामले पर क्या कार्रवाई पुलिस ने अब तक की है। इसके साथ ही पुलिस विभाग में की गई कार्रवाई की सत्यापित प्रतिलिपि लेने के लिए भी आरटीआई का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सूचना मांगने वालों की संख्या लगातार दिन प्रतिदिन बढ़ने का कारण यह भी बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई में जो समय लगता है उसी से परेशान होकर हर आदमी अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई का स्टेटस जानना चाहता है। कई मामले ऐसे हैं जिसमें आवेदक कई महीनों से इंतजार भी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सही जवाब नहीं मिल रहा है। कई आवेदक तो ऐसे हैं एक ही जवाब के लिए बार-बार आरटीआई लगा रहे हैं। कुल मिलाकर, आरटीआई वही लोग लगा रहे हैं जो पुलिस कार्रवाई की लेटलतीफी से काफी परेशान हैं।
गौरतलब है कि जिला पुलिस प्रशासन ने आरटीआई सेल का गठन कर सूचना देने के लिए नियम बनाए हुए हैं। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को यदि पुलिस विभाग से संबंधित कोई सूचना लेनी हो तो राज्य अध्ययन सूचना अधिकारी के नाम पर सूचना प्राप्त की जा सकती है। कोई भी व्यक्ति साधारण कागज पर आवेदन कर सूचना मांग सकता है। इस सूचना के लिए उसे 10 रुपये की फीस अदा करनी होती है। इस फीस के लिए बकायदा रसीद जारी की जाती है। इतना ही नहीं आरटीआई के प्रावधानों के तहत 30 दिन के अंदर सूचना मांगने वाले को सूचना देनी होती है। पुलिस के उच्च अधिकारियों का कहना है कि जिला पुलिस प्रशासन द्वारा गठित आरटीआई सेल तत्परता से कार्य में लगी है।
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इंसेट
बढ़ते आवेदनों से पुलिस प्रशासन भी परेशान
जिला सचिवालय में पुलिस विभाग ने एक आरटीआई सेल का गठन किया हुआ है। इस आरटीआई सेल में तीन से पांच कर्मचारी कार्यरत हैं। दूसरी तरफ लगातार बढ़ती आवेदनों की संख्या से पुलिस प्रशासन भी परेशान है। आरटीआई सेल में कार्य करने वाले पुलिस कर्मचारियों से जब इस संदर्भ में पूछा गया कि आरटीआई लगाने वाले ज्यादातर क्या मांग करते हैं तो उन्होंने बताया कि पुलिस में शिकायत करने के तुरंत बाद ही शिकायतकर्ता आरटीआई के तहत जानकारी लेने आ जाता है। जबकि कई बार शिकायतकर्ता को यही जवाब मिलता है कि उनकी जांच अभी पुलिस में की जा रही है। उन्होंने बताया कि अधिकतर मामले में शिकायत की कार्रवाई ही मांगी जाती है।
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सूचना मांगने वालों की संख्या लगातार दिन प्रतिदिन बढ़ने का कारण यह भी बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई में जो समय लगता है उसी से परेशान होकर हर आदमी अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई का स्टेटस जानना चाहता है। कई मामले ऐसे हैं जिसमें आवेदक कई महीनों से इंतजार भी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सही जवाब नहीं मिल रहा है। कई आवेदक तो ऐसे हैं एक ही जवाब के लिए बार-बार आरटीआई लगा रहे हैं। कुल मिलाकर, आरटीआई वही लोग लगा रहे हैं जो पुलिस कार्रवाई की लेटलतीफी से काफी परेशान हैं।
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गौरतलब है कि जिला पुलिस प्रशासन ने आरटीआई सेल का गठन कर सूचना देने के लिए नियम बनाए हुए हैं। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को यदि पुलिस विभाग से संबंधित कोई सूचना लेनी हो तो राज्य अध्ययन सूचना अधिकारी के नाम पर सूचना प्राप्त की जा सकती है। कोई भी व्यक्ति साधारण कागज पर आवेदन कर सूचना मांग सकता है। इस सूचना के लिए उसे 10 रुपये की फीस अदा करनी होती है। इस फीस के लिए बकायदा रसीद जारी की जाती है। इतना ही नहीं आरटीआई के प्रावधानों के तहत 30 दिन के अंदर सूचना मांगने वाले को सूचना देनी होती है। पुलिस के उच्च अधिकारियों का कहना है कि जिला पुलिस प्रशासन द्वारा गठित आरटीआई सेल तत्परता से कार्य में लगी है।
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बढ़ते आवेदनों से पुलिस प्रशासन भी परेशान
जिला सचिवालय में पुलिस विभाग ने एक आरटीआई सेल का गठन किया हुआ है। इस आरटीआई सेल में तीन से पांच कर्मचारी कार्यरत हैं। दूसरी तरफ लगातार बढ़ती आवेदनों की संख्या से पुलिस प्रशासन भी परेशान है। आरटीआई सेल में कार्य करने वाले पुलिस कर्मचारियों से जब इस संदर्भ में पूछा गया कि आरटीआई लगाने वाले ज्यादातर क्या मांग करते हैं तो उन्होंने बताया कि पुलिस में शिकायत करने के तुरंत बाद ही शिकायतकर्ता आरटीआई के तहत जानकारी लेने आ जाता है। जबकि कई बार शिकायतकर्ता को यही जवाब मिलता है कि उनकी जांच अभी पुलिस में की जा रही है। उन्होंने बताया कि अधिकतर मामले में शिकायत की कार्रवाई ही मांगी जाती है।