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रोडवेज छात्राओं और महिलाओं को भूला, महीनों से नहीं चल रहीं नौ पिंक बसें
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रोडवेज डिपो में खड़ी महिलाओं के लिए चलाई जाने वाली पिंक बस।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। कोरोना संकट के दौरान लगे लॉकडाउन के बाद हर तरह की गतिविधियां शुरू हो गई हैं। लेकिन छात्राओं के लिए चलने वाली रोडवेज की स्पेशल पिक बसें अभी तक रूटों पर नहीं चल सकी हैं।
बता दें कि डिपो को छात्राओं के लिए गांव से शहर तक लाने व ले जाने के लिए 9 पिंक बसें मिली हुई हैं। लेकिन कोरोना के समय एंबुलेंसों की कमी के कारण पांच बसों को अस्पताल द्वारा एंबुलेंस बनाकर प्रयोग किया गया था। अब नई एंबुलेंस भी सिविल अस्पताल को मिल चुकी है। बावजूद इसके पिंक बसें रोडवेज कार्यशाला में खड़ी रहती हैं। रोजाना अब स्कूल- कॉलेज खुलने के बाद पढ़ने के लिए आने वाली छात्राओं की संख्या बढ़ रही है। जिससे उन्हें आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्राएं मजबूरी में प्राइवेट बसों या अन्य साधनों में सफर कर रही हैं।
चार हजार के करीब छात्राएं आती हैं स्कूल कॉलेजों में पढ़ने
जिले के विभिन्न गांवों से लगभग चार हजार छात्राएं शहर में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आती हैं। सुबह संस्थान खुलने के समय व सायं को छुट्टी के बाद बसों की कमी के कारण छात्राओं को धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ता है। इस दौरान छात्राओं को कॉलेज तक आने व कॉलेज से घर तक पहुंचने और भीड़ से बचने के लिए लंबे इंतजार करना पड़ता है। वहीं गांव से आते-जाते समय भीड़ के कारण उन्हें परेशानी होती है। फिर शहर में भी आकर आटो वालों को आते-जाते रुपये देने पड़ते हैं। कई बार रुपये नहीं होते हैं तो पैदल ही बस स्टैंड और कॉलेज तक जाती हैं। रोडवेज की बस सर्विस बहुत ही कम है और छात्राओं ने बस पास बनवाए हुए हैं। ऐसे में भीड़ में ही छात्राओं को सफर करना पड़ता है। कई बार तो खिड़की तक में खड़े होकर सफर करने की नौबत आती है।
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सुविधाओं से लैस हैं रोडवेज की पिंक बसें:
पिक बसें सभी सुविधाओं से लैस हैं। बसों में सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी डोर और अलार्म की सुविधा भी दी गई हैं। बसों में फायर सेफ्टी सुरक्षा के सभी यंत्र लगाए गए हैं। बस से उतरने के लिए बस के दरवाजे के पास एक बटन दिया गया है, जिसके दबाने पर अलार्म बजेगा और ड्राइवर गाड़ी रोक देगा। बसों में जीपीएस भी लगाया गया है, ताकि विभाग के अधिकारियों द्वारा बसों की निगरानी की जा सके।
छात्राओं की सुरक्षा के लिए पिंक बसें चलना जरूरी:
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय छात्रा प्रमुख ममता यादव ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद सभी शिक्षण संस्थान खुल चुके हैं। सरकार ने छात्राओं ने प्रत्येक 20 किलोमीटर पर कॉलेज खोलकर अच्छा काम किया है। वैसे ही परिवहन विभाग को छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोबारा पिंक बसों का संचालन शुरू करना चाहिए। पिंक बसों का संचालन शुरू होने के बाद काफी छात्राओं को फायदा मिलेगी और माता-पिता को बेटी की सुरक्षा की चिंता भी कम होगी।
इस संबंध में रेवाड़ी डिपो के जीएम अशोक ने कहा कि पांच पिंक बसें कोरोना के समय स्वास्थ्य विभाग को दी गई थीं। उनको वापस लेने के लिए लिख दिया गया है। जैसे ही बसें वापस मिलेंगी, सभी का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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बता दें कि डिपो को छात्राओं के लिए गांव से शहर तक लाने व ले जाने के लिए 9 पिंक बसें मिली हुई हैं। लेकिन कोरोना के समय एंबुलेंसों की कमी के कारण पांच बसों को अस्पताल द्वारा एंबुलेंस बनाकर प्रयोग किया गया था। अब नई एंबुलेंस भी सिविल अस्पताल को मिल चुकी है। बावजूद इसके पिंक बसें रोडवेज कार्यशाला में खड़ी रहती हैं। रोजाना अब स्कूल- कॉलेज खुलने के बाद पढ़ने के लिए आने वाली छात्राओं की संख्या बढ़ रही है। जिससे उन्हें आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्राएं मजबूरी में प्राइवेट बसों या अन्य साधनों में सफर कर रही हैं।
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चार हजार के करीब छात्राएं आती हैं स्कूल कॉलेजों में पढ़ने
जिले के विभिन्न गांवों से लगभग चार हजार छात्राएं शहर में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आती हैं। सुबह संस्थान खुलने के समय व सायं को छुट्टी के बाद बसों की कमी के कारण छात्राओं को धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ता है। इस दौरान छात्राओं को कॉलेज तक आने व कॉलेज से घर तक पहुंचने और भीड़ से बचने के लिए लंबे इंतजार करना पड़ता है। वहीं गांव से आते-जाते समय भीड़ के कारण उन्हें परेशानी होती है। फिर शहर में भी आकर आटो वालों को आते-जाते रुपये देने पड़ते हैं। कई बार रुपये नहीं होते हैं तो पैदल ही बस स्टैंड और कॉलेज तक जाती हैं। रोडवेज की बस सर्विस बहुत ही कम है और छात्राओं ने बस पास बनवाए हुए हैं। ऐसे में भीड़ में ही छात्राओं को सफर करना पड़ता है। कई बार तो खिड़की तक में खड़े होकर सफर करने की नौबत आती है।
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सुविधाओं से लैस हैं रोडवेज की पिंक बसें:
पिक बसें सभी सुविधाओं से लैस हैं। बसों में सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी डोर और अलार्म की सुविधा भी दी गई हैं। बसों में फायर सेफ्टी सुरक्षा के सभी यंत्र लगाए गए हैं। बस से उतरने के लिए बस के दरवाजे के पास एक बटन दिया गया है, जिसके दबाने पर अलार्म बजेगा और ड्राइवर गाड़ी रोक देगा। बसों में जीपीएस भी लगाया गया है, ताकि विभाग के अधिकारियों द्वारा बसों की निगरानी की जा सके।
छात्राओं की सुरक्षा के लिए पिंक बसें चलना जरूरी:
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय छात्रा प्रमुख ममता यादव ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद सभी शिक्षण संस्थान खुल चुके हैं। सरकार ने छात्राओं ने प्रत्येक 20 किलोमीटर पर कॉलेज खोलकर अच्छा काम किया है। वैसे ही परिवहन विभाग को छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोबारा पिंक बसों का संचालन शुरू करना चाहिए। पिंक बसों का संचालन शुरू होने के बाद काफी छात्राओं को फायदा मिलेगी और माता-पिता को बेटी की सुरक्षा की चिंता भी कम होगी।
इस संबंध में रेवाड़ी डिपो के जीएम अशोक ने कहा कि पांच पिंक बसें कोरोना के समय स्वास्थ्य विभाग को दी गई थीं। उनको वापस लेने के लिए लिख दिया गया है। जैसे ही बसें वापस मिलेंगी, सभी का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।