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तारकोल की बजाए मिक्सड बालू से बनेंगी सड़कें
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Tue, 03 Jan 2017 11:11 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते प्रदूषण पर एनजीटी की चिंता के बाद लोक निर्माण (भवन एवं सड़क) विभाग जर्मनी की तर्ज पर जिले में ग्रीन टेक्नोलॉजी (हरी प्रौद्योगिकी) से सड़कों का निर्माण करेगा। नई वैकल्पिक प्रौद्योगिकी के तहत तारकोल-पत्थर एवं अन्य प्रदूषण युक्त तत्वों की बजाय सड़कें मिक्सड बालू से बनाईं जाएंगी। प्रयोग के तौर पर बावल हल्के के गांव मुकंदपुर बसई से 3.7 किमी. एवं मुकंदपुर बसई से साल्हावास तक 4.7 किमी. लंबी 4.80 करोड़ की लागत से सड़क निर्माण किया जाएगा।
निर्माण कार्यों से बढ़ते प्रदूषण से चिंतित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल प्रदेश सरकार को इस पर रोक लगाने के निर्देश दे चुका हैं। बीते दिनों तो पंद्रह दिन के लिए सभी निर्माण कार्यों पर रोक तक लगा दी गई थी। इसको देखते हुए जर्मनी में प्रयुक्त ग्रीन टेक्नालॉजी का हरियाणा सरकार भी ट्रायल कर रही है। इसके तहत हिसार के हांसी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी एवं करनाल को चुना गया था। इसके तहत ही रेवाड़ी में ट्रॉयल आधार पर दो सड़कों का निर्माण किया जाना है।
न पहाड़ टूटेंगे और न जलेगा तारकोल
सड़क निर्माण में प्रयुक्त तारकोल को सड़क निर्माण कार्य के दौरान 155 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाता है। इससे बहुतायत मात्रा में हाइड्रो कार्बन( कार्बन मोनोक्साइड गैस) निकलती हैं। पर्यावरण के लिए सबसे हानिकारक हाइड्रो कार्बन ही होते हैं। ऐसे में इस धुएं से जाने-अंजाने में जिले की दस लाख की आबादी चपेट में आ जाती हैं। इसके साथ सड़क निर्माण के लिए बड़ी-बड़ी पर्वत श्रेणियां तोड़ी जा रहीं हैं। जिसका सीधा प्रभाव हमारे वातावरण और पर्यावरण पर पड़ता है। वैकल्पिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से अब न तो पहाड़ तोड़े जाएंगे और न ही तारकोल जलाया जाएगा।
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हवा में नहीं घुलेगा जहर, बीस फीसदी सस्ती बनेंगी सड़कें
वर्ल्ड हैल्थ ऑरगेनाइजेशन(डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार दस से नौ लोग वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। सडक़ एवं भवन निर्माण कार्य भी इसके लिए एक बड़ा कारण हैं। सड़कों में ग्रीन टैक्नालॉजी प्रयुक्त करने से अब तारकोल से निकलने वाली जहरीली गैस हवा में नहीं घुलेगी। पत्थर तोड़ने से होने वाले प्रदूषण से भी लोगों को निजात मिलने के साथ यह पर्यावरण के अनुकूलित होगी। विभाग की माने तो नई प्रौद्योगिकी से सड़कें को निर्माण कार्य की लागत में बीस फीसदी की कमी आएगी।
प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह ने प्रदेश में पांच जगहों पर ट्रायल के तौर पर ग्रीन टैक्नोलॉजी प्रयुक्त करने का निर्णय लिया है। वैकल्पिक प्रौद्योगिकी से प्रदूषण कम होने के साथ लागत भी कम होगी। मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना है। जिले में दो सड़कों के लिए बजट पास हो गया है। जल्द ही टैंडर कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-हेमंत कुमार, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, रेवाड़ी।
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वायु प्रदूषण का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। निर्माण कार्यों के दौरान निकलने वाले जहरीले तत्व सांस के साथ हमारे शरीर के अंदर जाकर सांस लेना मुश्किल कर देते हैं। प्रदूषण बढ़ने से अस्पताल में हर दसवां मरीज सांस की बीमारी का पहुंच रहा हे। ग्रीन प्रौद्योगिकी से निश्चित तोर पर जिले के लोगों को फायदा मिलेगा।
-डॉ रणवीर सिंह, सांस रोग विशेषज्ञ
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निर्माण कार्यों से बढ़ते प्रदूषण से चिंतित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल प्रदेश सरकार को इस पर रोक लगाने के निर्देश दे चुका हैं। बीते दिनों तो पंद्रह दिन के लिए सभी निर्माण कार्यों पर रोक तक लगा दी गई थी। इसको देखते हुए जर्मनी में प्रयुक्त ग्रीन टेक्नालॉजी का हरियाणा सरकार भी ट्रायल कर रही है। इसके तहत हिसार के हांसी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी एवं करनाल को चुना गया था। इसके तहत ही रेवाड़ी में ट्रॉयल आधार पर दो सड़कों का निर्माण किया जाना है।
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न पहाड़ टूटेंगे और न जलेगा तारकोल
सड़क निर्माण में प्रयुक्त तारकोल को सड़क निर्माण कार्य के दौरान 155 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाता है। इससे बहुतायत मात्रा में हाइड्रो कार्बन( कार्बन मोनोक्साइड गैस) निकलती हैं। पर्यावरण के लिए सबसे हानिकारक हाइड्रो कार्बन ही होते हैं। ऐसे में इस धुएं से जाने-अंजाने में जिले की दस लाख की आबादी चपेट में आ जाती हैं। इसके साथ सड़क निर्माण के लिए बड़ी-बड़ी पर्वत श्रेणियां तोड़ी जा रहीं हैं। जिसका सीधा प्रभाव हमारे वातावरण और पर्यावरण पर पड़ता है। वैकल्पिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से अब न तो पहाड़ तोड़े जाएंगे और न ही तारकोल जलाया जाएगा।
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हवा में नहीं घुलेगा जहर, बीस फीसदी सस्ती बनेंगी सड़कें
वर्ल्ड हैल्थ ऑरगेनाइजेशन(डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार दस से नौ लोग वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। सडक़ एवं भवन निर्माण कार्य भी इसके लिए एक बड़ा कारण हैं। सड़कों में ग्रीन टैक्नालॉजी प्रयुक्त करने से अब तारकोल से निकलने वाली जहरीली गैस हवा में नहीं घुलेगी। पत्थर तोड़ने से होने वाले प्रदूषण से भी लोगों को निजात मिलने के साथ यह पर्यावरण के अनुकूलित होगी। विभाग की माने तो नई प्रौद्योगिकी से सड़कें को निर्माण कार्य की लागत में बीस फीसदी की कमी आएगी।
प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह ने प्रदेश में पांच जगहों पर ट्रायल के तौर पर ग्रीन टैक्नोलॉजी प्रयुक्त करने का निर्णय लिया है। वैकल्पिक प्रौद्योगिकी से प्रदूषण कम होने के साथ लागत भी कम होगी। मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना है। जिले में दो सड़कों के लिए बजट पास हो गया है। जल्द ही टैंडर कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-हेमंत कुमार, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, रेवाड़ी।
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वायु प्रदूषण का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। निर्माण कार्यों के दौरान निकलने वाले जहरीले तत्व सांस के साथ हमारे शरीर के अंदर जाकर सांस लेना मुश्किल कर देते हैं। प्रदूषण बढ़ने से अस्पताल में हर दसवां मरीज सांस की बीमारी का पहुंच रहा हे। ग्रीन प्रौद्योगिकी से निश्चित तोर पर जिले के लोगों को फायदा मिलेगा।
-डॉ रणवीर सिंह, सांस रोग विशेषज्ञ