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सोने के भाव गिरने के बाद भी नहीं हो रही खरीदारी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 17 Dec 2016 01:13 AM IST
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- फोटो : demo pic
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रेवाड़ी में पिछले 15 दिनों में सोने के दामों में आई तीन हजार रुपये तौले की गिरावट ने सर्राफा बाजार में सूनापन ला दिया है। सोने-चांदी के दाम गिरने से जहां आभूषणों की खरीद बढ़ने की उम्मीद थी वहीं पिछले एक सप्ताह में सेल 50 फीसदी से भी कम हो गई है। स्वर्णकारों की मानें तो नोटबंदी के बाद से ही सोना कारोबार में काफी गिरावट आई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि नोटबंदी के शुरूआती दिनों की तुलना में और भी कम व्यापार हो गया है। शुक्रवार को स्थानीय ज्वैलर्स शॉप पर सोने के आभूषण 26 हजार रुपये प्रति तौला के हिसाब से बिके। 15 दिन पूर्व इनकी कीमत 29500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।
कैश की कमी बड़ा कारण
नोटबंदी के बाद हुई कैश की किल्लत ने व्यापार क्षेत्र पर गहरा असर छोड़ा है। सराफा बाजार में इसका अधिक असर देखने को मिल रहा है। लिमिटेड कैश के चलते ग्राहक जरूरत के हिसाब से सोना नहीं खरीद पाए। शादी-ब्याह वालों ने भी बहुत कम मात्रा में आभूषण खरीदे हैं। दूसरी तरफ सभी ज्वैलर्स शॉप पर कैशलेस की सुविधा नहीं होने के कारण सभी ग्राहकों को ई-पेमेंट का भी लाभ नहीं मिला।
वैवाहिक मुहूर्त नहीं होने पड़ा असर
वर्तमान में कोई वैवाहिक मुहूर्त नहीं होने की वजह से भी सोने की खरीद प्रभावित हुई है। अब शुभ मुहूर्त मकर संक्रांति के बाद शुरू होंगे। ऐसे में सोने के भाव कम होने के बावजूद भी व्यापार ठप पड़ा है। दूसरी ओर वैश्विक मंदी के चलते लोग अभी सोने के दाम और कम होने का इंतजार कर रहे हैं। जिसके चलते ग्राहक अभी सोना नहीं खरीद रहे हैं।
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पिछले वैवाहिक सीजन की तुलना में इस बार केवल 15 फीसदी व्यापार ही रह गया है। वैश्विक मंदी से पहले की व्यापार कम था। वहीं नोटबंदी के बाद तो बिल्कुल ग्रहण सा लग गया है। - देवेंद्र कुमार जैन, स्वर्णकार
कैश की किल्लत के चलते कम भाव आ जाने पर भी लोग सोना नहीं खरीद पा रहे हैं। नोटबंदी से उबरने के बाद ही स्वर्ण कारोबार पटरी पर आएगा। स्वर्णकारों को तो नोटबंदी के पूर्व से ही मंदी झेलनी पड़ रही है। - दीपक सोनी, स्वर्णकार
कैश की कमी बड़ा कारण
नोटबंदी के बाद हुई कैश की किल्लत ने व्यापार क्षेत्र पर गहरा असर छोड़ा है। सराफा बाजार में इसका अधिक असर देखने को मिल रहा है। लिमिटेड कैश के चलते ग्राहक जरूरत के हिसाब से सोना नहीं खरीद पाए। शादी-ब्याह वालों ने भी बहुत कम मात्रा में आभूषण खरीदे हैं। दूसरी तरफ सभी ज्वैलर्स शॉप पर कैशलेस की सुविधा नहीं होने के कारण सभी ग्राहकों को ई-पेमेंट का भी लाभ नहीं मिला।
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वैवाहिक मुहूर्त नहीं होने पड़ा असर
वर्तमान में कोई वैवाहिक मुहूर्त नहीं होने की वजह से भी सोने की खरीद प्रभावित हुई है। अब शुभ मुहूर्त मकर संक्रांति के बाद शुरू होंगे। ऐसे में सोने के भाव कम होने के बावजूद भी व्यापार ठप पड़ा है। दूसरी ओर वैश्विक मंदी के चलते लोग अभी सोने के दाम और कम होने का इंतजार कर रहे हैं। जिसके चलते ग्राहक अभी सोना नहीं खरीद रहे हैं।
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पिछले वैवाहिक सीजन की तुलना में इस बार केवल 15 फीसदी व्यापार ही रह गया है। वैश्विक मंदी से पहले की व्यापार कम था। वहीं नोटबंदी के बाद तो बिल्कुल ग्रहण सा लग गया है। - देवेंद्र कुमार जैन, स्वर्णकार
कैश की किल्लत के चलते कम भाव आ जाने पर भी लोग सोना नहीं खरीद पा रहे हैं। नोटबंदी से उबरने के बाद ही स्वर्ण कारोबार पटरी पर आएगा। स्वर्णकारों को तो नोटबंदी के पूर्व से ही मंदी झेलनी पड़ रही है। - दीपक सोनी, स्वर्णकार