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Rewari News: अव्यवस्था और लापरवाही के ‘सरोवर’ में डूब गया सोलह राही के जीर्णोद्धार का प्रोजेक्ट

Sun, 01 Jan 2023 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 01 Jan 2023 11:27 PM IST
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Renovation project of Solah Rahi drowned in the 'lake' of chaos and negligence
सेक्टर एक स्थित सोलह राही सरोवर, जिसकी दीवार पर थोपे गए उपले। - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने के लिए एक बार नहीं बल्कि कई बार योजनाएं बनीं, लेकिन धरातल पर उतरने की बजाय सभी कागजों में सिमटकर रह गई हैं। इसी क्रम में अव्यवस्था और लापरवाही के ‘सरोवर’ में सोलह राही के जीर्णोद्धार का प्रोजेक्ट भी डूब चुका है। वर्ष 2017 में शहर के इस तालाब को रेवाड़ी व महेंद्रगढ़ की उन आठ ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल किया गया था, जिनका जीणोद्धार किया जाना था। सरकारी स्तर पर करीब 147 करोड़ का पूरा प्रोजेक्ट भी बनाया गया था। तत्कालीन सरकार की ओर से खूब ढिढोरा भी पीटा गया था, लेकिन हैरानी की बात है कि पांच साल बाद भी न 147 करोड़ रुपये आए और न ही इन ऐतिहासिक तालाबों का स्वरूप संवारा जा सका।
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हालात यह है कि इसके चारों ओर लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है तथा गोबर थापने का पथवारा बना दिया गया है। हालांकि पुरातत्व विभाग की टीम भी कई बार यहां का सर्वे भी कर चुकी हैं, लेकिन वर्षों इसका जीर्णोद्धार करने का कार्य सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इस तालाब के जीर्णोद्धार के लिए 10 लाख रुपये की घोषणा की थी।
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वर्तमान में यह तालाब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, जहां एक ओर इसकी प्राचीन कलात्मक दीवारें ढह चुकी हैं, वहीं आजकल कहीं झुग्गियां तो मढ़ी आदि बनाकर इसके चारों ओर से अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। इसमें विभिन्न मार्गों से आने वाले पानी के मार्गों को भी बंद कर दिया है। जिम्मेदारों की उपेक्षा के कारण आने वाले कुछ वर्षों में इन ऐतिहासिक धरोहरों का स्वरूप बच जाए, यह कह पाना भी मुश्किल है।
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पर्यटन के हिसाब से महत्वपूर्ण
सोलहराही तालाब पर्यटन के लिहाज से भी बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रशासन की ओर से इसके लिए कागजों में तो खूब योजनाएं बनीं, लेकिन धरातल पर आज तक कोई भी उतर नहीं पाई। स्थिति यह हो गई है कि तालाबों की इन दुर्दशा को लेकर शहर की सामाजिक संगठनों ने कई बार अधिकारियों के यहां गुहार लगाई, जिसके बाद मानव अधिकार आयोग ने जिला प्रशासन से इन ऐतिहासिक तालाबों को लेकर प्रशासन की रिपोर्ट मंगाई थी। उस समय तो प्रशासन ने सेक्टर-1 में स्थित सोलहराही तालाब में डाला जा रहा दूषित पानी बंद करके इसमें मौजूद सीवेज के पानी को बाहर डाला था। अब यह तालाब पूरी तरह से सूख चुका है लेकिन इसको नहरी पानी से भरने की योजना अभी भी अधर में है। यहां चंद संस्थाओं को छोड़ दें तो आज तक कभी सफाई अभियान ही नहीं चलाया गया है। तालाब की बनावट ऐसी है कि यहां पर पर्यटक आएं तो यह बहुत बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है। यहां से राजस्थान के काफी संख्या में पर्यटक जाते हैं। सोलह राही तालाब आजादी से पहले राजाओं के शासन में यहां की शान थी, लेकिन आज ये ही ऐतिहासिक धरोहर उपेक्षा की शिकार हो रही है। प्रशासन की तरफ से इनके सुंदरीकरण के लिए योजनाओं तो खूब बनाई, लेकिन वह अभियान साकार रूप नहीं ले पाया है। वर्ष 1995 में जब बाढ़ आई थी तो सेक्टर व पुराना हाउसिंग बोर्ड को इसी सोलहराही तालाब ने बचाया था। क्योंकि भाड़ावास की ओर से आने वाला बारिश का पानी दोनों आवासीय कॉलोनियों में आकर ठहर जाता था, लेकिन प्रशासन ने इसी तालाब में पूरा पानी डाला था।
यह बनाया गया था प्रोजेक्ट
प्रदेश सरकार ने जिला महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी की ऐतिहासिक धरोहरों को मूलरूप देकर पर्यटन के तौर पर विकसित करने के लिए वर्ष 2017 में एक योजना तैयार की थी। इन जिलों की ऐतिहासिक धरोहरों की पहचान को कायम रखने के लिए कुल 147 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने की बात कही गई थी। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 99 करोड़ व प्रदेश सरकार की ओर से 48 करोड़ रुपये की राशि देने पर सहमति बनी थी। इन आठ धरोहरों को टूरिजम इन्फ्रास्ट्रक्चर हेरिटेज सर्किट के तौर पर विकसित किया जाना था जिसमें महेंद्रगढ़ फोर्ट, माधोगढ़ फोर्ट, नारनौल का रायमुकंद का छत्ता, तख्त बओली, ढ़ोसी की पहाड़ी, रेवाड़ी का बड़ा तालाब, सोलहराही तालाब तथा सिटी वाईड इन्फ्रास्ट्रक्चर का जीर्णोद्धार शामिल था।
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सोलह मार्ग मिलने के कारण पड़ा सोलह राही नाम
शहर के सेक्टर एक स्थित प्राचीनतम तालाब सोलह राही के मात्र अवशेष बचे हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि 17वीं व 18वीं सदी के मुगल साम्राज्य की दास्तान का मूक गवाह रहा यह तालाब जनता ने सामूहिक प्रयासों से चंदा इक्कठा करके बनवाया था। समाजसेवी गंगाराम भगत की देखरेख में निर्माण कार्य हुआ था। उस समय सोलह मार्ग यहां आकर मिलते थे, इसलिए इसका नाम सोलह राही पड़ गया। शहर का पानी खारा था, इसलिए पहले लोग सोलह राही स्थित कुओं से पेयजल लाते थे। कुछ दंत कथाओं के अनुसार, रुद्र सिंह ने इस ऐतिहासिक तालाब का निर्माण कराया था।
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सोलहराही व बड़ा तालाब के जीर्णोद्धार की बस योजनाएं बनते हुए देखी है। इन तालाबों को संवारने पर कभी काम हुआ ही नहीं। इन तालाबों को अगर संवार दिया जाए तो शहर को बड़ी सौगात मिल सकती है।

-प्रो. अनिरूद्ध यादव, समाजसेवी
प्राचीन कलात्मक कारीगरी के नायाब नमूने रहे रेवाड़ी शहर के सबसे प्राचीन सोलह राही सरोवर का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व रहा है, इसलिए इसका संरक्षण कर इसे बहुआयामी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
-सत्यवीर नाहड़िया, साहित्यकार एवं संस्कृति लेखक
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