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Rewari News: डीएपी के लिए अनाज मंडी में लगी किसानों की कतार
Wed, 24 Jun 2026 07:07 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 24 Jun 2026 07:07 PM IST
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जयप्रकाश, किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। खरीफ सीजन की तैयारी के बीच डीएपी की मांग बढ़ने लगी। इसके साथ ही किसानों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। बुधवार को अनाज मंडी में वितरण केंद्र पर खाद लेने के लिए किसानों की कतार लग गई। किसान सुबह से ही केंद्र के बाहर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। सुबह साढ़े 10 बजे तक वितरण केंद्र नहीं खुलने से किसानों में नाराजगी देखी गई।
किसानों का कहना है कि फसलों की बुवाई का समय चल रहा है। ऐसे में डीएपी की आवश्यकता सबसे अधिक होती है। खाद समय पर नहीं मिलने से खेती के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। किसानों ने मांग की है कि डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। वितरण केंद्र समय पर खोले जाएं ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
किसानों ने यह भी कहा कि हर वर्ष बुवाई के सीजन में खाद की किल्लत और लंबी कतार की समस्या सामने आती है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है। आगामी दिनों में खाद वितरण के लिए कृषि विभाग द्वारा क्यूआर कोड व्यवस्था अनिवार्य किए जाने की चर्चाओं के बीच किसान इस नए झंझट से बचने के लिए अभी से खाद केंद्रों पर पहुंचने लगे हैं। यही वजह है कि रेवाड़ी के विभिन्न सरकारी बिक्री केंद्रों पर सुबह से ही किसानों की लंबी कतार देखने को मिल रही हैं।
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इंसेट
एक किसान को अधिकतम 5 कट्टे मिल रहे
फिलहाल खाद वितरण के नियमों में ढील नहीं दी जा रही है। केवल उन्हीं किसानों को डीएपी के कट्टे दिए जा रहे हैं, जिन्होंने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर जमीन और फसल का पंजीकरण कराया है। केंद्रों पर किसानों को अपनी जमीन के रिकॉर्ड के साथ अपना आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य है। एक किसान को अधिकतम 5 कट्टे मिल रहे हैं।
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बाजरे की फसल के लिए डीएपी जरूरी
हाल ही में रेवाड़ी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जैसे ही मौसम ने करवट ली और बारिश हुई किसानों ने खेतों को तैयार कर बाजरे की बिजाई शुरू कर दी। बाजरे की फसल के लिए डीएपी सबसे जरूरी घटक माना जाता है। शुरुआती बिजाई के समय ही खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। मांग बढ़ते ही बिक्री केंद्रों पर सुबह ही किसान कतार में लग जाते हैं ताकि समय रहते उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद के कट्टे मिल सके।
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पौने 9 बजे से आया हूं। बताया गया कि 11 बजे वितरण केंद्र खुलेगा। तब से इंतजार कर रहा हूं। काफी समस्या होती है।-जयप्रकाश, किसान
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काफी समय खड़े रहना मुश्किल है। इंतजार करते थक गए तो बैठना पड़ा। ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि घंटों लाइन में न लगना पड़े।
सतबीर, किसान
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फसल की बुवाई का समय चल रहा है। ऐसे में डीएपी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह से ही लाइन में खड़ा हूं।-विनय कुमार, किसान
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सुबह से लाइन में लगे रहे लेकिन वितरण केंद्र देर से खुला। किसानों का समय भी कीमती होता है। काम छोड़कर यहां बैठना मजबूरी है।
जीतराम, किसान
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हर बार खेती के सीजन में यही स्थिति रहती है। किसानों को बार-बार परेशानी उठानी पड़ती है। अब भी खाद के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। होशियार सिंह, किसान
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वर्जन:
डीएपी का पर्याप्त स्टॉक है। इसलिए किसानों को ज्यादा स्टॉक करने की आवश्यकता नहीं है। किसानों को संयम रखना चाहिए।-डॉ. जितेंद्र अहलावत, कृषि उपनिदेशक
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रेवाड़ी। खरीफ सीजन की तैयारी के बीच डीएपी की मांग बढ़ने लगी। इसके साथ ही किसानों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। बुधवार को अनाज मंडी में वितरण केंद्र पर खाद लेने के लिए किसानों की कतार लग गई। किसान सुबह से ही केंद्र के बाहर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। सुबह साढ़े 10 बजे तक वितरण केंद्र नहीं खुलने से किसानों में नाराजगी देखी गई।
किसानों का कहना है कि फसलों की बुवाई का समय चल रहा है। ऐसे में डीएपी की आवश्यकता सबसे अधिक होती है। खाद समय पर नहीं मिलने से खेती के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। किसानों ने मांग की है कि डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। वितरण केंद्र समय पर खोले जाएं ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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किसानों ने यह भी कहा कि हर वर्ष बुवाई के सीजन में खाद की किल्लत और लंबी कतार की समस्या सामने आती है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है। आगामी दिनों में खाद वितरण के लिए कृषि विभाग द्वारा क्यूआर कोड व्यवस्था अनिवार्य किए जाने की चर्चाओं के बीच किसान इस नए झंझट से बचने के लिए अभी से खाद केंद्रों पर पहुंचने लगे हैं। यही वजह है कि रेवाड़ी के विभिन्न सरकारी बिक्री केंद्रों पर सुबह से ही किसानों की लंबी कतार देखने को मिल रही हैं।
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एक किसान को अधिकतम 5 कट्टे मिल रहे
फिलहाल खाद वितरण के नियमों में ढील नहीं दी जा रही है। केवल उन्हीं किसानों को डीएपी के कट्टे दिए जा रहे हैं, जिन्होंने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर जमीन और फसल का पंजीकरण कराया है। केंद्रों पर किसानों को अपनी जमीन के रिकॉर्ड के साथ अपना आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य है। एक किसान को अधिकतम 5 कट्टे मिल रहे हैं।
बाजरे की फसल के लिए डीएपी जरूरी
हाल ही में रेवाड़ी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जैसे ही मौसम ने करवट ली और बारिश हुई किसानों ने खेतों को तैयार कर बाजरे की बिजाई शुरू कर दी। बाजरे की फसल के लिए डीएपी सबसे जरूरी घटक माना जाता है। शुरुआती बिजाई के समय ही खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। मांग बढ़ते ही बिक्री केंद्रों पर सुबह ही किसान कतार में लग जाते हैं ताकि समय रहते उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद के कट्टे मिल सके।
पौने 9 बजे से आया हूं। बताया गया कि 11 बजे वितरण केंद्र खुलेगा। तब से इंतजार कर रहा हूं। काफी समस्या होती है।-जयप्रकाश, किसान
काफी समय खड़े रहना मुश्किल है। इंतजार करते थक गए तो बैठना पड़ा। ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि घंटों लाइन में न लगना पड़े।
सतबीर, किसान
फसल की बुवाई का समय चल रहा है। ऐसे में डीएपी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह से ही लाइन में खड़ा हूं।-विनय कुमार, किसान
सुबह से लाइन में लगे रहे लेकिन वितरण केंद्र देर से खुला। किसानों का समय भी कीमती होता है। काम छोड़कर यहां बैठना मजबूरी है।
जीतराम, किसान
हर बार खेती के सीजन में यही स्थिति रहती है। किसानों को बार-बार परेशानी उठानी पड़ती है। अब भी खाद के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। होशियार सिंह, किसान
वर्जन:
डीएपी का पर्याप्त स्टॉक है। इसलिए किसानों को ज्यादा स्टॉक करने की आवश्यकता नहीं है। किसानों को संयम रखना चाहिए।-डॉ. जितेंद्र अहलावत, कृषि उपनिदेशक

जयप्रकाश, किसान

जयप्रकाश, किसान

जयप्रकाश, किसान

जयप्रकाश, किसान