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पवन बठला बने नप के कार्यकारी प्रधान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Oct 2016 11:32 PM IST
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नगर परिषद उप-प्रधान पवन बठला ने बुधवार को नप कार्यकारी प्रधान का कार्यभार संभाला। नप ईओ मनोज एवं कुछ पार्षदों की उपस्थिति में बठला ने कार्यभार संभाला। गौरतलब है कि 19 सितंबर को तत्कालीन चेयरपर्सन शंकुतला भांडोरिया के खिलाफ पार्षदों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया था। जिसके बाद शकुंतला को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी।
कर्मचारियों की सैलरी एवं अन्य कामों को जारी सुचारू रखने के लिए नप ईओ मनोज यादव ने नप उप-प्रधान पवन बठला को चेयरपर्सन का चुनाव होने तक कार्यकारी प्रधान का कार्यभार सौंपा। इस अवसर पर बाठला गुट के पार्षद मौजूद रहे।
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भाजपा समर्थित पार्षदों ने बनाई दूरी
नगर परिषद में बड़ी मुंश्किलों के बाद भाजपा समर्थित पार्षदों अविश्वास प्रस्ताव लाकर चेयरपर्सन शकुंतला भांडोरिया की कुर्सी गिराई थी। इस गुट के पार्षद इससे पहले उप-प्रधान पवन बठला के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे। लेकिन बठला अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे। लेकिन 19 सिंतबर को प्रधान की कुर्सी खिसकने के बाद बठला को कार्यकारी प्रधान बनना निश्चित लग रहा था। लेकिन विरोधी गुट के पार्षद बठला की बजाय प्रशासन को नप की चाबी देेने के पक्ष में थे। इस गुट का विरोध कार्यकारी पदभार संभालने के वक्त भी देखने को मिला। पदभार ग्रहण करने के दौरान पार्षद रामौतार छाबड़ी, सुचित्रा चांदना, गुड्डु भारद्वाज, संजय मलिक, पार्षद पति धनिराम एवं हरीश अरोड़ा मौजूद थे। हालांकि पदभार संभालने के कुछ समय पश्चात पार्षद इंतेद्रपाल यादव, चंदन, पार्षद पति प्रदीप भार्गव एवं पार्षद सत्यनारायण भी नप कार्यालय पहुंच गए।
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कर्मचारियों की सैलरी एवं अन्य कामों को जारी सुचारू रखने के लिए नप ईओ मनोज यादव ने नप उप-प्रधान पवन बठला को चेयरपर्सन का चुनाव होने तक कार्यकारी प्रधान का कार्यभार सौंपा। इस अवसर पर बाठला गुट के पार्षद मौजूद रहे।
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भाजपा समर्थित पार्षदों ने बनाई दूरी
नगर परिषद में बड़ी मुंश्किलों के बाद भाजपा समर्थित पार्षदों अविश्वास प्रस्ताव लाकर चेयरपर्सन शकुंतला भांडोरिया की कुर्सी गिराई थी। इस गुट के पार्षद इससे पहले उप-प्रधान पवन बठला के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे। लेकिन बठला अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे। लेकिन 19 सिंतबर को प्रधान की कुर्सी खिसकने के बाद बठला को कार्यकारी प्रधान बनना निश्चित लग रहा था। लेकिन विरोधी गुट के पार्षद बठला की बजाय प्रशासन को नप की चाबी देेने के पक्ष में थे। इस गुट का विरोध कार्यकारी पदभार संभालने के वक्त भी देखने को मिला। पदभार ग्रहण करने के दौरान पार्षद रामौतार छाबड़ी, सुचित्रा चांदना, गुड्डु भारद्वाज, संजय मलिक, पार्षद पति धनिराम एवं हरीश अरोड़ा मौजूद थे। हालांकि पदभार संभालने के कुछ समय पश्चात पार्षद इंतेद्रपाल यादव, चंदन, पार्षद पति प्रदीप भार्गव एवं पार्षद सत्यनारायण भी नप कार्यालय पहुंच गए।
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