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पराली जलाने पर पांच हजार से 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान : डीसी
Sun, 12 Oct 2025 01:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 12 Oct 2025 01:06 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। पराली जलाने पर आईपीसी की धारा 188 के तहत छह माह की जेल और 5 हजार से 30 हजार रुपये तक जुर्माने या दोनों का प्रावधान है। पराली जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है। ऐसे में किसानों को पराली नहीं जलाना चाहिए। यह जानकारी डीसी अभिषेक मीणा ने दी।
डीसी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देशानुसार सरकार पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त है। पराली जलाने वाले किसानों पर जिला प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण बचाने के लिए हर किसान की जिम्मेदारी है कि वे पराली नहीं जलाएं। अन्य किसानों को जागरूक भी करें।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए सभी अपना फर्ज निभाएं और खेतों में पराली न जलाएंं। इसके लिए स्वयं और नई पीढ़ी को सुरक्षित व स्वस्थ जीवन देने के हम संकल्प लें। डीसी ने कहा कि वायु प्रदूषण से सांस, फेफड़ों से संबंधित बीमारियां तो होती हैं। सामान्य स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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खेतों में आग लगाने से हवा में प्रदूषण के छोटे-छोटे कणों से पीएम 2.5 का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे सिरदर्द एवं सांस लेने में तकलीफ होती है, अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारियां भी हो रही हैं। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वर क्षमता कम होती है। उन्होंने बताया कि इसके उपाय के लिए राष्ट्रीय कृषि नीति का पालन करें, पराली को जलाने के बजाए इससे जैविक खाद बनायें, इसका उपयोग बायोमास एनर्जी, छप्पर बनाने तथा मशरूम की खेती आदि करने में करें।
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रेवाड़ी। पराली जलाने पर आईपीसी की धारा 188 के तहत छह माह की जेल और 5 हजार से 30 हजार रुपये तक जुर्माने या दोनों का प्रावधान है। पराली जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है। ऐसे में किसानों को पराली नहीं जलाना चाहिए। यह जानकारी डीसी अभिषेक मीणा ने दी।
डीसी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देशानुसार सरकार पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त है। पराली जलाने वाले किसानों पर जिला प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण बचाने के लिए हर किसान की जिम्मेदारी है कि वे पराली नहीं जलाएं। अन्य किसानों को जागरूक भी करें।
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उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए सभी अपना फर्ज निभाएं और खेतों में पराली न जलाएंं। इसके लिए स्वयं और नई पीढ़ी को सुरक्षित व स्वस्थ जीवन देने के हम संकल्प लें। डीसी ने कहा कि वायु प्रदूषण से सांस, फेफड़ों से संबंधित बीमारियां तो होती हैं। सामान्य स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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खेतों में आग लगाने से हवा में प्रदूषण के छोटे-छोटे कणों से पीएम 2.5 का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे सिरदर्द एवं सांस लेने में तकलीफ होती है, अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारियां भी हो रही हैं। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वर क्षमता कम होती है। उन्होंने बताया कि इसके उपाय के लिए राष्ट्रीय कृषि नीति का पालन करें, पराली को जलाने के बजाए इससे जैविक खाद बनायें, इसका उपयोग बायोमास एनर्जी, छप्पर बनाने तथा मशरूम की खेती आदि करने में करें।