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अभिभावकों और शिक्षकों से बेहतर तालमेल बनाकर बच्चे रोकें अपराध : डीएसपी
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पुलिस की पाठशाला में डीएसपी मोनिका को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित करते स्कूल प्रबंधन समिति के सद?
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बुधवार को जैन पब्लिक स्कूल में पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक आईपीएस मोनिका रहीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों के साथ बेहतर तालमेल बैठाकर बच्चे भी अपराध रोकने में पुलिस की मदद कर सकते हैं। समय तेजी से बदल रहा है। ऐसे में पुलिस के सामने नई चुनौतियां भी आई हैं। साइबर अपराध और अपराधियों के तौर-तरीके बदल गए हैं। बच्चों के हाथों तक मोबाइल पहुंच गया है। काफी अपराध मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार अपराधियों के चेहरे पहचानने में पुलिस के सामने भी परेशानी खड़ी हो जाती है। बच्चे भी अपराध रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों को भविष्य के वाहन चालक बताते हुए कहा कि हमें जिम्मेदारी के साथ यातायात नियमों का पालन करना सीखना होगा। हमें सड़क पर चलते वक्त अपनी और अन्य लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि बच्चे अभिभावकों को स्कूल छोड़ने आते वक्त या घर लौटते वक्त हेलमेट पहनने अथवा सीट बेल्ट लगाकर वाहन चलाने का आग्रह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में जो आपने सीखा है, उसका इस्तेमाल करके भावी जीवन में आप जिम्मेदार नागरिक बनें।
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मोबाइल का इस्तेमाल करते वक्त रहें सतर्क : अरुण
कार्यक्रम के दौरान साइबर थाना प्रभारी अरुण ने कहा कि साइबर अपराध बढ़े हैं। इसलिए मोबाइल का इस्तेमाल करते समय सभी लोग सतर्क रहें। गूगल, इंस्टाग्राम या फेसबुक इस्तेेमाल करते वक्त अपनी प्रोफाइल को बंद करके रखना चाहिए। ऑनलाइन खरीदारी करते वक्त भूल से भी किसी अनजान वेबसाइट के लिंक को नहीं खोलें अन्यथा बैंक खाते से पैसा चोरी हो सकता है। किसी को भी अपने बैंक एटीएम, क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर अथवा मोबाइल पर आए ओटीपी बिल्कुल न बताएं। ऑनलाइन खरीदारी करते वक्त धोखाधड़ी होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए सचेत रहें। भुगतान करते वक्त जल्दबाजी न करें। इसके अलावा 1930, साइबर अपराध रोकने के लिए स्थापित टोल फ्री नंबर और वेबसाइट पर जाकर शिकायत दर्ज कराई जा सकती हैं।
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16 साल से कम आयु के बच्चे नहीं चला सकते वाहन : बहादुर सिंह
कार्यक्रम के दौरान यातायात पुलिस प्रभारी बहादुर सिंह ने बताया कि सड़क पर वाहन चलाना मोटर व्हीकल एक्ट के तहत पात्र व्यक्ति का हक है और पुलिस उसका सम्मान करती है, लेकिन यातायात नियमों का पालन करना भी उस व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि यातायात नियम दो प्रकार से काम करते हैं। पहला मेन्यूवली और दूसरा डिजिटली तरीके से किया जाता है। मेन्यूवली 9 इशारे होते हैं, जिनके माध्यम से यातायात पुलिस का जवान लोगों को वाहन सहित किसी चौराहे से दूरी दिशा में वाहन ले जाने में मदद करता है। डिजिटली चौक-चौराहों पर यातायात तीन बत्तियां लगी हुई हैं। लाल बत्ती वाहन चालकों को रुकने का संकेत देती है। पीली बत्ती चलने की तैयारी का इशारा करती है। हरी बत्ती चलने का इशारा देती है। उन्होंने यातायात नियमों के तहत कितनी राशि का जुर्माना पुलिस लगाती है, उसकी जानकारी उन्होंने शिक्षकों एवं बच्चों को दी।
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सवालों के जवाब देकर बच्चों को किया संतुष्ट
- डाटा और वाई-फाई इस्तेमाल, एकाउंट डिलीट करने के बाद फोटो और डाटा कहां जाता है? जैसे कई अहम सवाल छात्र देव और नितेश कौशल ने उठाए। इनके जवाब में साइबर एक्सपर्ट ने कहा कि कैलिफोर्निया में बड़ा सर्वर है, जहां सैकड़ों लोग यह जानकारी रिकॉर्ड करते हैं। इंडिया के अलावा अन्य देशों चीन और पाकिस्तान ने भी एप बना रखे हैं। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनके साथ किसी भी तरह की जानकारी साझा नहीं की जाती। छात्र प्रत्यक्ष, छात्रा प्रीति, यशिका ने भी सवाल पूछे।
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ये लोग रहे मौजूद
कार्यशाला में प्रिंसीपल सोनल छाबड़ा, डिंपल वशिष्ठ, स्नेह कौशिक, ममता जैन, श्रुति मेहता, मेघा, गोपाल वशिष्ठ, संगीता गंजू, सुधा, सूची मुदगिल, कुमुद, राजेश जैन, देवेंद्र, अजेश जैन, निशि यादव जबकि जैन स्कूल प्रबंधन समिति की ओर से उप प्रधान प्रदीप जैन, सचिव अमित जैन, सदस्य मोहित जैन आदि शामिल हुए। अंत में मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक मोनिका, साइबर सेल प्रभारी अरुण, यातायात पुलिस प्रबंधक बहादुर सिंह का आयोजकों की ओर से स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। मंच संचालन लीना मखीजा ने किया। कार्यक्रम में विशेष सहयोग स्कूल के चेयरमैन पदम जैन का रहा। अमर उजाला फाउंडेशन ने कार्यशाला में सहयोग देने के लिए उक्त स्कूल की प्रबंध समिति का आभार जताया है।
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उन्होंने कहा कि कई बार अपराधियों के चेहरे पहचानने में पुलिस के सामने भी परेशानी खड़ी हो जाती है। बच्चे भी अपराध रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों को भविष्य के वाहन चालक बताते हुए कहा कि हमें जिम्मेदारी के साथ यातायात नियमों का पालन करना सीखना होगा। हमें सड़क पर चलते वक्त अपनी और अन्य लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
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उन्होंने कहा कि बच्चे अभिभावकों को स्कूल छोड़ने आते वक्त या घर लौटते वक्त हेलमेट पहनने अथवा सीट बेल्ट लगाकर वाहन चलाने का आग्रह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में जो आपने सीखा है, उसका इस्तेमाल करके भावी जीवन में आप जिम्मेदार नागरिक बनें।
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मोबाइल का इस्तेमाल करते वक्त रहें सतर्क : अरुण
कार्यक्रम के दौरान साइबर थाना प्रभारी अरुण ने कहा कि साइबर अपराध बढ़े हैं। इसलिए मोबाइल का इस्तेमाल करते समय सभी लोग सतर्क रहें। गूगल, इंस्टाग्राम या फेसबुक इस्तेेमाल करते वक्त अपनी प्रोफाइल को बंद करके रखना चाहिए। ऑनलाइन खरीदारी करते वक्त भूल से भी किसी अनजान वेबसाइट के लिंक को नहीं खोलें अन्यथा बैंक खाते से पैसा चोरी हो सकता है। किसी को भी अपने बैंक एटीएम, क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर अथवा मोबाइल पर आए ओटीपी बिल्कुल न बताएं। ऑनलाइन खरीदारी करते वक्त धोखाधड़ी होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए सचेत रहें। भुगतान करते वक्त जल्दबाजी न करें। इसके अलावा 1930, साइबर अपराध रोकने के लिए स्थापित टोल फ्री नंबर और वेबसाइट पर जाकर शिकायत दर्ज कराई जा सकती हैं।
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16 साल से कम आयु के बच्चे नहीं चला सकते वाहन : बहादुर सिंह
कार्यक्रम के दौरान यातायात पुलिस प्रभारी बहादुर सिंह ने बताया कि सड़क पर वाहन चलाना मोटर व्हीकल एक्ट के तहत पात्र व्यक्ति का हक है और पुलिस उसका सम्मान करती है, लेकिन यातायात नियमों का पालन करना भी उस व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि यातायात नियम दो प्रकार से काम करते हैं। पहला मेन्यूवली और दूसरा डिजिटली तरीके से किया जाता है। मेन्यूवली 9 इशारे होते हैं, जिनके माध्यम से यातायात पुलिस का जवान लोगों को वाहन सहित किसी चौराहे से दूरी दिशा में वाहन ले जाने में मदद करता है। डिजिटली चौक-चौराहों पर यातायात तीन बत्तियां लगी हुई हैं। लाल बत्ती वाहन चालकों को रुकने का संकेत देती है। पीली बत्ती चलने की तैयारी का इशारा करती है। हरी बत्ती चलने का इशारा देती है। उन्होंने यातायात नियमों के तहत कितनी राशि का जुर्माना पुलिस लगाती है, उसकी जानकारी उन्होंने शिक्षकों एवं बच्चों को दी।
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सवालों के जवाब देकर बच्चों को किया संतुष्ट
- डाटा और वाई-फाई इस्तेमाल, एकाउंट डिलीट करने के बाद फोटो और डाटा कहां जाता है? जैसे कई अहम सवाल छात्र देव और नितेश कौशल ने उठाए। इनके जवाब में साइबर एक्सपर्ट ने कहा कि कैलिफोर्निया में बड़ा सर्वर है, जहां सैकड़ों लोग यह जानकारी रिकॉर्ड करते हैं। इंडिया के अलावा अन्य देशों चीन और पाकिस्तान ने भी एप बना रखे हैं। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनके साथ किसी भी तरह की जानकारी साझा नहीं की जाती। छात्र प्रत्यक्ष, छात्रा प्रीति, यशिका ने भी सवाल पूछे।
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ये लोग रहे मौजूद
कार्यशाला में प्रिंसीपल सोनल छाबड़ा, डिंपल वशिष्ठ, स्नेह कौशिक, ममता जैन, श्रुति मेहता, मेघा, गोपाल वशिष्ठ, संगीता गंजू, सुधा, सूची मुदगिल, कुमुद, राजेश जैन, देवेंद्र, अजेश जैन, निशि यादव जबकि जैन स्कूल प्रबंधन समिति की ओर से उप प्रधान प्रदीप जैन, सचिव अमित जैन, सदस्य मोहित जैन आदि शामिल हुए। अंत में मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक मोनिका, साइबर सेल प्रभारी अरुण, यातायात पुलिस प्रबंधक बहादुर सिंह का आयोजकों की ओर से स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। मंच संचालन लीना मखीजा ने किया। कार्यक्रम में विशेष सहयोग स्कूल के चेयरमैन पदम जैन का रहा। अमर उजाला फाउंडेशन ने कार्यशाला में सहयोग देने के लिए उक्त स्कूल की प्रबंध समिति का आभार जताया है।