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Rewari News: टोयोटा फॉर्च्यूनर गाड़ी की पूरी कीमत वापस देने का आदेश
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रेवाडी। टोयोटा फॉर्च्यूनर गाड़ी का क्लेम नहीं देने पर उपभोक्ता फोरम ने 45 दिन के अंदर गाड़ी की पूरी कीमत 43,70,479 रुपये व क्षतिपूर्ति मुआवजा, वाद खर्चा मय ब्याज अदा करने का आदेश इंश्योरेंस कंपनी को दिया है। उपभोक्ता फोरम ने यह फैसला 25 सितंबर को सुनाया है।
अधिवक्ता मोहित जैन, संदीप भाटी, ललित सैनी ने बताया कि शिकायतकर्ता धनपत सिंह ने गाड़ी उत्तम टोयोटा एजेंसी रेवाड़ी से वर्ष 2021 में खरीद की थी। अक्तूबर 2022 में गांव खरखडा अंडरपास से गुजरते समय अंडरपास में जमा पानी में बंद हो गई, जिसको क्रेन की मदद से बाहर निकालकर एजेंसी में पहुंचाया गया। एजेंसी में गाड़ी को टोटल लाॅस बताया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने इंश्योरेन्स क्लेम देने से मना कर दिया। जिस पर नवम्बर 2022 में शिकायतकर्ता ने एक मुकदमा उपभोक्ता फोरम में दायर किया था, जिसमें कुल 10 महीनों की सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम ने बीमा कम्पनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 45 दिनों के अंदर-अंदर गाड़ी की पूरी कीमत, क्षतिपूर्ति मुआवजा, वाद खर्चा मय ब्याज का आदेश दिया। यह आदेश भी दिए है कि यदि बीमा कंपनी की ओर से आदेश की पालना नहीं की जाती है तो सेक्शन 71 व 72 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत 3 साल का कारावास व 1 लाख रुपये जुर्माना या दोनों लगाया जाएगा।
अधिवक्ता मोहित जैन ने बताया कि गाड़ी फुल इंश्योर्ड थी। बीमा कंपनी की ओर से प्रदत्त सभी प्रकार के ऐड-ऑन कवर लिए हुए थे। राईट टू इंवाॅइस कवर के अनुसार यदि गाड़ी पूरी लॉस में चली जाती हैं तो इंश्योरेंस कंपनी को गाड़ी की पूरी कीमत अदा करनी पड़ेगी। जिला उपभोक्ता कमीशन को 50 लाख रुपये तक के मुकदमे सुनने का अधिकार है जबकि कुल क्लेम राशि मय ब्याज की गणना आदेश की तिथि तक लगभग 49 लाख रुपये है।
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अधिवक्ता मोहित जैन, संदीप भाटी, ललित सैनी ने बताया कि शिकायतकर्ता धनपत सिंह ने गाड़ी उत्तम टोयोटा एजेंसी रेवाड़ी से वर्ष 2021 में खरीद की थी। अक्तूबर 2022 में गांव खरखडा अंडरपास से गुजरते समय अंडरपास में जमा पानी में बंद हो गई, जिसको क्रेन की मदद से बाहर निकालकर एजेंसी में पहुंचाया गया। एजेंसी में गाड़ी को टोटल लाॅस बताया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने इंश्योरेन्स क्लेम देने से मना कर दिया। जिस पर नवम्बर 2022 में शिकायतकर्ता ने एक मुकदमा उपभोक्ता फोरम में दायर किया था, जिसमें कुल 10 महीनों की सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम ने बीमा कम्पनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 45 दिनों के अंदर-अंदर गाड़ी की पूरी कीमत, क्षतिपूर्ति मुआवजा, वाद खर्चा मय ब्याज का आदेश दिया। यह आदेश भी दिए है कि यदि बीमा कंपनी की ओर से आदेश की पालना नहीं की जाती है तो सेक्शन 71 व 72 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत 3 साल का कारावास व 1 लाख रुपये जुर्माना या दोनों लगाया जाएगा।
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अधिवक्ता मोहित जैन ने बताया कि गाड़ी फुल इंश्योर्ड थी। बीमा कंपनी की ओर से प्रदत्त सभी प्रकार के ऐड-ऑन कवर लिए हुए थे। राईट टू इंवाॅइस कवर के अनुसार यदि गाड़ी पूरी लॉस में चली जाती हैं तो इंश्योरेंस कंपनी को गाड़ी की पूरी कीमत अदा करनी पड़ेगी। जिला उपभोक्ता कमीशन को 50 लाख रुपये तक के मुकदमे सुनने का अधिकार है जबकि कुल क्लेम राशि मय ब्याज की गणना आदेश की तिथि तक लगभग 49 लाख रुपये है।
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