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Rewari News: खराब लिंगानुपात पर 25 सीएचसी-पीएचसी प्रभारियों को नोटिस जारी
Mon, 18 Nov 2024 01:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 18 Nov 2024 01:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में लिंगानुपात पर खराब स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने 25 सीएचसी व पीएचसी के प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जांच में पाया गया कि 30 गांवों में एक हजार पुरुष पर 800 से कम दर्ज की गई महिलाएं जबकि नौ गांवों में महिलाओं की संख्या 500 से भी कम पाई गई।
जिले के कई गांवों में जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) की निराशाजनक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने 25 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे खराब एसआरबी के लिए कारण बताने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस के अनुसार संबंधित चिकित्सा प्रभारियों से कहा गया है कि वे गांव के सरपंच, पार्षद और महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) विभाग के प्रतिनिधियों के साथ गर्भवती महिला के पंजीकरण और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए आयोजित की जा रही गतिविधियों की समीक्षा के लिए संयुक्त बैठक करें। बैठक का उद्देश्य खराब लिंगानुपात के कारणों का पता लगाना और भविष्य में इसे बेहतर करने की योजना तैयार करना है। नोडल अधिकारी (पीएनडीटी) डॉ. भंवर सिंह ने सीएचसी और पीएचसी के प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की पुष्टि करते हुए कहा कि खराब लिंगानुपात के पीछे के सटीक कारणों और कमियों का पता लगाना आवश्यक है, ताकि ऐसी कमियां दूर की जा सकें।
एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि गुरुग्राम के बाद रेवाड़ी में पिछले दस महीने में दूसरा सबसे कम लिंगानुपात (868) दर्ज किया गया है। जिले के 30 से अधिक गांवों में लिंगानुपात 800 से कम रहा है, जबकि नौ गांवों में यह 500 से कम रहा है।
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नोटिस का जवाब मिलने के बाद अधिकारी करेंगे बैठक
खराब लिंगानुपात के लिए जिम्मेदार कारणों के बारे में जवाब मिलते ही सभी सीएचसी व पीएचसी के प्रभारियों की एक संयुक्त बैठक होगी। ताकि इस बात पर चर्चा की जा सके कि जिले में एसआरबी को कैसे सुधारा जा सकता है और इसके लिए और क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है। विभाग का मानना है कि लिंगानुपात में सुधार के लिए लड़कियों के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना जरूरी है।
वर्जन
जिन सीएचसी पीएचसी में नोटिस दिया गया है, अभी नोटिस का जवाब नहीं मिला है। नोटिस का जवाब मिलने के बाद बैठक की जाएगी। वैसे स्वास्थ्य विभाग की ये रूटीन प्रक्रिया है।-डॉ. भंवर सिंह, नोडल अधिकारी (पीएनडीटी)।
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रेवाड़ी। जिले में लिंगानुपात पर खराब स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने 25 सीएचसी व पीएचसी के प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जांच में पाया गया कि 30 गांवों में एक हजार पुरुष पर 800 से कम दर्ज की गई महिलाएं जबकि नौ गांवों में महिलाओं की संख्या 500 से भी कम पाई गई।
जिले के कई गांवों में जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) की निराशाजनक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने 25 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे खराब एसआरबी के लिए कारण बताने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस के अनुसार संबंधित चिकित्सा प्रभारियों से कहा गया है कि वे गांव के सरपंच, पार्षद और महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) विभाग के प्रतिनिधियों के साथ गर्भवती महिला के पंजीकरण और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए आयोजित की जा रही गतिविधियों की समीक्षा के लिए संयुक्त बैठक करें। बैठक का उद्देश्य खराब लिंगानुपात के कारणों का पता लगाना और भविष्य में इसे बेहतर करने की योजना तैयार करना है। नोडल अधिकारी (पीएनडीटी) डॉ. भंवर सिंह ने सीएचसी और पीएचसी के प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की पुष्टि करते हुए कहा कि खराब लिंगानुपात के पीछे के सटीक कारणों और कमियों का पता लगाना आवश्यक है, ताकि ऐसी कमियां दूर की जा सकें।
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एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि गुरुग्राम के बाद रेवाड़ी में पिछले दस महीने में दूसरा सबसे कम लिंगानुपात (868) दर्ज किया गया है। जिले के 30 से अधिक गांवों में लिंगानुपात 800 से कम रहा है, जबकि नौ गांवों में यह 500 से कम रहा है।
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नोटिस का जवाब मिलने के बाद अधिकारी करेंगे बैठक
खराब लिंगानुपात के लिए जिम्मेदार कारणों के बारे में जवाब मिलते ही सभी सीएचसी व पीएचसी के प्रभारियों की एक संयुक्त बैठक होगी। ताकि इस बात पर चर्चा की जा सके कि जिले में एसआरबी को कैसे सुधारा जा सकता है और इसके लिए और क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है। विभाग का मानना है कि लिंगानुपात में सुधार के लिए लड़कियों के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना जरूरी है।
वर्जन
जिन सीएचसी पीएचसी में नोटिस दिया गया है, अभी नोटिस का जवाब नहीं मिला है। नोटिस का जवाब मिलने के बाद बैठक की जाएगी। वैसे स्वास्थ्य विभाग की ये रूटीन प्रक्रिया है।-डॉ. भंवर सिंह, नोडल अधिकारी (पीएनडीटी)।