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Rewari News: विन्सन मैसिफ बेस कैम्प अंटार्कटिका पहुंचे नरेंद्र

Fri, 20 Dec 2024 11:39 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Fri, 20 Dec 2024 11:39 PM IST
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Narendra reached Vinson Massif Base Camp Antarctica
फोटो : 09विनसन मसिफ बेस कैम्प अंटार्टिका पहुंचे नरेंद्र सिंह यादव। स्रोत : परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
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कोसली। नेहरूगढ़ निवासी नरेंद्र सिंह यादव अपने 7 समिट प्रोजेक्ट के आखिरी अभियान को पूरा करने के लिए 20 दिसंबर को विन्सन मैसिफ बेस कैम्प अंटार्कटिका पहुंच गए हैं। 18 दिसंबर को स्पार्क मिंडा के चेयरमैन अशोक मिंडा ने फ्लैग ऑफ कर उन्हें रवाना किया था।
इस अभियान में पूरे विश्व के पर्वतारोही शामिल हुए हैं जिसमें नरेंद्र भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। स्पार्क मिंडा के सौजन्य से अभियान चल रहा है। विन्सन को जमा देने वाला पर्वत भी कहा जाता है, क्योंकि यहां का तापमान शून्य से लगभग 50-60 डिग्री कम रहता है। यह पर्वत दुर्गम है। अधिक ठंड और तेज हवा के चलते इसपर चढ़ाई खतरनाक है। अंटार्कटिका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी विन्सन मैसिफ (4892 मीटर) है। यह 21 किमी (13 मील) लंबा और 13 किमी (8 मील) चौड़ा है और एल्सवर्थ पर्वत की सेंटिनल रेंज में स्थित है।
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सात महाद्वीपों पर फतेह करने का है सपना : सेना के जवान कृष्णचंद के बेटे नरेंद्र का सपना सात महाद्वीपों को फतेह कर विश्व रिकॉर्ड बनाने का है। नरेंद्र पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतेह कर कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने 2012 में बेसिक्स ऑफ माउंटेनियरिंग, 2013 में एडवांस, 2015 में एमओआई (मेथड्स ऑफ इंस्ट्रक्शन) और 2022 में सर्च एंड रेस्क्यू समेत सभी प्रमुख पर्वतारोहण पाठ्यक्रम पूरे कर लिए हैं। नरेंद्र ने 2016 और 2022 में बिना किसी अनुकूलन के सिर्फ छह दिनों में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। उन्होंने माउंट किलिमंजारो को चार बार, माउंट एल्ब्रस को दो बार ट्रैवर्स के जरिए और माउंट कोसियसको सहित ऑस्ट्रेलिया की दस सबसे ऊंची चोटियों पर तीन बार फतेह किया है। उन्होंने दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी एकॉनकागुआ और उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी डेनाली पर भी फतेह की है।
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12 वर्ष की आयु से शुरू हुई नरेंद्र की पर्वतारोहण यात्रा

नरेंद्र की पर्वतारोहण यात्रा 12 वर्ष की आयु में स्कूल के दिनों में शुरू हुई। तब उन्होंने जम्मू और कश्मीर की पहाड़ियों पर चढ़ना शुरू किया था। उन्होंने 2008 में नियमित रूप से पर्वतारोहण का अभ्यास करना शुरू किया था। 19 वर्ष की आयु में वे 6,512 मीटर ऊंची भागीरथी-2 और 5,612 मीटर ऊंची डीकेडी-2 पर चढ़ने वाले सबसे कम उम्र के पर्वतारोही बन गए थे। उन्होंने कालिंदी दर्रा, वासुकी ताल दर्रा को भी सफलतापूर्वक पार किया और लेह और गढ़वाल में चोटियों पर चढ़े। नरेंद्र को विभिन्न वैश्विक रिकॉर्ड संस्थानों द्वारा विश्व सम्राट के रूप में सम्मानित किया गया है और उन्होंने पर्वतारोहण में 22 प्रभावशाली विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। सात शिखरों को पूरा करने के लिए उनका अंतिम अभियान अंटार्कटिका में विन्सन मैसिफ है। इस चढ़ाई को पूरा करके वह सात शिखरों को प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के पुरुष पर्वतारोही बन जाएंगे। वर्तमान में सात शिखरों को पूरा करने का रिकॉर्ड एक पर्वतारोही के पास है, जिसकी उम्र 31 वर्ष, 1 महीने और 25 दिन थी। नरेंद्र का लक्ष्य 30 वर्ष और लगभग 16 दिन की आयु में इस रिकार्ड को तोड़ना है, तथा यह अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल करने वाले विश्व के पहले युवा पुरुष पर्वतारोही बनना है।
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