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अंग्रेजों के समय की नगर पालिका अब नगर निगम बनने की ओर अग्रसर
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रेवाड़ी। रेवाड़ी नगरपालिका से नगर परिषद बनने के बाद काफी बदलाव हुए हैं। रेवाड़ी नगर परिषद बनने के बाद शहर में आबादी तेजी से बढ़ रही है। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही नगर पालिका अब नगर निगम बनने की ओर अग्रसर है। नगर परिषद बनने के बाद रेवाड़ी की आबादी 96 हजार से बढ़कर 2 लाख 63 हजार हो गई है।
अंग्रेजों के जमाने में रेवाड़ी एक नगर पालिका हुआ करती थी। पूर्व विधायक रघु यादव ने वर्ष 1987 में राव तुलाराम पार्क में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल के समक्ष रेवाड़ी को अलग जिला बनाने की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने विधायक की मांग पर एक नवंबर 1989 को रेवाड़ी को नया जिला घोषित किया था। अलग से जिला बनने के बाद वर्ष 1994 में रेवाड़ी को नगर पालिका से नगर परिषद बनाया गया। जुलाई 1995 में रेवाड़ी नगर परिषद के पहली बार चुनाव हुए। चुनाव की घोषणा के समय 22 वार्ड पर चुनाव होने की घोषणा की गई, लेकिन बाद में 24 वार्ड के चुनाव कराए गए थे। अगर वर्तमान समय की बात की जाए तो रेवाड़ी नगर परिषद में 31 वार्ड हैं। वहीं पहले चुनाव के समय रेवाड़ी नगर परिषद की आबादी 96 हजार व 22 वोट हुआ करते थे। लेकिन वर्तमान समय में रेवाड़ी नगर परिषद की आबादी लगभग 2 लाख 63 हजार है। वहीं लगभग 1 लाख 8 हजार मतदाता नगर परिषद से जुड़े हुए हैं।
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नगर परिषद बनने के बाद 2 गांव, 6 सेक्टर व 66 कॉलोनियां हुईं अधिकृत
रेवाड़ी के नगर परिषद बनने के बाद तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 1995 में रेवाड़ी शहर में केवल एक सेक्टर व कॉलोनियां थी। उस समय एकमात्र सेक्टर एक को न्यू मंडी टाउनशिप सेंटर के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब इसे सेक्टर एक नाम से जाना जाता है। इसके साथ रेवाड़ी नगर परिषद से सेक्टर तीन, सेक्टर चार, सेक्टर- पांच, सेक्टर-18, सेक्टर-19 व सेक्टर 21 जुड़ गए हैं। वहीं कॉलोनियों की बात करें तो उस समय केवल रेवाड़ी नगर परिषद में 6 कॉलोनियां हुआ करती थी, लेकिन रेवाड़ी के नगर परिषद बनने के बाद 66 कॉलोनियां नगर परिषद से जुड़ चुकी हैं। नगर परिषद की घोषणा होते हुए 11 कॉलोनी व वर्ष 2004 में 32, वर्ष 2014 में 5 तथा 2018 में 18 कॉलोनी नगर परिषद से जुड़ चुकी हैं।
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वार्ड 22 से बढ़कर हुए 31
वर्ष 1994 में रेवाड़ी को नगर परिषद बनाए जाने की घोषणा की गई थी। उस समय रेवाड़ी नगर परिषद में 22 वार्ड होते थे। लेकिन वर्ष 1995 में हुए पहले चुनाव के समय 25 वार्ड पर चुनाव हुए। इसके बाद तीन वार्ड बंदी के साथ रेवाड़ी नगर परिषद के वार्ड 31 हो गए हैं।
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पहली चेयरपर्सन बनीं थीं सरोज भारद्वाज
नगर परिषद बनने के बाद वर्ष 1995 में सरोज भारद्वाज पहली बार नगर परिषद चेयरपर्सन बनीं थीं। वहीं वर्ष 1996 में सुचित्रा चांदना ने बहुमत हासिल कर सरोज भारद्वाज की जगह प्रधान बनी। इसके बाद वर्ष 2002-05 तक हरीश अरोड़ा नगर परिषद के प्रधान रहे। वहीं विजय राव ने 2005-10 तक नगर परिषद की कमान संभाली। इसके बाद तीन साल तक चुनाव नहीं हुए। वर्ष 2013 में हुए चुनाव में शंकुतला भांडोरिया विजयी रहीं। वर्ष 2017 में विनीता पीपल शंकुतला भांडोरिया की जगह कमान संभाली। इनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद तीन साल तक चुनाव नहीं हो पाए। वर्ष 2020 में हुए चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी पूनम यादव नगर परिषद चेयरपर्सन बनीं।
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रेवाड़ी के नगरपालिका से नगरपरिषद बनने के बाद काफी विस्तार हुआ है। नगर परिषद के पहले चुनाव में 25 वार्ड हुआ करते थे। लेतिन तीन बार हुई वार्ड बंदी के बाद वार्डो की संख्या 31 हो गई है। 25 साल रेवाड़ी नगर परिषद की आबादी से दोगुुना बढ़ गई है।
- विजय राव, पूर्व नगर परिषद चेयरमैन
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रेवाड़ी शहर का इतिहास बहुत पुराना है। पुराने जमाने में रेवाड़ी एक शहर हुआ करता था। वहीं गुरूग्राम केवल एक गांव हुआ करता था। जितनी तेजी से गुरुग्राम में विकास हुआ उतनी तेजी से रेवाड़ी में नहीं हो पाया। अंग्रेजों के जमाने में रेवाड़ी एक नगरपालिका हुआ करती थी। अंग्रेजों द्वारा बनाई गई रेवाड़ी नगरपालिका की इमारत में आज भी रेवाड़ी नगर परिषद बनी हुई है।
- सतीश खोला, भाजपा सेवा प्रकोष्ठ संयोजक।
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अंग्रेजों के जमाने में रेवाड़ी एक नगर पालिका हुआ करती थी। पूर्व विधायक रघु यादव ने वर्ष 1987 में राव तुलाराम पार्क में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल के समक्ष रेवाड़ी को अलग जिला बनाने की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने विधायक की मांग पर एक नवंबर 1989 को रेवाड़ी को नया जिला घोषित किया था। अलग से जिला बनने के बाद वर्ष 1994 में रेवाड़ी को नगर पालिका से नगर परिषद बनाया गया। जुलाई 1995 में रेवाड़ी नगर परिषद के पहली बार चुनाव हुए। चुनाव की घोषणा के समय 22 वार्ड पर चुनाव होने की घोषणा की गई, लेकिन बाद में 24 वार्ड के चुनाव कराए गए थे। अगर वर्तमान समय की बात की जाए तो रेवाड़ी नगर परिषद में 31 वार्ड हैं। वहीं पहले चुनाव के समय रेवाड़ी नगर परिषद की आबादी 96 हजार व 22 वोट हुआ करते थे। लेकिन वर्तमान समय में रेवाड़ी नगर परिषद की आबादी लगभग 2 लाख 63 हजार है। वहीं लगभग 1 लाख 8 हजार मतदाता नगर परिषद से जुड़े हुए हैं।
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नगर परिषद बनने के बाद 2 गांव, 6 सेक्टर व 66 कॉलोनियां हुईं अधिकृत
रेवाड़ी के नगर परिषद बनने के बाद तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 1995 में रेवाड़ी शहर में केवल एक सेक्टर व कॉलोनियां थी। उस समय एकमात्र सेक्टर एक को न्यू मंडी टाउनशिप सेंटर के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब इसे सेक्टर एक नाम से जाना जाता है। इसके साथ रेवाड़ी नगर परिषद से सेक्टर तीन, सेक्टर चार, सेक्टर- पांच, सेक्टर-18, सेक्टर-19 व सेक्टर 21 जुड़ गए हैं। वहीं कॉलोनियों की बात करें तो उस समय केवल रेवाड़ी नगर परिषद में 6 कॉलोनियां हुआ करती थी, लेकिन रेवाड़ी के नगर परिषद बनने के बाद 66 कॉलोनियां नगर परिषद से जुड़ चुकी हैं। नगर परिषद की घोषणा होते हुए 11 कॉलोनी व वर्ष 2004 में 32, वर्ष 2014 में 5 तथा 2018 में 18 कॉलोनी नगर परिषद से जुड़ चुकी हैं।
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वार्ड 22 से बढ़कर हुए 31
वर्ष 1994 में रेवाड़ी को नगर परिषद बनाए जाने की घोषणा की गई थी। उस समय रेवाड़ी नगर परिषद में 22 वार्ड होते थे। लेकिन वर्ष 1995 में हुए पहले चुनाव के समय 25 वार्ड पर चुनाव हुए। इसके बाद तीन वार्ड बंदी के साथ रेवाड़ी नगर परिषद के वार्ड 31 हो गए हैं।
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पहली चेयरपर्सन बनीं थीं सरोज भारद्वाज
नगर परिषद बनने के बाद वर्ष 1995 में सरोज भारद्वाज पहली बार नगर परिषद चेयरपर्सन बनीं थीं। वहीं वर्ष 1996 में सुचित्रा चांदना ने बहुमत हासिल कर सरोज भारद्वाज की जगह प्रधान बनी। इसके बाद वर्ष 2002-05 तक हरीश अरोड़ा नगर परिषद के प्रधान रहे। वहीं विजय राव ने 2005-10 तक नगर परिषद की कमान संभाली। इसके बाद तीन साल तक चुनाव नहीं हुए। वर्ष 2013 में हुए चुनाव में शंकुतला भांडोरिया विजयी रहीं। वर्ष 2017 में विनीता पीपल शंकुतला भांडोरिया की जगह कमान संभाली। इनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद तीन साल तक चुनाव नहीं हो पाए। वर्ष 2020 में हुए चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी पूनम यादव नगर परिषद चेयरपर्सन बनीं।
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रेवाड़ी के नगरपालिका से नगरपरिषद बनने के बाद काफी विस्तार हुआ है। नगर परिषद के पहले चुनाव में 25 वार्ड हुआ करते थे। लेतिन तीन बार हुई वार्ड बंदी के बाद वार्डो की संख्या 31 हो गई है। 25 साल रेवाड़ी नगर परिषद की आबादी से दोगुुना बढ़ गई है।
- विजय राव, पूर्व नगर परिषद चेयरमैन
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रेवाड़ी शहर का इतिहास बहुत पुराना है। पुराने जमाने में रेवाड़ी एक शहर हुआ करता था। वहीं गुरूग्राम केवल एक गांव हुआ करता था। जितनी तेजी से गुरुग्राम में विकास हुआ उतनी तेजी से रेवाड़ी में नहीं हो पाया। अंग्रेजों के जमाने में रेवाड़ी एक नगरपालिका हुआ करती थी। अंग्रेजों द्वारा बनाई गई रेवाड़ी नगरपालिका की इमारत में आज भी रेवाड़ी नगर परिषद बनी हुई है।
- सतीश खोला, भाजपा सेवा प्रकोष्ठ संयोजक।