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Rewari News: आयुष डिस्पेंसरी में शुरू हुई मिट्टी-पट्टी थेरेपी, मरीजों को मिल रही राहत
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रेवाड़ी। शहर के सेक्टर-4 स्थित आयुष डिस्पेंसरी पर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए मिट्टी-पट्टी और जलनेति जैसी प्राचीन और प्रभावी पद्धतियों की शुरुआत की गई है। बदलते मौसम और गलत खान-पान के कारण इन दिनों ओपीडी में पेट दर्द, मरोड़े और दस्त (डायरिया) के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
प्रतिदिन 3 से 4 मरीज इन समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं जिन्हें मिट्टी पट्टी से राहत दी जा रही है। जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. बसंत कुमार ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में विस्तार किया जा रहा है। मिट्टी-पट्टी पेट व आंखों के रोगों में लाभकारी है और शरीर को शीतलता प्रदान करती है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करती है। मरोड़ों से राहत देती है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में सहायक है।
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ऐसे तैयार की जाती है मिट्टी पट्टी
मिट्टी पट्टी के लिए साफ और छनी हुई मिट्टी को 12 घंटे तक पानी में भिगोया जाता है। इसके बाद सूती कपड़े पर आधा से एक इंच मोटी परत बनाकर इसे पेट, सिर, आंख या रीढ़ पर लगाया जाता है।
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साइनोसाइटिस व नजले में कारगर जलनेति
नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डॉ. राकेश छिल्लर के अनुसार जलनेति थैरेपी साइनोसाइटिस, पुराना नजला और एलर्जी के मरीजों के लिए बेहद प्रभावी है। इसमें विशेष पात्र की मदद से नाक के एक छिद्र से पानी डालकर दूसरे से निकाला जाता है जिससे श्वसन मार्ग साफ होता है और सिरदर्द व छींक से राहत मिलती है।
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संक्रमण से बचाव के लिए बरतें सावधानी
पेट संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छता का ध्यान रखें। पानी उबालकर पीएं, बासी भोजन से बचें और भोजन से पहले व शौच के बाद हाथ साबुन से धोएं। शरीर में पानी की कमी न होने दें और ओआरएस या नींबू पानी का सेवन करें।
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प्रतिदिन 3 से 4 मरीज इन समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं जिन्हें मिट्टी पट्टी से राहत दी जा रही है। जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. बसंत कुमार ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में विस्तार किया जा रहा है। मिट्टी-पट्टी पेट व आंखों के रोगों में लाभकारी है और शरीर को शीतलता प्रदान करती है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करती है। मरोड़ों से राहत देती है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में सहायक है।
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ऐसे तैयार की जाती है मिट्टी पट्टी
मिट्टी पट्टी के लिए साफ और छनी हुई मिट्टी को 12 घंटे तक पानी में भिगोया जाता है। इसके बाद सूती कपड़े पर आधा से एक इंच मोटी परत बनाकर इसे पेट, सिर, आंख या रीढ़ पर लगाया जाता है।
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साइनोसाइटिस व नजले में कारगर जलनेति
नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डॉ. राकेश छिल्लर के अनुसार जलनेति थैरेपी साइनोसाइटिस, पुराना नजला और एलर्जी के मरीजों के लिए बेहद प्रभावी है। इसमें विशेष पात्र की मदद से नाक के एक छिद्र से पानी डालकर दूसरे से निकाला जाता है जिससे श्वसन मार्ग साफ होता है और सिरदर्द व छींक से राहत मिलती है।
संक्रमण से बचाव के लिए बरतें सावधानी
पेट संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छता का ध्यान रखें। पानी उबालकर पीएं, बासी भोजन से बचें और भोजन से पहले व शौच के बाद हाथ साबुन से धोएं। शरीर में पानी की कमी न होने दें और ओआरएस या नींबू पानी का सेवन करें।