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Rewari News: कोसली और भड़गीं में बंदरों का आतंक, हर माह 100 से अधिक लोगों को बना रहे निशाना

Mon, 27 Apr 2026 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 11:27 PM IST
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Monkeys terrorize Kosli and Bhadgin, targeting over 100 people every month.
मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद
कोसली। कोसली और भड़गीं में बंदरों के आतंक से ग्रामीण भयभीत हैं। हर माह 100 से अधिक लोगों को बंदर निशाना बना रहे हैं। हालत यह है कि लोग घरों से भी निकलने में डर रहे हैं। इस महीने बच्चों और महिलाओं को सबसे ज्यादा बंदरों ने निशाना बनाया है। कोसली सामान्य अस्पताल और नाहड़ सीएचसी में हर महीने 100 से 150 बंदर काटने के मामले सामने आ रहे हैं।
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गांव भड़गीं में इस माह कई महिलाओं और बच्चों को बंदरों ने निशाना बनाया है। इतना ही नहीं बंदरों के हमले से घबराकर एक 10 वर्षीय बच्चे ने छत से छलांग लगा दी जिससे उसका पैर टूट गया था। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर घरों में घुसकर सामान तोड़ते हैं और खाने-पीने की चीजों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
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सिर्फ गांवों में ही नहीं कोसली रेलवे स्टेशन पर बंदरों के झुंड बैठे रहते हैं। आए दिन यात्रियों पर हमला कर देते हैं। कई बार यात्रियों का सामान छीनने की घटनाएं भी सामने आई हैं लेकिन रेलवे विभाग के पास इसका कोई समाधान नहीं दिख रहा है।
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शिव कॉलोनी, नई बस्ती और विश्वकर्मा कॉलोनी के निवासियों ने करीब दस दिन पहले एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की थी। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। गांव भड़गीं के पूर्व पंच सुरेंद्र सिंह ने बताया कि वह कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन और पंचायत स्तर पर कोई समाधान नहीं निकाला जा सका।





बंदरों के हमले ने गंभीर रूप से घायल कर दिया था। लंबे इलाज के बाद हालत में सुधार हुआ लेकिन डर अभी भी बना हुआ है। मुंह पर बंदर के काटने के निशान आज भी हैं। - भगवती देवी भड़गीं निवासी


बंदरों के झुंड दिन और रात गांव में घूमते रहते हैं और अचानक हमला कर देते हैं जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।

सुमन देवी, भाकली बी
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हम दो बार बंदरों के हमले का शिकार हो चुके हैं। अब हमेशा हाथ में छड़ी लेकर चलते हैं क्योंकि कभी भी हमला हो सकता है। इसलिए बचाव करना जरूरी है।

बंसीलाल, भड़गीं
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गांव में स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि बच्चे और बुजुर्ग कोई भी सुरक्षित नहीं है। पिछले वर्ष एक बच्ची पर हुए हमले ने पूरे गांव को झकझोर दिया था।
मनोज कुमार, कोहारड़
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गांव में रोजाना किसी न किसी पर बंदरों का हमला हो रहा है और कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा। जल्द समाधान होना चाहिए।

सुरेश देवी, बल्ला
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प्रशासन को कई बार शिकायत देने के बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है जबकि वह स्वयं भी इस समस्या से प्रभावित हो चुके हैं।
जितेंद्र कुमार, भड़गीं

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वर्जन
विभाग की ओर से बंदरों को पकड़ने या नियंत्रित करने के लिए कोई अलग से बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है जिसके कारण कार्यों में दिक्कत आती है। इसके बावजूद विभाग अपने स्तर पर लगातार प्रयास कर रहा है।

अनिल यादव, बीडीपीओ

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

मुंह पर बंदर के काटने के निशान दिखातीं भगवती देवी। संवाद

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