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Rewari News: नाबालिग को गर्भवती बताने के मामले में मंत्री ने सीएमओ को लगाई फटकार

Fri, 30 Jun 2023 11:42 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Fri, 30 Jun 2023 11:42 PM IST
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Minister reprimanded CMO for telling minor as pregnant
रेवाड़ी। बाल भवन में शुक्रवार को जिला लोक संपर्क एवं परिवेदना समिति की बैठक हुई। इसमें श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री अनूप धानक ने नाबालिग को गर्भवती बताने के मामले में रेवाड़ी के सीएमओ को जमकर फटकार लगाई। साथ ही उन्होंने सीएमओ को तीन दिन में मामले की जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। वहीं दोषी के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी कहा है।
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इस दौरान बैठक में कुल 18 परिवाद रखे गए, जिनमें से 12 परिवादों का निपटान करते हुए शेष परिवादों का समाधान अगली बैठक तक सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए। मंत्री ने कहा कि अधिकारी आमजन की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करवाएं। यदि प्रक्रिया में समय लगे तो परिवादी को समय सीमा बताएं तथा काम पूरा होने पर उसे सूचित करें।
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करीब 3 माह पूर्व एक नाबालिग को चिकित्सक द्वारा गर्भवती बता दिया गया था। मामले में सीएमओ ने एक कमेटी बनाई थी, जिसमें भाजपा नेत्री हेमलता तंवर को भी शामिल करने का आदेश दिया गया था, लेकिन हेमलता तंवर को जांच के दौरान शामिल नहीं किया गया। इस पर मंत्री अनूप धानक ने को सीएमओ को 3 दिन के अंदर जांच कर दोषी लोगों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अब रेवाड़ी के एसडीएम होशियार सिंह मामले की जांच करेंगे।
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यह था मामला
खोल थाना क्षेत्र में 3 माह पहले पेट दर्द की शिकायत और थायराइड का टेस्ट कराने पर सरकारी डॉक्टर ने एक नाबालिग को गर्भवती बता दिया था। खोल थाना क्षेत्र के अधीन आने वाली कुंड चौकी पुलिस ने उस वक्त आनन-फानन में पाॅक्सो एक्ट के तहत केस भी दर्ज कर लिया, लेकिन बाद में जब बच्ची की दूसरे अस्पताल में जांच कराई गई तो बच्ची गर्भवती नहीं मिली। मामले में कुंड चौकी के प्रभारी सहित दो अन्य को लाइनहाजिर कर दिया गया था।

अमर उजाला ने कई बार उठाया मामला
बेहद धीमी गति से चल रही मामले की जांच को लेकर अमर उजाला ने भी कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए है, लेकिन जांच के नाम पर स्वास्थ्य विभाग ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। मामले में को लेकर जब भी संबंधित अधिकारियों से पूछा जाता तो रटा-रटाया एक ही जवाब मिलता कि मामले की जांच चल रही है। जबकि सच्चाई तो यह है कि विभाग जांच के नाम पर दोषी को बचाने का प्रयास कर रहा है।
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