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Rewari News: बारिश से बाजरा, ग्वार और कपास की फसल को पहुंचा नुकसान
Sun, 15 Sep 2024 01:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 15 Sep 2024 01:04 AM IST
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फोटो : 05रेवाड़ी। कोसली में बाजरा के खेत में जमा बरसाती पानी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली। बारिश का पानी खेत में भरने से पक कर तैयार बाजरा की फसल जमीन पर बिछ गई है। शुक्रवार की शाम हुई बारिश से क्षेत्र में खड़ी बाजरा, ग्वार, कपास की फसल को नुकसान पहुंचा है।
एक ओर जहां बाजरे की फसल जमीन पर बिछ गई है, वहीं पानी भरने से कपास की फसल पीली पड़ जाएगी। इसके साथ ही ग्वार की फसल में अधिक बारिश के कारण चुनरिया रोग का प्रकोप बढ़ जाएगा। किसान राजेश, सुखपाल, अनिल, विजयपाल का कहना है कि समूचे क्षेत्र में चार घंटे की बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है। वहीं, बाजरा की फसल गिरने से खेतों में भरे पानी में गल जाएगी। इसके कारण पशुओं के लिए चारे की नौबत भी सामने आएगी। क्षेत्र के किसानों ने खराब फसलों की गिरदावरी करवा कर मुआवजा देने की मांग की है।
क्षेत्र में कपास की फसल नकदी मानी जाती है। वहीं बाजरा, ग्वार की फसलों से किसान अपने पशुओं का साल भर का चारा व खाने के लिए अनाज की व्यवस्था करते हैं। किसान कपास की नकदी फसल बेचकर अगली फसल के लिए बीज, खाद की व्यवस्था करता है। मगर अब बरसात ने किसान को चिंता में डाल दिया है कि अगली फसल बोने के लिए खाद बीज खरीदने को लेकर कर्जा लेना पड़ेगा।
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कोसली। बारिश का पानी खेत में भरने से पक कर तैयार बाजरा की फसल जमीन पर बिछ गई है। शुक्रवार की शाम हुई बारिश से क्षेत्र में खड़ी बाजरा, ग्वार, कपास की फसल को नुकसान पहुंचा है।
एक ओर जहां बाजरे की फसल जमीन पर बिछ गई है, वहीं पानी भरने से कपास की फसल पीली पड़ जाएगी। इसके साथ ही ग्वार की फसल में अधिक बारिश के कारण चुनरिया रोग का प्रकोप बढ़ जाएगा। किसान राजेश, सुखपाल, अनिल, विजयपाल का कहना है कि समूचे क्षेत्र में चार घंटे की बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है। वहीं, बाजरा की फसल गिरने से खेतों में भरे पानी में गल जाएगी। इसके कारण पशुओं के लिए चारे की नौबत भी सामने आएगी। क्षेत्र के किसानों ने खराब फसलों की गिरदावरी करवा कर मुआवजा देने की मांग की है।
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क्षेत्र में कपास की फसल नकदी मानी जाती है। वहीं बाजरा, ग्वार की फसलों से किसान अपने पशुओं का साल भर का चारा व खाने के लिए अनाज की व्यवस्था करते हैं। किसान कपास की नकदी फसल बेचकर अगली फसल के लिए बीज, खाद की व्यवस्था करता है। मगर अब बरसात ने किसान को चिंता में डाल दिया है कि अगली फसल बोने के लिए खाद बीज खरीदने को लेकर कर्जा लेना पड़ेगा।
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