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जेसीबी पर बर्फ का पहाड़ गिरने से जवान शहीद
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जेसीबी पर बर्फ का पहाड़ गिरने से जवान शहीद
- विवाह की खुशी मातम में बदली, आज राजकीय सम्मान से किया जाएगा अंतिम संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। जम्मू-कश्मीर में सड़क पर बिछी बर्फ को साफ करते समय अचानक जेसीबी पर बर्फ का पहाड़ गिरने से जिला के गांव बीदावास निवासी 34 वर्षीय दलीप ढिल्लन शहीद हो गए। उनके शहीद होने की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। पड़ोस में विवाह की खुशियां मातम में बदल गई। वीरवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा, जहां पंचायती जमीन पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
गांव के सरपंच जोगेंद्र सिंह ने बताया कि दलीप जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के सीमा सड़क संगठन इकाई में तैनात थे और 20 अप्रैल को सड़क से बर्फ को हटाते समय उनकी जेसीबी पर बर्फ का पहाड़ गिर गया। जिसके नीचे दबने से वे शहीद हो गए। शहादत की खबर के बाद गांव में मातम का माहौल है। उनके पिता धर्मसिंह, माता कौशल्या, पत्नी निर्मला व बच्चों का रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि दलीप के पड़ोस में लड़के की शादी है, जिसका कोठीयार (मिठाई रखने का कमरा) भी दलीप के घर में बनाया हुआ है। तय तिथि के अनुसार 21 अप्रैल को आननफानन में कुछ परिजनों के साथ बरात को बगैर ढोल बाजे के रवाना किया गया है। सरपंच ने बताया कि ग्राम पंचायत ने फैसला लिया है कि दलीप का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से किया जाएगा। गांव के युवा बाइक रैली द्वारा जयकारे लगाते हुए उनकी वाहिनी का स्वागत करेंगे। बताया जाता है कि शहीद को 8 साल की बेटी और 5 साल का बेटा भी है।
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फोटो-21
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- विवाह की खुशी मातम में बदली, आज राजकीय सम्मान से किया जाएगा अंतिम संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। जम्मू-कश्मीर में सड़क पर बिछी बर्फ को साफ करते समय अचानक जेसीबी पर बर्फ का पहाड़ गिरने से जिला के गांव बीदावास निवासी 34 वर्षीय दलीप ढिल्लन शहीद हो गए। उनके शहीद होने की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। पड़ोस में विवाह की खुशियां मातम में बदल गई। वीरवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा, जहां पंचायती जमीन पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
गांव के सरपंच जोगेंद्र सिंह ने बताया कि दलीप जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के सीमा सड़क संगठन इकाई में तैनात थे और 20 अप्रैल को सड़क से बर्फ को हटाते समय उनकी जेसीबी पर बर्फ का पहाड़ गिर गया। जिसके नीचे दबने से वे शहीद हो गए। शहादत की खबर के बाद गांव में मातम का माहौल है। उनके पिता धर्मसिंह, माता कौशल्या, पत्नी निर्मला व बच्चों का रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि दलीप के पड़ोस में लड़के की शादी है, जिसका कोठीयार (मिठाई रखने का कमरा) भी दलीप के घर में बनाया हुआ है। तय तिथि के अनुसार 21 अप्रैल को आननफानन में कुछ परिजनों के साथ बरात को बगैर ढोल बाजे के रवाना किया गया है। सरपंच ने बताया कि ग्राम पंचायत ने फैसला लिया है कि दलीप का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से किया जाएगा। गांव के युवा बाइक रैली द्वारा जयकारे लगाते हुए उनकी वाहिनी का स्वागत करेंगे। बताया जाता है कि शहीद को 8 साल की बेटी और 5 साल का बेटा भी है।
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