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Rewari News: निजी खेल नर्सरियों की नहीं जारी हुई सूची
Wed, 04 Jun 2025 12:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 04 Jun 2025 12:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में निजी खेल नर्सरियों की सूची अभी जारी नहीं हुई है। इसकी वजह से निजी खेल नर्सरियां शुरू नहीं हो पाई हैं। अब खेल विभाग की ओर से बड़े अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा जाएगा।
खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने सरकारी और निजी खेल नर्सरी शुरू करने की योजना बनाई है, लेकिन खिलाड़ियों को पूरे साल इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। निजी संस्थाओं में खेल नर्सरियां जनवरी से बंद हैं। ग्राम पंचायतों और सरकारी स्कूलों में खेल सेंटर चल रहे हैं।
पिछले वर्ष 62 स्थानों पर खेल नर्सरी चलाई गई थी, जिनमें से दो बंद हो गईं थी। इस बार मार्च में नर्सरी के लिए विभाग ने आवेदन मांगे थे। खेल विभाग ने कमेटी बनाकर आवेदन करने वाले संस्थानों की ग्राउंड रिपोर्ट लेकर विभाग के पास भेज दी थी लेकिन निजी खेल नर्सरियों की सूची जारी नहीं हुई।
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अधिकारियों का कहना है कि नर्सरी का मामला निदेशालय स्तर पर अटका है। निजी स्कूलों में पिछले वर्ष शुरू हुई खेल नर्सरियों के संचालकों ने बताया कि नर्सरी में चयनित खिलाड़ियों को वर्ष में 6 या 7 महीने ही सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
जहां नर्सरी देरी से शुरू होती हैं, वहीं जनवरी में बंद हो जाती हैं। 12 महीने तक नर्सरी का लाभ मिलना चाहिए। नर्सरी संचालकों का कहना है कि मार्च में ही आवेदन सहित सभी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, ताकि अप्रैल से नर्सरी शुरू हो जानी चाहिए
सरकारी संस्थानों में चल रही 50 नर्सरियां
पिछले माह में सरकारी स्कूलों व ग्राम पंचायतों में 50 खेल नर्सरियां मिली थीं। वहीं 20 नर्सरियां सरकारी खेल केंद्र में चल रही हैं। गांव व पंचायत में जिले को हॉकी व एथलेटिक्स की 6-6, वालीबॉल, फुटबॉल व कबड्डी की 5-5, नेटबॉल व वुशू, हैंडबॉल की 2-2 नर्सरियों के अलावा, बॉक्सिंग, बास्केटबॉल, शूटिंग व अन्य नर्सरियां मिली हैं। इन नर्सरियों का संचालन 11 अप्रैल से हो गया था।
वर्जन
अभी निजी नर्सरियों की विभाग से मंजूरी नहीं मिली है। बड़े अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा जाएगा।-ममता, कार्यवाहक जिला खेल अधिकारी
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रेवाड़ी। जिले में निजी खेल नर्सरियों की सूची अभी जारी नहीं हुई है। इसकी वजह से निजी खेल नर्सरियां शुरू नहीं हो पाई हैं। अब खेल विभाग की ओर से बड़े अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा जाएगा।
खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने सरकारी और निजी खेल नर्सरी शुरू करने की योजना बनाई है, लेकिन खिलाड़ियों को पूरे साल इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। निजी संस्थाओं में खेल नर्सरियां जनवरी से बंद हैं। ग्राम पंचायतों और सरकारी स्कूलों में खेल सेंटर चल रहे हैं।
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पिछले वर्ष 62 स्थानों पर खेल नर्सरी चलाई गई थी, जिनमें से दो बंद हो गईं थी। इस बार मार्च में नर्सरी के लिए विभाग ने आवेदन मांगे थे। खेल विभाग ने कमेटी बनाकर आवेदन करने वाले संस्थानों की ग्राउंड रिपोर्ट लेकर विभाग के पास भेज दी थी लेकिन निजी खेल नर्सरियों की सूची जारी नहीं हुई।
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अधिकारियों का कहना है कि नर्सरी का मामला निदेशालय स्तर पर अटका है। निजी स्कूलों में पिछले वर्ष शुरू हुई खेल नर्सरियों के संचालकों ने बताया कि नर्सरी में चयनित खिलाड़ियों को वर्ष में 6 या 7 महीने ही सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
जहां नर्सरी देरी से शुरू होती हैं, वहीं जनवरी में बंद हो जाती हैं। 12 महीने तक नर्सरी का लाभ मिलना चाहिए। नर्सरी संचालकों का कहना है कि मार्च में ही आवेदन सहित सभी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, ताकि अप्रैल से नर्सरी शुरू हो जानी चाहिए
सरकारी संस्थानों में चल रही 50 नर्सरियां
पिछले माह में सरकारी स्कूलों व ग्राम पंचायतों में 50 खेल नर्सरियां मिली थीं। वहीं 20 नर्सरियां सरकारी खेल केंद्र में चल रही हैं। गांव व पंचायत में जिले को हॉकी व एथलेटिक्स की 6-6, वालीबॉल, फुटबॉल व कबड्डी की 5-5, नेटबॉल व वुशू, हैंडबॉल की 2-2 नर्सरियों के अलावा, बॉक्सिंग, बास्केटबॉल, शूटिंग व अन्य नर्सरियां मिली हैं। इन नर्सरियों का संचालन 11 अप्रैल से हो गया था।
वर्जन
अभी निजी नर्सरियों की विभाग से मंजूरी नहीं मिली है। बड़े अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा जाएगा।-ममता, कार्यवाहक जिला खेल अधिकारी